लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय- पुरूषोत्तम मासक महत्व
पुरूष+ उत्तम= पुरूषोत्तम
यानी कि जे पुरूष मे उत्तम (नारायण) छथि हुनकर मास।
पौराणिक कथानुसार जखन दानवराज हिराणाकश्यपक अप्पन पुत्र भक्त प्रह्लाद के नारायण के प्रति अत्यधिक स्नेह आ समर्पित देखलनि त’ हुनका बहुत दुख भेलनि कारण ओ विष्णु भगवानके अपन सभ सँ पैघ दुश्मन बुझैत छल आ प्रल्हाद भगवानक अनन्य भक्त।हिराणाकश्यपक के वरादन छल जे वो बारहो मास, सातो दिन, राइत या दिनमे, अस्त्र शस्त्र सँ, नर पशु ककरो सँ यानि कि सृष्टिके कोनहुँ चीज सँ नञि मरत।
ओ प्रह्लाद के पर्वत पर सँ फेकलक,मद-मस्त हाथीके सामने छोरलक, होलिका के संग आइग में बैसेलक मुदा प्रह्लाद के एकटा रोइंया नञि टूटलैक। तखन खाम्भमे बान्हि मारबालेल दौड़ल त’ भगवान श्री हरि नरसिंह रूपमे ओकर वध कएल। आ ई तेरहम मासक (अधिकमासक) निर्माण कएल जकर नाम पुरूषोत्तम मास राखल गेल।
चूंकि ई मास भगवानक खास मास छैन तैं एहि मासमे भगवानक अर्चना कएल जाइत अछि। एहि मासक पूजा पाठ बहुत फलदायी होइत अछि।मल्लेमास लोग गेरूका,गेरूकी,राजगीर…..जाए स्नान करैत अछि जे बहुत पूण्यदायक होइत अछि।मल्लेमासमे एक महीना तक कोनहुँ शुभ कार्य नञि कएल जाइत अछि। ई मल्लेमास तीन बरख पर लगैत अछि।
महाभारत पुराणक अनुसार जखन पांचो पांडव पांचाली के संग दर-वदर भटकैत छलाह त’ भगवानक कहला पर द्रोपदी संग पांडव नियमानुसार पूरे पुरूषोत्तम मास पूजा पाठ कएलनि त’ हुनकर सभ कष्ट दूर भ’ गेलनि।ई मल्लेमास ज्यों साउन मासमे पड़ैत अछि त’ नव विवाहिता लोकनि डेढ़ महीना तक फूल लोइढ़ मधुश्रावणी पावनि पूजैत छथि, कारण नागक पूजा आरंभ आ अंत मल्लेमासमे वर्जित छैक।
अधिकमासक दुनू एकादशी व्रत कएला सँ भगवानक जनार्दन बड्ड प्रसन्न होइत छथिन।
पद्म पुराणके अनुसार एक धरती पर सब मल्लेमास के अवहेलना करैन। मलेमास भगवान विष्णु के शरण में जाक कहल- हे मधूसुदन अहाँ त’ हिराणाकश्यपक के वध करबालेल मलेमासक निर्माण कएलौं मुदा सभतरि सभ हमर अवहेलना करैत अछि। हम आब धरती पर नञि जाएब। भगवान सभ देवता सहित मलेमासके गौ लोक ल’ गेलथीन आ कहलखीन- जे कियो एहि पुरूषोत्तम मासके मल्लेमास कहि अवहेलना करत ओकर दान-पुण्य,तीर्थ,गंगा स्नान,जप- तप अर्थात को नहुँदा पुण्य कर्म हम कहियो नञि स्वीकार करबै। जेना आगि सँ प्रगट द्रोपदीके मल्लेमासक अवहेलना कएला सँ पांच पतिके पत्नी बनए पड़लनि तहिना कोनहुँ रूपमे सभके दण्ड भोग पड़तैन।
मुदा तैयो कतहु- कतहु मल्लेमासके अशुद्ध मानि पूजा पाठ रोकल जाइत अछि। जाहि बरख मल्लेमास पड़ैत छैक त’ लोक कोनहुँ नव व्रत आरंभ नञि करैत छथिन मुदा ई गलत छैक। मलेमासक प्रभाव सिर्फ आ सिर्फ एक महीना तक मात्रे रहैत अछि। ओकर बाद फेर ई बारहो मास अपन नियमित रूप सँ चलैत अछि।
