Search

धनतेरस के सांझ मे यमदेव केँ दीपदान कयला सँ अकाल मृत्यु सँ मुक्ति भेटैत छै

722 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- धनतेरस के महत्व

एकटा अंग्रेजी मे कहावत छैक जे जँ सम्पत्ति केर नुकसान भेल तऽ कोनो नुकसान नहिं भेल कारण सम्पत्ति पुनः उपार्जित कयल जा सकैत अछि मुदा जँ स्वास्थ्य के नुकसान भेल तऽ ओकरा पुनः प्राप्त करवाक लेल बहुत बेसी दिक्कत केर सामना करय पड़ैत अछि तेँ भारतीय संस्कृति मे स्वास्थ्य के स्थान धन के स्थान सँ बेसी देल जाइत छैक। पहिले सुख निरोगी काया दोसर सुख घर मे माया। तें दीयाबाती सँ पहिले धनतेरस के महत्व देल जाइत छैक। शास्त्र मे वर्णित कथा केर अनुसार समुद्र मंथन के समय कातिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वन्तरि अपन हाथ मे अमृत कलश लऽ कऽ प्रकट भेल छलाह।
मान्यता केर अनुसार भगवान धन्वन्तरि भगवान विष्णु के अंशावतार मानल जाइत छैथि जे संसार मे चिकित्सा विज्ञान के प्रसार आ विस्तार करवाक लेल अवतार लेने छलाह। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होयवाक उपलक्ष्य मे धनतेरस मनाओल जाइत अछि। एहि दिन धन के देवता कुवेर आ आयुर्वेद के देवता धन्वन्तरि केर पूजा कयल जाइत अछि। जीवन मे स्वास्थ्य बनल रहय। आदमी दीर्घायु होअय। ओकर जिनगी खुशहाल रहैक। घर गृहस्थीकेँ सुदृढ़ करबाक लेल एहि दिन बर्तन, सोना चानी इत्यादि कीननाइ शुभ मानल जाइत अछि। धनतेरस सँ दीयाबाती केर पावैन आरम्भ भऽ जाइत अछि। प्रकाश केर पावैन मे माँ लक्ष्मी जी केर कृपा प्राप्त रहैत छैन्ह। एहि सँ पहिले धनतेरस के दिन विधि विधान सँ कुवेर आ धन्वंतरि केर पूजा कयल जाइत छैन्ह आ सांझ मे यमदेव के दीपदान कयल जाइत छैनि जे अकाल मृत्यु सँ मुक्त कऽ दीर्घायु जीवन प्रदान करैत छैथि।. स्कंद पुराण मे कहल गेल अछि जे “कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।. यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युविर्नश्यति।”

Related Articles