लेख विचार
प्रेषित: सुष्मिता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- सोशल मीडिया के जीवन पर प्रभाव
सोशल मीडिया केर प्रभाव
कहल जाइत अछि जे समय संग संसार बदलैत अछि, आ आइक युगमे एहि बदलावक सबसे पैघ माध्यम सोशल मीडिया बनि गेल अछि। जे बात कहियो चिट्ठी-पत्री आ महीनाक प्रतीक्षासँ पहुँचैत छल, से आइ एक क्लिकमे दुनियाक कोनो कोनामे पहुँचि जाइत अछि। सोशल मीडिया जीवनक एक अभिन्न अंग बनि गेल अछि, जे हमर सोच, व्यवहार आ संबंध सभ पर गहरा प्रभाव छोड़ि रहल अछि।
सोशल मीडिया दुनियाक दूरी केँ बहुत हद धरि कम केने अछि। परिवार, मित्र आ परिचित लोकनि सँ निरंतर जुड़ल रहबाक सुविधा एकरा लोकप्रिय बनबैत अछि। शिक्षा, व्यवसाय, साहित्य, कला आ समाजसेवाक क्षेत्रमे एकर योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण अछि। अनेक प्रतिभाशाली लोक अपन रचना, विचार आ कला केँ एकर माध्यम सँ लाखों लोक धरि पहुँचा रहल छथि। ज्ञान आ सूचनाक आदान-प्रदान एतेक सहज कहियो नहि छल।
मुदा, एहि उज्ज्वल पक्षक संग किछु चिंताजनक पक्ष सेहो जुड़ल अछि। अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोगक कारण लोक वास्तविक जीवनक संवाद सँ दूर होमऽ लगल छथि। परिवारक बीच बैसल लोक सेहो मोबाइलक दुनियामे व्यस्त रहैत अछि। फर्जी समाचार, अफवाह, नकारात्मक टिप्पणी आ दिखावाक प्रवृत्ति समाजमे तनाव आ भ्रमक स्थिति उत्पन्न करैत अछि। विशेष रूप सँ युवावर्ग एकर प्रभाव सँ बेसी प्रभावित भऽ रहल अछि।
तेँ आवश्यकता अछि जे सोशल मीडिया केँ विवेकपूर्ण ढंग सँ अपनाओल जाए। जतेक आवश्यक हो, ओतेक उपयोग कएल जाए। ज्ञान ग्रहण करी, सकारात्मकता फैलाबी आ समयक महत्व केँ बुझी। तकनीक तखने सार्थक अछि, जखन ओ जीवन केँ सरल बनाबए, जटिल नहि।
अंततः, सोशल मीडिया एकटा शक्तिशाली साधन अछि। एकर प्रभाव नीक अथवा खराब, दुनू हमर उपयोग पर निर्भर करैत अछि। जँ हम एकरा जिम्मेदारी आ संयमक संग अपनाबी, तँ ई समाज आ मानवताक विकासक एक सशक्त माध्यम बनि सकैत अछि।
