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सोशल मिडिया केर सार्थक उपयोग सँ विकासक बाट वा नव चेतनाक खोज संभव

9 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: आभा  झा अद्विका
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- सोशल मीडिया के जीवन पर प्रभाव

सोशल मीडियाक प्रभाव: युवा पीढ़ी आ सामाजिक ताना-बाना

आजुक समयमे सोशल मीडिया हमरा सभक दैनिक जीवनक एकटा मुख्य आधार बनि गेल अछि। बच्चा सँ लय क’ वृद्ध धरि, हर कोनो एहि आभासी संसार सँ जुड़ल अछि। मुदा एकर प्रभाव केवल मनोरंजन धरि सीमित नै अछि, बल्कि इ हमरा सभक सामाजिक ताना-बाना आ विशेष रूप सँ युवा पीढ़ीक सोच केँ गम्भीर रूप सँ प्रभावित क’ रहल अछि। एहि लेखमे हम एहि विषयक सकारात्मक आ नकारात्मक पहलु पर एकटा नव दृष्टि सँ विमर्श करब।

सकारात्मक प्रभाव: विकास आ नव चेतना –
सोशल मीडिया सामाजिक जागृति आ व्यक्तिगत विकासक एकटा सशक्त माध्यम बनि क’ सोझाँ आयल अछि:

सामाजिक सरोकार आ एकजुटता: कोनो प्राकृतिक आपदा होइ वा कोनो सामाजिक कुप्रथाक विरोध, सोशल मीडियाक माध्यम सँ पूरा समाज बहुत कम समयमे एकजुट भ’ जाइत अछि। लोकक भीतर सामाजिक चेतना आ सहायताक भावना बढ़ल अछि।

ज्ञान आ रचनात्मकताक आदान-प्रदान: एहि मंचक कारण कला, लेखन, संगीत आ गृह उद्योग जेहन क्षेत्रमे लोक केँ अपन हुनर देखेबाक असीमित अवसर भेटल अछि। लोक घर बैसल नव-नव कला आ ज्ञानक बात सीखि रहल छथि।

संसार सँ परिचय: गाम-घरक लोक सेहो विश्वक पैघ-पैघ घटनाक्रम आ नव वैज्ञानिक सोच सँ तुरंत अवगत भ’ जाइत छथि, जेकरा सँ ओकर मानसिक दायरा विस्तृत भ’ रहल छैक।

नकारात्मक प्रभाव: दूरी आ मानसिक विखराव
सकारात्मकताक संगहि, सोशल मीडिया समाजमे किछु ओहन विसंगति सेहो अनलक अछि जे चिंतनीय अछि:

पारिवारिक दूरी: एकहि घरमे रहि क’ सेहो लोक एक-दोसर सँ दूर भ’ रहल छथि। भोजनक टेबल होइ वा कतहु यात्रा, परिवारक लोक मोबाइलक स्क्रीनमे व्यस्त रहैत छथि, जेकरा सँ आपसी गप्प-सप्प आ आत्मीयता कम भ’ रहल अछि।

दिखावटी जीवन आ असंतोष: सोशल मीडिया पर लोक अपन जीवनक केवल नीक आ चकाचौंध भाग प्रदर्शन करैत छथि। एकरा देखि क’ दोसर लोक, विशेष क’ युवा वर्ग, अपन वास्तविक जीवन सँ असंतुष्ट भ’ जाइत छथि, जे ओकरा कुंठा आ तनावक दिस धकेलैत छैक।

धैर्यक कमी: छोट-छोट वीडियो आ तुरंत प्रतिक्रिया (लाइक आ कमेंट) पयबाक चाहतमे लोकक भीतर धैर्य खतम भ’ रहल अछि। युवा पीढ़ीमे एकाग्रताक पैघ कमी देखल जा रहल अछि।

समाजक लेल एकटा संदेशप्रद सीख –
तकनीक अपना आपमे कोनो समस्या नै अछि, समस्या अछि एकर अनियंत्रित प्रयोग। हमरा सभ केँ इ बुझबाक आवश्यकता अछि जे सोशल मीडियाक संसार वास्तविक नै, बल्कि आभासी अछि।

हरेक समाजक कल्याण तखने संभव अछि जखन हम तकनीकक उपयोग अपन प्रगतिक लेल करू, नै की अपन संबंधक अंत करय लेल।

  1. अपन दिनचर्यामे “स्क्रीन समय” (मोबाइल देखबाक समय) निर्धारित करू। सांझक समय परिवारक संग बैसू, बच्चा सभ सँ गप्प करू आ गाम-समाजक चौक-चौराहा पर लोक सँ प्रत्यक्ष भेट करू। सोशल मीडियाक उपयोग रचनात्मक कार्य, शिक्षाक प्रसार आ आपसी भाईचारा बढेबाक लेल करू। सजगता आ संयमहि एहि युगमे हमरा सभक समाज केँ स्वस्थ आ सुरक्षित राखि सकैत अछि। जय मिथिला, जय मैथिली।

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