लेख विचार
प्रेषित: पीतांबरी देवी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- पुरुषोत्तम मास केर महत्व
पुरुषोत्तम मास ,वा मलेमास ,या अधिक मास जे कहियौ सब नाम एहि मासक अछि। ई तीन साल पर लगैत अछि । एकर कारण अछि जे तीथ घटैत बढ़ैत रहैत आछि आर साल मे एगारह दिन बढ़ि जाइत अछि । आर तीन साल मे तैतिस दिन बढ़ि जाईत अछि ते एक मास पुरषोत्तम मास भय जाइत अछि। एक मास हटा देला से साल मे ऋतु के समानता भय जाइत अछि नहि हटौला से जार गर्मी बरसात सभटा कोनो मास मे भय जाएत कहियो जेठ मे जार आर कहियो अगहन मे गर्मी भय जाएत । तहि तीन साल पर के एक मास के काटि देल जाइत छैक। आर ऋतु के समय सहि भय जाइत छैक। ई मास मे सब देवता सब राजगीर मे आबि जाइत छथि तहि से लोक मलेमास मे राजगीर जाइत छथि। ओतय बहुत पैघ मेला लगैत अछि। सब गर्म कुंड मे स्नान करैत अछि । ई मास कोनो खराप नहि होइत छैक लेकिन तेरहम मास रहैत छैक ताहि दुआरे लोक कोनो सुभ काज नहि करैत अछि जेना मूरन,उपनयन, बिआह, सत्यनारायण भगवान के पूजा, एहि मास के साल मे गीनती नहि होईत छैक। हम अपन मां सासु मां के देखियनि जे मलेमास उतरय ते गोसौनिक घर छछारल जाय। घैलची निप के घैलची पर के घैला हटा के नव घैला उराहल जाइ ।आंगन घर निपल जाइ खापरि फेकल जाइ। लागय जेना कोनो असौच छल आर आ शुद्ध हेबाक अछि। आब ते सबटा बदलि गेले ने घैलचि, ने आंगन, घर मे सब दिन पोछा लगैये आंगन के सब दिन धोअल जाइए। एहि मास मे दैनिक पूजा पाठ खुब कैल जाइत अछि । जप पूजा सेहो खुब कय सकैत छी एहि मासक एकादशी चतुर्दशी के बहुत महत्व अछि । अवश्ये करी व्रत ।सब भगवान एके ठाम रहैत छथि ताहि से जे ब्रत करव ओकर बेसि फल भेटत। कहल जाइत अछि जे मलेमास के जखनि पृथ्वी पर सब अवहेलना करय लगलनि ते ओ बहुत दुःखी भ’ गेला आर ओ विष्णु भगवान लग गेला आर अपन मोनक बात कहलखिन जे हमरा पृथ्वी पर सब कियो मोजर नहि दय रहला अछि ।तखनि विष्णु भगवान मलेमास के कहलखिन अहाँकेँ नाम आई से पुरषोत्तम मास भेल । आब अहाँ केँ सब पुरषोत्तम मास के नाम सँ पुकारत । एहि मास मे जे लोक धर्म कर्म करत ओकर ओकरा दुन्ना फल भेटतैक। तहिया से एहि मासक नाम पुरषोत्तम मास परि गेलैक । मुसल मान सब मलेमास के नहि मानैत छथि तहि से हुनकर कलेंडर सब मास मे घुसकैत रहैत छनि कहियो जार मे ईद कहियो बरसात मे ईद कहियो बैसाख मे ईद ।यदि अपनहु सब पुरषोत्तम मास नहि मानितहु ते कहियो जार मे छैठ कहियो वरसात मे छैठ होइते। ई साल के सही करय लेल चन्द्रमा के तीथ के सिधा करै लेल तीन साल पर के पुरषोत्तम मास लगैत अछि।जकरा मलेमास कहल जाइत अछि।
मलेमास मे व्रत कएला सँ दुगूणा फल भेटैत छै
18 भ्यूज
