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मलेमास या पुरुषोत्तम मास मे दान-पुण्यक विशेष महत्त्व कहल गेल अछि

18 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: शेफालिक दत्त श्रीजा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय- “पुरुषोत्तम मासक महत्व”

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हिन्दू धर्म मे पुरुषोत्तम मास, जकरा अधिक मास आ मलेमास सेहो कहल जाइत अछि, अत्यन्त पवित्र आ पुण्यदायक मानल गेल अछि। ई मास लगभग तीन वर्ष पर एक बेर आबैत अछि। चन्द्र मास आ सौर मासक बीच समयक अन्तरक समायोजित करबाक लेल ई अतिरिक्त मास जोड़ल जाइत अछि। अन्य सभ मास कोनो-ने-कोनो देवताक नाम सँ जुड़ल अछि, मुदा ई मास स्वयं भगवान विष्णुक सर्वोत्तम स्वरूप पुरुषोत्तम केँ समर्पित अछि। एहिक कारणेँ एकर धार्मिक, आध्यात्मिक आ सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक अछि।

पुरुषोत्तम मासक उत्पत्ति

पुराण सभक अनुसार, अतिरिक्त मासक कोनो स्वामी नहि छल। एहि कारणेँ लोकसभ एहि मास केँ अशुभ बुझि उपेक्षा करैत छल। दुःखी भऽ कऽ ई मास भगवान विष्णुक शरण मे गेल। तखन भगवान विष्णु अपन “पुरुषोत्तम” नाम आ महिमा एहि मास केँ प्रदान कयलनि। ओहि दिन सँ ई मास पुरुषोत्तम मास कहलाएल आ सभ मास सभ मे विशेष सम्मान प्राप्त कयलक।

धार्मिक महत्व

पुरुषोत्तम मास मे भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण आ रामक पूजा-अर्चनाक विशेष विधान अछि। एहि मास मे कयल गेल जप, तप, दान, व्रत, कथा-श्रवण आ भक्ति सामान्य दिनक अपेक्षा अनेक गुणा अधिक फलदायक मानल जाइत अछि।

शास्त्र मे कहल गेल अछि:-

“अधिकस्य तु मासस्य यत्फलं परिकीर्तितम्।
तत्फलं कोटिगुणितं विष्णुभक्त्या प्रजायते॥”

अर्थात् पुरुषोत्तम मास मे श्रद्धापूर्वक कयल गेल भक्ति आ सत्कर्म अनेक गुणा पुण्य प्रदान करैत अछि।

आध्यात्मिक महत्व

ई मास आत्मचिन्तन, आत्मशुद्धि आ ईश्वर सँ जुड़बाक अवसर प्रदान करैत अछि। व्यस्त जीवन मे मनुष्य अक्सर सांसारिक मोह-माया मे फँसल रहैत अछि। पुरुषोत्तम मास ओकरा अपन जीवन, कर्म आ उद्देश्य पर विचार करबाक प्रेरणा दैत अछि।

एहि समयमे लोकसभ–

भगवद्गीता, रामायण आ भागवतक पाठ करैत छैथि।
भजन-कीर्तनमे भाग लैत छैथि।
उपवास आ संयमक पालन करैत छैथि।
क्रोध, लोभ, अहंकार आदि दुर्गुण सँ दूर रहबाक प्रयास करैत छैथि।

दान-पुण्यक महत्व

पुरुषोत्तम मास मे दानक विशेष महत्व बताओल गेल अछि। अन्नदान, वस्त्रदान, जलदान, गौसेवा, गरीब आ असहायक लोकक सहायता करब अत्यन्त पुण्यकारी मानल जाइत अछि। दान केवल वस्तुक नहि, बल्कि प्रेम, करुणा आ सेवा-भावक सेहो होइत अछि।

सामाजिक महत्व

ई मास समाज मे सद्भाव, सहयोग आ धार्मिक चेतनाक प्रसार करैत अछि। परिवार आ समाजक लोक एक संग भजन, कथा, सत्संग आ धार्मिक अनुष्ठान मे सम्मिलित होइत छथि, जाहि सँ सामाजिक एकता मजबूत होइत अछि।

वर्तमान समय मे पुरुषोत्तम मास

आधुनिक युग मे भले जीवनशैली बदलि गेल हो, मुदा पुरुषोत्तम मासक प्रासंगिकता एखनो बनल अछि। ई मास मनुष्य केँ भौतिकताक दौड़ सँ हटि आत्मिक शान्ति, नैतिकता आ मानवताक दिशा मे अग्रसर होबाक सन्देश दैत अछि।

उपसंहार

पुरुषोत्तम मास केवल एक अतिरिक्त मास नहि, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, सेवा आ सदाचारक पावन अवसर अछि। ई मनुष्य केँ अपन जीवनकेँ बेहतर बनेबाक, ईश्वरक निकट जायबाक आ समाजक प्रति अपन दायित्व निभेबाक प्रेरणा दैत अछि। जे व्यक्ति श्रद्धा, भक्ति आ सद्भाव सँ एहि मासक पालन करैत अछि, ओ आध्यात्मिक उन्नति आ मानसिक शान्तिक अनुभव करैत अछि। वास्तव मे पुरुषोत्तम मास भगवानक कृपा प्राप्त करबाक एक अनुपम अवसर अछि।

पुरुषोत्तम मास आयल, भक्ति-दीप जराउ,
मनक तम सभ दूर कऽ, हरि-नाम गुण गाउ,
दान, जप, तप, सेवा सँ जीवन हो उजियार-
ई पावनक अवसर मे प्रभुक कृपा पाउ।
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जय मिथिला जय मैथिली।

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