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भारतक सीबीएसई बोर्ड द्वारा कक्षा ६ सँ आर-३ भाषा सिखबाक अनिवार्यता

77 भ्यूज

त्रिभाषा शिक्षा पद्धति आ आर-३ भाषाक सिलेबस

आउ बुझैत छी सीबीएसई द्वारा लागू कयल गेल आर-३ मे नेटिव लैंग्वेज केर पढ़ाइ सन्दर्भित किछु महत्वपूर्ण तथ्य
भारत मे लागू भेल नव-शिक्षा-नीति-२०२० (NEP 2020) अनुसार विद्यालयी शिक्षा लेल राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रारूप २०२३ अनुसार कक्षा ६ सँ तेसर भाषाक पढ़ाइ अनिवार्य कयल गेलैक अछि । एकर लक्ष्य बहुत दूरगामी छैक आर एकर गहन विश्लेषण सँ धियापुता मे बहुभाषिकताक गुण प्रवेश करेबाक संगहि सुसंस्कृत आ सम्भ्रान्त नागरिक निर्माण करबाक पुनीत उद्देश्य राखल गेल छैक ।
एकरा साधारण भाषा मे बुझेबाक लेल हम अपना तरीका सँ एकटा उदाहरण दय केँ बुझबय के प्रयास करैत छी ।
अपना सब हिन्दू धर्म-समाजक लोक दुर्गा सप्तशतीक पाठ मे रुचि रखैत छी । ओहि मे सँ अथवा अहाँ अपन रुचिक कोनो पुस्तक मे सँ – कोनो एकटा उक्ति – एकटा पैसेज (रचना-अंश) लियौक ।
हम एतय एकटा ऋषिक उक्ति लय रहल छी । अहाँ एकरा पढ़ियौक आ ओकर विश्लेषण मनहि-मन करियौक । दुर्गा सप्तशती सँ मेधा ऋषिक ई कथन हम ल’ रहल छीः
ज्ञानमस्ति समस्तस्य जन्तोर्विषयगोचरे ॥
विषयश्च महाभाग याति चैवं पृथक् पृथक् ॥१॥
दिवान्धाः प्राणिनः केचिद्रात्रावन्धास्तथापरे ॥
केचिद्दिवा तथा रात्रौ प्राणिनस्तुल्यदृष्टयः ॥२॥
ज्ञानिनो मनुजाः सत्यं किं तु ते न हि केवलम् ॥
यतो हि ज्ञानिनः सर्वे पशुपक्षिमृगादयः ॥३॥
ज्ञानं च तन्मनुष्याणां यत्तेषां मृगपक्षिणाम् ॥
मनुष्याणां च यत्तेषां तुल्यमन्यत्तथोभयोः ॥४॥
ज्ञानेऽपि सति पश्यैतान् पतङ्गाञ्छावचञ्चुषु ॥
कणमोक्षादृतान्मोहात्पीड्यमानानपि क्षुधा ॥५॥
मानुषा मनुजव्याघ्र साभिलाषाः सुतान् प्रति ॥
लोभात्प्रत्युपकारा नन्वेतान् किं न पश्यसि ॥६॥
तथापि ममतावर्त्ते मोहगर्ते निपातिताः ॥
महामायाप्रभावेण संसारस्थितिकारिणा ॥७॥
तन्नात्र विस्मयः कार्यो योगनिद्रा जगत्पतेः ॥
महामाया हरेश्चैषा तया सम्मोह्यते जगत् ॥८॥
ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ॥
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥९॥
तया विसृज्यते विश्वं जगदेतच्चराचरम् ॥
सैषा प्रसन्ना वरदा नृणां भवति मुक्तये ॥१०॥
सा विद्या परमा मुक्तेर्हेतुभूता सनातनी ॥
संसारबन्धहेतुश्च सैव सर्वेश्वरेश्वरी ॥११॥
अर्थात् –
हे महाभाग! विषयमार्गक ज्ञान सब जीव केँ छैक । तहिना विषय सेहो सभक वास्ते अलग-अलग छैक ॥१॥ किछु प्राणी दिन मे नहि देखैत अछि आ दोसर राति मे नहि देखैछ । आर किछु जीव एहने अछि, जे दिन आ राति दुनू मे बराबरे देखैत अछि ॥२॥ ई ठीक अछि जे मनुष्य समझदार होइत अछि, मुदा केवल वैह टा एना नहि होइत अछि । पशु, पक्षी आ मृग आदि सब प्राणी समझदार होइत अछि ॥३॥ मनुष्यहु केर समझ ओहने होइत छैक जेहेन ओहि मृग आ पक्षी सभक होइत छैक ॥४॥ आर जेना मनुष्यक होइत छैक, तहिना ओहि मृग-पक्षी आदिक होइत छैक । ई आ आनो बात सब मे प्रायः दुनू मे समाने छैक ॥५॥ समझ भेलापर सेहो एहि पक्षी सब केँ त देखू, ई सब स्वयं भूख सँ पीड़ित रहितहु मोहवश बच्चाक चोंच मे कतेक रुचि सँ अन्न केर दाना खुआ रहल अछि ! ॥६॥ नरश्रेष्ठ ! कि अहाँ नहि देखैत छी जे ई मनुष्य समझदार होइतहु लोभवश अपन कयल उपकारक बदला पेबाक लेल पुत्र आदिक अभिलाषा करैत अछि ? ॥७॥ यद्यपि एहि सब गोटे मे समझ केर कमी नहि छैक, तथापि ओ संसारक स्थिति (जन्म-मरण केर परम्परा) बनाकय रखनिहाइर भगवती महामायाक प्रभाव द्वारा ममतामय भँवर सँ युक्त मोह केर गहींर गर्त मे खसायल गेल अछि । तेँ एहि मे आश्चर्य नहि करबाक चाही ॥८॥ जगदीश्वर भगवान् विष्णु केर योगनिद्रारूपा जे भगवती महामाया छथि, हुनकहि सँ ई जगत् मोहित भ’ रहल अछि । ओ भगवती महामाया देवी ज्ञानी सभक सेहो चित्त केँ बलपूर्वक तानिकय मोह मे खसा दैत छथि ॥९॥ वैह एहि सम्पूर्ण चराचर जगत् केर सृष्टि करैत छथि तथा वैह प्रसन्न भेलापर मनुष्य केँ मुक्तिक लेल वरदान दैत छथि ॥१०॥ वैह परा विद्या संसार-बन्धन आर मोक्षक हेतुभूता सनातनी देवी एवं सम्पूर्ण ईश्वर सभक सेहो अधीश्वरी छथि ॥११॥
आब एहि उक्ति मात्र सँ हमरा-अहाँ केँ कि सब बुझय मे आयल – तेकर सूची बनबियौक । जँ बुझय मे नहि आयल त आर मनोयोग सँ पढ़ियौक । फेर कि सब बात बुझलियैक तेकर सूची बनबियौक (यानि लिखियौक) । सूची बना लेलाक बाद एक बेर फेर मौखिक वर्णन करियौक । बीच-बीच सँ सवाल सेहो उठबियौक । फेर ओकर जवाब स्वयं दियौक । आर ई सारा प्रक्रिया ५-१० मिनट मे एकटा पैराग्राफ लेल पूरा कय लेबाक अभ्यास करियौक । फेर अपन समझ केँ एकटा पैराग्राफ मे अपन भाषा मे लिखियौक ।
एहि तरहें मात्र एकटा पैराग्राफ केर विश्लेषण सँ अहाँ मे भाषाक सामर्थ्य त बनबे करत, अहाँ मे सांस्कृतिक समझ आ राष्ट्रीय एकताक भावना सेहो विकास करत ।
भारत मे लागू कयल गेल त्रिभाषा शिक्षा पद्धति मे तेसर भाषाक अध्ययन लेल कक्षा ६ सँ ई काज आरम्भ करायल जेबाक सर्कुलर सीबीएसई द्वारा कयल गेलैक अछि ।

हरिः हरः!!

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