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मलेमास कें विष्णु भगवान अपन नाम द’ पुरूषोत्तमके दर्जा देलखिन्ह

18 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- पुरुषोत्तम मास, अधिक मास अथवा मलमास

हिंदू पंचांगक एकटा अत्यंत पवित्र आ आध्यात्मिक महत्वबला महीना होइत अछि, जे प्रत्येक तीन वर्ष पर काल चक्रक संतुलन करबाक लेल जुड़ैत अछि। मिथिलांचल मे एकरा ‘मलमास’ कहल जाइत छैक आ एकर धार्मिक महत्व बहुत बेसी मानल गेल अछि। सूर्य वर्ष लगभग 365 दिन आ 6 घंटाक होइत अछि, जखन कि चंद्र वर्ष 354 दिनक होइत अछि। दुनू वर्षक बीच प्रतिवर्ष 11 दिनक अंतर आबि जाइत छैक । तीन वर्ष मे ई अंतर लगभग एक महीना (33 दिन) भ’ जाइत अछि। एही अंतर कें दूर करवाक लेल पंचांग मे एकटा अतिरिक्त मास जोड़ल जाइत छैक , जकरा अधिक मास कहल जाइत छैक । पौराणिक कथाक अनुसार, एही मास मे सूर्य संक्रांति अर्थात सूर्य कें एक राशि सँ दोसर राशि मे प्रवेश नै होइत छन्हि । स्वामी विहीन भेलाक कारणे एकरा ‘मलमास’ कहि क’ निंदा कएल जाइत छलैक आ एहि मे कोनो मांगलिक काज नै होइत छलैक । दुखी भ’ क’ मलमास भगवान विष्णु कें शरण मे गेल। तखन करुणासिंधु भगवान विष्णु एकरा अपन नाम ‘पुरुषोत्तम’ प्रदान कएलाह आ एकरा सब महीना मे श्रेष्ठ बना देलाह।
एहि पवित्र महीना मे कएल गेल पूजा, पाठ, जप आ तपस्याक फल सामान्य दिनक तुलना मे करोड़ गुणा अधिक भेटैत छैक । ई मास पूर्ण रूपेण भगवान श्रीहरि विष्णु आ भगवान श्री कृष्ण कें समर्पित छैन्ह। एहि मास मे ‘श्रीमद्भागवत महापुराण’ आ ‘भगवद्गीता’क 15म अध्याय पुरुषोत्तम योग क पाठ करब अत्यंत कल्याणकारी मानल गेल अछि। एहि मास मे दीपदान करबाक विशेष परंपरा अछि। कांसाक बर्तन मे 33 टा मालपुआ रखि क’ दान कएला सं पृथ्वी दानक बराबर पुण्य भेटैत छैक।
ई महीना भौतिक सुख-सुविधा सं हटि क’ अपन आत्मा कें शुद्ध करबाक, आत्मनिरीक्षण करबाक आ मानसिक तनाव सं मुक्ति पयेबाक अवसर दैत अछि।
मलेमासक के सम्बन्ध मे एकटा प्रश्न आम रहैत अछि जे एहि मास मे की करी आ की नहिं करी?
भगवानक नाम जप, नदी स्नान, तीर्थ यात्रा, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण, दीन-दुखी कें अन्न-वस्त्र दान आ गौ सेवा इत्यादि एहि मास में करवाक चाही ।
एही मास मे विवाह, जनेऊ, मुंडन, गृह प्रवेश, आ कोनो नव बस्तु कें खरीददारी जेहन मांगलिक कार्य वर्जित होइत अछि।
ई समय केवल निष्काम भक्ति कें लेल आरक्षित अछि।निष्कर्ष रूप मे, पुरुषोत्तम मास मिथिलाक संस्कृति आ सनातन धर्म मे ईश्वर सं जुड़बाक एकटा ‘आध्यात्मिक अतिरिक्त मास अछि। ई हमरा सभ कें सांसरिक मोह-माया सं किछु कालक लेल अलग भ’ क’ सत्कर्मक मार्ग पर चलबाक प्रेरणा दैत अछि।

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