विचार
धर्मनिरपेक्षता वर्सेस छद्म-धर्मनिरपेक्षता – नेपाल मे साम्प्रदायिक दंगा
– प्रवीण नारायण चौधरी
अहाँ लोकनि केँ बुझल होयत जे हाल-साल हिन्दू आ मुसलमान धर्मावलम्बी सब अपन-अपन धर्मक नाम पर खुब लड़ैत छथि, एक-दोसर केँ मारैत-पिटैत आ घर मे आगि लगा-लगा एक-दोसरक जिनाय दूभर करैत छथि । ‘हिन्दू-मुस्लिम रायट’ (दंगा) कहल जाइत छैक एकरा ।
जे-जे देश ‘धर्मनिरपेक्षता’ केर चोला पहिरने अछि, ओतय ई दंगा-फसाद किछु बेसिये भेल करैत छैक । खास कय केँ भारत मे जहिया सँ देश स्वतंत्र भेलैक तहिये सँ एहि दंगाक इतिहास भेटत । एतेक तक कि भारतक स्वतंत्रता सँ पहिनहिं धर्मक नाम पर भारत केँ विभाजित कय देल गेलैक । भारत केर दुइ प्रान्त पंजाब आ बंगाल (मौलिक पहिचान अनुसारे पंजाबी व बंगाली भाषाभाषी समाज केँ) खण्डित कय केँ इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान बनायल गेलैक । मानू भारतक दुनू बाँहि काटि देल गेल हो, किछु यैह स्वरूप अभरैत अछि विभाजन केर । स्वाभाविक छैक जे स्वतंत्रता प्राप्त कयनिहार ओ द्रष्टाक महाभूल केर कारण आइ धरि निर्दोष हिन्दू-मुसलमान आपस मे लड़ि रहल अछि, मरि रहल अछि ।
भारतक स्वतंत्रता उपरान्त संविधान निर्माण करैत जाहि धर्मनिरपेक्षताक आवरण पहिरल गेल तेकरो घातक परिणाम आइ धरि लोक (नागरिक) भोगि रहल अछि, आगुओ भोगैत रहबाक सम्भावना केँ नहि नकारल जा सकैछ । वर्तमान हिन्दूत्ववादी शासन सत्ता मे पहुँचबाक आ विद्यमान लोकतांत्रिक निर्वाचन पद्धति सँ निरन्तर सत्ता पर काबिज होयबाक स्थिति एहि कथित धर्मनिरपेक्षताक चोला आ व्यवहार मे फरक नीति केर कारण भेल अछि, ई कहय मे कोनो अतिश्योक्ति नहि होयत ।
(अध्येतावर्ग लेल एकटा रिसर्च पेपर राखि रहल छी, अंग्रेजी मे अछि, पढ़ू आ बुझू । संयोग सँ रिसर्चर मुसलमान धर्मावलम्बी छथि, कतहु-कतहु हिनको मे अपन धर्मक पक्ष लेबाक प्रवृत्ति स्पष्ट देखायत, लेकिन विद्वान् लेल विद्या मात्र जरूरी होइछ, से बुझिकय पढ़ू, बुझू आ गुनू । लिंकः https://maithilijindabaad.com/?p=25310 – मैथिली जिन्दाबाद वेब पत्रिका पर प्रकाशित कयल अछि अपने सभक सन्दर्भ लेल ।)
स्पष्ट अछि जे भारत मे धर्मनिरपेक्षताक सिद्धान्तक नकल पश्चिम देश सँ कयल गेल, मुदा जमीनी हकीकत पूर्व मे भिन्न रहबाक, जीवनपद्धति पर्यन्त भिन्न रहबाक आ ताहि पर सँ सत्तालोलुप शासक वर्गक सामन्तीपन हावी रहबाक कारण सिद्धान्त आ व्यवहार मे ई धर्मनिरपेक्षता “छद्म-धर्मनिरपेक्षता” बनि गेल से स्पष्ट होयत ।
भारतक आजादीक ७५ वर्ष बीतल आ ‘अमृत महोत्सव’ मना चुकल देश मे छद्म-धर्मनिरपेक्षताक प्रभाव सँ भले नागरिक मान-सम्मान मे सब धर्मक लोक उच्चपद (राष्ट्रपति) तक प्राप्त कयलक, परञ्च जमीनी सत्य यैह अछि जे ‘धर्माधारित विभाजित समाज-सम्प्रदाय बीच हिंसक दंगा’ कखनहुँ, कोनो क्षण भ’ सकैछ । मानू सब बारूद केर ढेरी पर बैसल छी, कखन विस्फोट भ’ जायत, कोनो ठेकान नहि ।
धर्मनिरपेक्षता आ नेपालक सन्दर्भ
सर्वविदिते अछि जे नेपाल विश्व भरि मे एकमात्र ‘हिन्दूराष्ट्र’ रहय । आब नहि अछि । आब नेपाल के राजनेता लोकनि कथित निरंकुश राजतंत्र आ हिन्दूराष्ट्र दुनू केँ भरिगर पाथर बान्हिकय समुद्र मे भसा चुकल छथि । जखन कि, एहि राष्ट्रक सदा स्वाधीन सम्प्रभुताक मूल आधार ‘हिन्दूराष्ट्र’ केर स्वतःप्रमाण राखि रहल अछि; लेकिन राजनीति, सत्ता आ स्वार्थपूर्ण शासनक खेल लेल भारतहि जेकाँ एतहु ‘धर्मनिरपेक्षता’ केर चोला पहिरि लेल गेल ।
एतय सेहो ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ आ ‘मुस्लिम क्लस्टर’ ठाढ़ कय केँ ‘वोट बैंक पोलिटिक्स’ केर खेलवेल शुरू भ’ गेल । एहि बातक बहुत बेसी समय नहि बीतल, अमृत महोत्सवक मात्र १५% समय बिति सकल हँ एखन, लेकिन एहिठाम एहि ‘छद्म-धर्मनिरपेक्षता’ केर चोला पहिरबाक कारण सौंसे नेपाल आमा केर देह पर हिन्दू इतर धर्मक लोक अपन-अपन दावी आ शान-शौकत केर समूह-शक्ति प्रदर्शनक अम्बार लगा देने अछि ।
नेपाल मे सघन आबादी क्षेत्र जे भारतक सीमा सँ सटल तराई भूभाग छैक एकरा ‘मधेश’ कहल जाइत छैक । आर, बहुत हिन्दू धर्मावलम्बी समाजक संग सर्वाधिक मुसलमान, अल्प-अल्प अन्य धर्मक लोक सहजीवनयात्रा मे बसल अछि । मुदा राजनीतिक खेलवेल मे आइ ई मधेश ‘हिन्दू-मुसलमना दंगा’ केर भीषण आगि विगत किछु वर्ष मे देखय लागल अछि ।
हालहि नेपालक सुनसरी जिलाक देवानगंज-कप्तानगंज (कोसी दियारा क्षेत्र) मे भीषण स्थिति उत्पन्न भेल । आर कोसी दियारा सँ निकलि ई सौंसे मधेश मे पसरि गेल सेहो कहि सकैत छी । ई लेख लिखैत समय धरि आगि मिझा नहि सकल अछि । हमरो सब सन निरपेक्ष लोक लेल धर्म-आधारित एकता आ मेलजोल वास्ते ‘प्रार्थना’ करय पड़ि रहल अछि । दंगाक कारण भारतक विभाजन, पाकिस्तान निर्माणक पीज बहैत घाव, अल्पसंख्यक तुष्टिकरणक दशकों-दशकों कांग्रेसी शासन नीति, आदिक प्रभाव नहि; अपितु अपन-अपन वर्चस्वक युद्ध आ वैह कांग्रेसी फूट डालो शासन करो नीति केर प्रभाव सँ समाज मे पसरल घृणा, युवा जोश मे विवेक कम आ हनक-झनक बेसी – ताहि सभक चलते नेपालक मधेश हिन्दू-मुसलमान दंगा सँ जरि रहल अछि ।
क्रमशः….. (लेख केर अन्तिम भाग किछु समय बाद)
हरिः हरः!!
