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सोशल मीडिया सार्थक सहयोगक संग चुनौती केर सामना सेहो करबैत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- सोशल मीडिया के जीवन पर प्रभाव

सोशल मीडिया : वरदान आऽ चुनौतीक द्वंद्व

मानव सभ्यताक इतिहास संचारक इतिहास सेहो अछि। युग-युगान्तर सँ मनुष्य अपन विचार, अनुभूति आऽ ज्ञानकेँ एक-दोसरासँ साझा करबाक प्रयास करैत आबि रहल अछि। विज्ञान आऽ प्रौद्योगिकीक अभूतपूर्व विकासक परिणामस्वरूप वर्तमान समयमे संचारक क्षेत्रमे एकटा नव क्रान्ति उपस्थित भेल अछि, जाहिकेँ ‘सोशल मीडिया’ कहल जाइत अछि। फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि मंचसभ विश्वकेँ एक प्रकारेँ ‘वैश्विक ग्राम’मे परिणत कऽ देने अछि। एखन सूचना आऽ विचारक आदान-प्रदान क्षणमात्रमे एक देश सँ दोसर देश धरि पहुँचि जाइत अछि। सोशल मीडिया आधुनिक जीवनक एक अनिवार्य अंग बनि गेल अछि, जाहिके प्रभाव समाज, संस्कृति, शिक्षा, राजनीति आऽ व्यक्तिक जीवन पर व्यापक रूपेँ दृष्टिगोचर होइत अछि।
सोशल मीडिया ज्ञान-विज्ञानक प्रसारमे अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहल अछि। विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता आऽ सामान्य जनसभ एहि माध्यमसँ नवीनतम जानकारी प्राप्त करैत छथि। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार आऽ तकनीकी विषयक उपयोगी सूचनासभ सहज उपलब्ध भऽ रहल अछि।
सामाजिक दृष्टिसँ सेहो सोशल मीडिया लोकसभकेँ एक-दोसराक निकट आनयमे सहायक सिद्ध भेल अछि। दूर-दराजमे रहनिहार परिवारजन, मित्र आऽ परिचितसभ परस्पर सम्पर्कमे रहि सकैत छथि। प्राकृतिक आपदा, महामारी अथवा अन्य संकटकालमे जन-जागरूकता फैलाबय आऽ सहायता पहुँचाबयमे सेहो एकर महत्वपूर्ण योगदान रहल अछि।
साहित्य, कला आऽ संस्कृति क्षेत्रमे सोशल मीडिया नव प्रतिभासभकेँ मंच प्रदान कयने अछि। अनेक कवि, लेखक, कलाकार आऽ लोकगायक अपन सृजनात्मकताकेँ व्यापक समाज धरि पहुँचाबयमे सफल भेल छथि। मिथिला आऽ मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसारमे सेहो सोशल मीडिया एक प्रभावकारी साधन बनल अछि।

जतय प्रत्येक वस्तुक उपयोगिता अछि, ततय ओकर दुष्प्रभाव सेहो संभव अछि। सोशल मीडियाक अत्यधिक प्रयोग समयक अपव्ययक प्रमुख कारण बनि रहल अछि। विशेषतः युवापीढ़ी एकर आकर्षणमे पड़ि अध्ययन, श्रम आऽ वास्तविक सामाजिक सम्बन्धसँ दूर भऽ रहल अछि।
फर्जी समाचार, अफवाह आऽ भ्रामक सूचनाक तीव्र प्रसार सोशल मीडियाक एक गंभीर समस्या अछि। असत्य जानकारी समाजमे भ्रम, तनाव आऽ वैमनस्य उत्पन्न करैत अछि। कतेको बेर एहन सूचनासभ सामाजिक सद्भावकेँ सेहो प्रभावित करैत अछि।
एकर अतिरिक्त, आभासी संसारमे अत्यधिक संलग्नता व्यक्तिक मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़ैत अछि। एकाकीपन, तनाव, अवसाद आऽ आत्मकेन्द्रित प्रवृत्ति बढ़बाक आशंका रहैत अछि। निजता (प्राइवेसी) सम्बन्धी समस्यासभ सेहो दिन-प्रतिदिन गम्भीर रूप धारण कऽ रहल अछि।
सोशल मीडिया स्वयंमे ने तऽ पूर्णतः हितकारी अछि आऽ ने पूर्णतः अहितकारी। एकर प्रभाव उपयोगकर्ताक विवेक, उद्देश्य आऽ व्यवहार पर निर्भर करैत अछि। यदि एकर प्रयोग ज्ञानवर्धन, रचनात्मक अभिव्यक्ति आऽ सामाजिक हित लेल कयल जाय तँ ई विकासक सशक्त माध्यम सिद्ध भऽ सकैत अछि। किन्तु यदि असंयम, असावधानी आऽ दुरुपयोग बढ़ैत रहल तँ एकर दुष्परिणाम सेहो समाजकेँ भोगय पड़त।
अन्ततः कहल जा सकैत अछि जे सोशल मीडिया आधुनिक युगक एक प्रभावशाली संचार-साधन अछि, जे मानव जीवनकेँ अनेक प्रकारेँ प्रभावित कऽ रहल अछि। एहि माध्यमसँ ज्ञान, जागरूकता आऽ वैश्विक सम्पर्कक नव द्वार खुलल अछि, मुदा संगहि अनेक चुनौती सेहो उत्पन्न भेल अछि। अतः आवश्यक अछि जे हम सभ सोशल मीडियाक उपयोग संयम, विवेक आऽ उत्तरदायित्वक भावनासँ करी, जाहिसँ एकर सकारात्मक पक्ष समाजक कल्याणमे सहायक बनय आऽ नकारात्मक प्रभाव न्यूनतम भऽ सकय। विवेकपूर्ण उपयोगे सोशल मीडियाकेँ मानव प्रगतिक सच्चा साधन बना सकैत अछि।

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