लेख विचार
प्रेषित: सुष्मिता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- शिक्षापर हावी राजनीति
टूटैत विश्वास, भटकैत भविष्य
“जखन देशक भविष्य कलम छोड़ि सड़क पर उतरए लेल विवश भऽ जाए, तखन बुझबाक चाही जे प्रश्न केवल एकटा छात्रक नहि, सम्पूर्ण राष्ट्रक भविष्यक अछि ।”
शिक्षा कोनो राष्ट्रक मेरुदण्ड अछि। ई केवल अक्षरज्ञान नहि, बल्कि संस्कार, विवेक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण आ सशक्त राष्ट्रनिर्माणक आधारशिला अछि। विद्यालय आ विश्वविद्यालय ओ स्थान छथि जतय विद्यार्थी अपन परिश्रम, अनुशासन आ ज्ञानक बल पर अपन भविष्य गढ़ैत छथि। मुदा आइ शिक्षा व्यवस्था पर राजनीति एतेक हावी भऽ गेल अछि जे शिक्षाक मूल उद्देश्य धीरे-धीरे धूमिल होइत जा रहल अछि।
वर्तमान समयमे दिल्लीक जंतर-मंतर पर हजारों छात्र-छात्री अपन शैक्षणिक माँगक समर्थनमे शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करैत छथि। हुनक हाथमे उठल तख्तीसभ केवल विरोधक प्रतीक नहि, बल्कि वर्षौंक कठिन परिश्रम, परिवारक सपना आ भविष्यक चिन्ताक दस्तावेज छथि। ओ आन्दोलन नहि, न्याय आ विश्वासक अपेक्षा कऽ रहल छथि।
कोनो विद्यार्थी घर-परिवारसँ दूर रहि दिन-राति मेहनत एहि लेल नहि करैत अछि जे एक दिन पुस्तकक स्थान पर आन्दोलनक तख्ती उठाबए पड़य। एकटा माय अपन इच्छासभ त्यागैत छथि, एकटा पिता अपन आवश्यकतासँ समझौता करैत छथि, केवल एहि आशामे जे हुनकर सन्तान अपन मेहनतक बल पर सफल होयत। मुदा जखन परीक्षा स्थगित होइत अछि, नियुक्ति प्रक्रियामे विलम्ब होइत अछि अथवा शिक्षा राजनीतिक विवादक विषय बनैत अछि, तखन केवल परीक्षा नहि रुकैत अछि—रुकि जाइत अछि हजारों परिवारक सपना।
आजुक युवा आन्दोलन नहि, अपन परिश्रमक सम्मान चाहैत अछि। ओ टकराव नहि, विश्वास चाहैत अछि। ओ खोखला आश्वासन नहि, निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी नियुक्ति आ न्यायपूर्ण अवसर चाहैत अछि। ओ एहन व्यवस्था चाहैत अछि जतय भविष्य राजनीतिक स्वार्थ नहि, बल्कि योग्यता, परिश्रम आ निष्पक्षतासँ निर्धारित होइ।
लोकतंत्रमे अपन आवाज उठाबय प्रत्येक नागरिकक अधिकार अछि। मुदा विद्यार्थीक भविष्य राजनीतिक लाभ-हानिक विषय नहि बनय। शिक्षा पर निर्णय विशेषज्ञक अनुभव, राष्ट्रीय आवश्यकता आ विद्यार्थीक हितक आधार पर होयबाक चाही।
एकटा राष्ट्रक वास्तविक शक्ति ओकर युवा छथि। जँ युवा निराश भऽ जायत, तँ राष्ट्रक प्रगतिक गति स्वतः मन्द पड़ि जाएत। विश्वविद्यालय आन्दोलनक अखाड़ा नहि, बल्कि अनुसन्धान, नवाचार, चिन्तन आ चरित्र निर्माणक केन्द्र होयबाक चाही। कक्षामे ज्ञानक दीप जरबाक चाही, नाराक प्रतिध्वनि नहि।
समयक आवश्यकता अछि जे सरकार, विपक्ष, शिक्षाविद् आ समाज सभ मिलि शिक्षा व्यवस्थामे जनविश्वास पुनः स्थापित करथि। परीक्षा समय पर हो, नियुक्ति पारदर्शी हो, शैक्षणिक संस्थानक स्वायत्तता सुरक्षित रहय आ प्रत्येक योग्य विद्यार्थीकेँ समान अवसर भेटय। कारण शिक्षा पर कोनो राजनीतिक दलक अधिकार नहि, ई सम्पूर्ण राष्ट्रक साझा धरोहर अछि।
देशक भविष्य संसदमे बनैत नीति सँ प्रभावित होइत अछि, मुदा ओकर नींव विद्यालयक कक्षामे रखल जाइत अछि। तेँ समयक पुकार अछि—शिक्षा पर राजनीति नहि, राजनीतिमे शिक्षाक आदर्श हावी हो। कारण जखन कलम सशक्त होइत अछि, तखन राष्ट्र समृद्ध होइत अछि; आ जखन विद्यार्थीक परिश्रमकेँ न्याय भेटैत अछि, तखन राष्ट्रक भविष्य आलोकित होइत अछि।
जय मिथिला! जय मैथिली!
