लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- – मधुश्रावणी के महत्व
मधुश्रावणी आस्था, विश्वास आ नियम निष्ठा सँ लगातार चौदह दिन धरि पूजा करे वाला एकटा एहन पावनि जे मात्र एहि मिथिलेटा मे होइछ।ई पावनि भाग्य सौभाग्यक लेल पूजल जाइछ।एहि पावनिक शुरूआत साओन कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि सँ होइछ। ई पावनि मात्र ब्राह्मण,कायस्थ आ सोनारक नवविवाहिता धिया/ पूतौह करैछ। पावनि सँ एक दिन पूर्वे पवनैतिन अरबा अरबाइन भोजन कए जकरा कि ठेठ मैथिलीमे नहा खाए कहैछ, कए सांझुक पहरमे सोलह श्रृंगार सँ सुसज्जित भए उत्साहित भए फूललोढ़ी करैछ।ई फूललोढ़ी लगातार चौदह दिन तक यानी साओन शुक्ल द्वितीया तिथि तक चलैछ। एहि फूललोढ़ीमे डाइर पात समेत जाही जूही, पसीजक पात,तगर पात,चिरचिरी,नीम नेबो,दुइभ अकॉनक पात इत्यादि..अनिवार्य रूप सँ रहैछ।माय/ सासु राइतमे कोबरमे कोबर लिखी सूर्य चंद्रमा नवग्रहके साक्षी धए मैनाक पात पर बिसहरा लिखैछ। ई बिसहरा पिठार,सेनूर, मेंहदी, चानन आ काजर सँ लिखाइछ। तकर बाद लाबा भुजाइछ आ हरैदके गौरी बनैछ। कोबरमे पुरहर पातिल राखल जाइछ।
एहि पावनिमे पबनैतिन सभ वस्तु सासुरेके खाइत, पिबैत,पहिरैत आ नैवेद्य दैत छथिन।एहि पावनिमे गौरी, साठी(षष्ठी देवी) कलश, चनाई आ बिसहराके पूजा कएल जाइछ। ई महीना पावन पवित्र शिवमास सँ जानल जाइछ तैं एहिमे शिव परिवारक बहुत रास कथा होइछ।एहिमे शुरू मे पांचो बिन्नी सुनि फूल छिरियाइ फेर बिन्नी सुनी कथा सुनि पुनः पांचो बिन्नी सुनल जाइछ।मौना पंचमी सँ शुक्ल तृतिया तक ई कथा चलैछ। तृतिया कए मधुश्रावणी पावनि होइछ।मधुश्रावणी सँ एक दिन पहिने पुनः कोबर घर साफ कए नव अहिवात समेत नव मैनाक पात पर बिसहरा लिखी गौरी बनैछ। सभ किछु पहिल दिन सन। फेर नहिरा/ सासुर सँ भार अबैछ।मधुश्रावणी दिन पूजा कए कथा काल सोहाग मैथ सभकें बिलहल जाइछ। मान्यता अछि जे ई सोहाग मथला सँ नवविवाहिता के सोहाग बढ़ैछ।सोहाग ताँबामे धनी-धान दूभी आ बेलक काठी सँ मथल जाइछ। एहि दिन अहिवाती भोजनक सेहो बहुत महत्त्व होइछ।अहिवाती संग पबनैतिन सेहो एकबेर खीर भोजन करैछ। मधुश्रावणी दिन जिनका ई पावनि होइत छैन सभ अहिवाती अनोन भोजन करैछ।मान्यता अछि जे अनोन खयला सँ पतिके सर्प दोष नञि लगैछ।मिथिलानी सभ अपन पति,संतति भाग्य सौभाग्य आ नैहर- सासुरक कल्याणक हेतु कठिन सँ कठिन व्रत सभ करैछ जाहिमे एकटा इहो बहुत खास पावनि होइछ।।
