लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- : शिक्षा पर हावी राजनीति —
राष्ट्रक भविष्य पर गंभीर प्रश्न
“जाहि देशक शिक्षा सुदृढ़ होइत अछि, ओहि देशक भविष्य स्वतः उज्ज्वल बनैत अछि।” शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करबाक माध्यम नहि, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक सोच आ जिम्मेदार नागरिक तैयार करबाक आधार अछि। मुदा वर्तमान समयमे शिक्षा पर राजनीतिक हस्तक्षेप निरन्तर बढ़ि रहल अछि, जाहिसँ शिक्षाक मूल उद्देश्य प्रभावित भऽ रहल अछि। जखन शैक्षणिक निर्णय विद्यार्थीक हित, शोध आ गुणवत्ताक स्थान पर राजनीतिक लाभ-हानिक आधार पर लेल जाइत अछि, तँ एकर नकारात्मक प्रभाव सम्पूर्ण राष्ट्र पर पड़ैत अछि।
विद्यालयसँ विश्वविद्यालय धरि शिक्षक नियुक्ति, कुलपतिक चयन, परीक्षा आयोजन, पाठ्यक्रम परिवर्तन आ प्रशासनिक निर्णयसभमे निष्पक्षताक स्थान पर राजनीतिक प्रभाव देखल जा रहल अछि। एहि कारण योग्य विद्यार्थी आ शिक्षक निराश होइत छथि तथा शिक्षण संस्थानक विश्वसनीयता कमजोर होइत जाइत अछि। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बिना राष्ट्रक समुचित विकास संभव नहि।
एहि समय दिल्लीक जंतर-मंतर पर देशक विभिन्न राज्यसँ आएल हजारों छात्र अपन शैक्षणिक अधिकारक समर्थनमे लोकतांत्रिक ढंगसँ प्रदर्शन कऽ रहल छथि। हुनकर मुख्य माँग समय पर परीक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, रिक्त पदसभ पर शीघ्र नियुक्ति आ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करबाक अछि। छात्रसभक ई आन्दोलन केवल विरोध नहि, बल्कि शिक्षाव्यवस्थामे व्याप्त समस्यासभ दिस सरकार आ समाजक ध्यान आकर्षित करबाक प्रयास अछि। जखन विद्यार्थी पुस्तक छोड़ि सड़क पर उतरबाक लेल विवश भऽ जाथि, तँ ई स्थिति चिन्ताजनक अवश्य कहल जाएत।
बेर-बेर परीक्षा स्थगित भेनाइ, नियुक्तिमे विलम्ब आ प्रशासनिक अनिश्चिततासँ युवासभक बहुमूल्य समय नष्ट होइत अछि। एक वर्षक देरी सेहो कतेको विद्यार्थीक सपना आ भविष्य प्रभावित कऽ दैत अछि। परिणामस्वरूप बेरोजगारी, मानसिक तनाव आ सामाजिक असंतोष बढ़ैत अछि।
लोकतंत्रमे छात्रक राजनीतिक जागरूकता आवश्यक अछि, मुदा शिक्षण संस्थान दलगत राजनीति नहि, बल्कि ज्ञान, अनुसन्धान, तर्क, नवाचार आ चरित्र निर्माणक केन्द्र रहबाक चाही। सरकार, शिक्षाविद्, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक आ छात्र संगठन सभकेँ संवाद, पारदर्शिता आ उत्तरदायित्वक माध्यमसँ समाधान खोजबाक आवश्यकता अछि। परीक्षा समय पर हो, नियुक्ति निष्पक्ष हो, शोधकेँ प्रोत्साहन भेटय आ विद्यार्थीक भविष्य सुरक्षित रहय।
निष्कर्षतः, शिक्षा आ राजनीति दुनूक अपन महत्त्व अछि, मुदा राजनीति शिक्षाक संरक्षक बनय, नियंत्रक नहि। विद्यार्थीक आवाजकेँ राजनीतिक दृष्टिसँ नहि, बल्कि राष्ट्रक भविष्यक पुकार मानि सुनल जाए। गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष आ समयबद्ध शिक्षा व्यवस्था सँहि सशक्त, जागरूक आ विकसित भारतक निर्माण संभव अछि। आखिरकार, शिक्षाक जीत ही राष्ट्रक जीत अछि, आ विद्यार्थीक मुस्कान भविष्यक सबसँ पैघ पूँजी। जय मिथिला, जय मैथिली।
