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छौर छौर छौर चूगला कोठी छौर धान धान धान भैया कोठी धान

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लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मिथिला केर सामा चकेबा पावनि

सामा चकेबा भाई बहिन के प्रेम के कहानि अछि। सामा बहिन छलखिन आर चकेबा भाई छलखिन। चूगला अनेरे के कृष्ण के बना बना के चूगलपन केलक आर सामा के कृष्ण चिरिया बना देलखिन।जखनि चकेबा के पता लगलनि ते ओ कृष्ण के सभटा सत्य बात कहलखिन आर बहिन सामा के जंगल से ताकि के अनलनि आर चूगला के खूब मोछ पकरी पकरी के मारलनि।ई कथा ते बहुत गोटा लिखने छथि आर लिखति। लेकिन हम सब जखनेहि भरदुतिया भेल कि हमर मा भरदुतिया दिन सामा बनबैत छल ।आर राति मे सामा के गीत गबैत छले ।काकी बहिन भौजी सब सब गोटे गीत गबैत छलि ।आर हम सब सामा के ओस चटबय बाहर लय जाईत छलियनि।डाला मे दीप जरा दै छलियैक नवका धान के सीस आर दुभी सामा के दैत छलियनि।सब बहिन सब डाला लय लय के बटगवनि गबैत जाईत छलौ।आर फेर आंगन मे आबि के सब अपन अपन डाला रखैत छलौ। मां हमरा सब के सबटा बिध के सामा बना दैत छल ।जेना सतभैया, श्रीसामा, चकेबा,चकेबि, बाटो बहिनि, खररूच भैया, कचबचिया, झाझी कुकुर,बच्चा बाली , लड्डू बालि, तीतिर, भम्हरा, पौती,आर हमरा सब के सेहो सामा बनौनाई सिखावय।हमहु सब जेहेन तेहेन सामा सब बनाबी । लेकिन सामा केहनो बनय ते ओकरा तोरि नहि तोरला से मां कहै जे भाई के अरूदा घटैत छैक। हम सब कातिक मास चढ़ै कि पोखरी से चिकनी माटि आनि आनि के राखि।आर चंगेरा भरि भरि के सामा बनौल जाईत छल।हमर बहिन लडृडू बेचनी ते मजूर, ते सुगा आर तरह तरह के सामा बनबैत छलिह। भरदुतिया दिन से सामा दिन तक सब दिन राति मे खूब गीत नाद गबैत जाई छलि।हम सब से छोट रहि ते हमर नाम सबसे बाद मे आबय ते हमरा तेकर बहुत दुख होईत छल जे हमर नाम सब से बाद मे अबैत अछि।देवउठान दिन अंगना मे एरपन परैत छल भगवान उठैत छथि पूजा अंगना मे होईत अछि गोसौन घर होईत अछि आर ओहि उगरलहा पिठार से देवउठाओन के प्रात सामा ढौरल जाईत छथि आर सामा रंगल जाईत छथि।आब ते उठि गेल लेकिन पहिने सामा के बेन अंगने अंगने बांटल जाइत छल कने  नवका चूरा आर नबका गुर आर दूटा के चारि टा के सामा सब ठाम जाइत छल।बेटी के सासुर चंगेरा भरि के सामा चूगला बिंदावन नबका चूरा गूर सनेस पका के नैहर से अबैत छलै।हमरो मां जतेक दिन जीबल नैहर से भरि चंगेरा सामा अबैत छले।अखनो छोटकी भौज सामा मे सनेस पठबैत छथि नबका चूरा नबका गूर सामा ।कातिक के पूर्णिमा दिन सामा भसैत छथि ।सामा के पौती में नबका चूरा गूर सिन्दूर टीकलि सब किछु दय दैत छथिन। फेर भगवती के गीत सामा के गीत गबै छथि।एरपन दय के चूरा दही गुर खुआ के सब अपन अपन आचर पर पानक पात आर सामा लय के सामा फेर करैत छथि ।जाहि मे सब पढ़ैत छथि।

जीबो जीबो जीबो कि तोर भैमा जीबो,कि मोर भैया जीबो कि लाख बरिसा जीबो,।

जैसन कररिक थम्ह ओईसन भैयाक जांघ।

जैसन समुद्र समार तैसन भैयाक टीक।

जैसन उखरिक गेर तैसन भैयाक पोन।

जैसन धोबियाक पाट तैसन भैयाक पीठ।

जीबो जीबो जीबो कि तोर भैया जिबो।

कि मोर भैया जीबो कि लाख बरिसा जीबो।

ई पढ़ैत सब सामा फेर करैत छथि आर डाला मे सामा के लय के गीत गबैत सब जोतल खेत मे जाईत छथि ।ओतय सब बैस के सामा खेलाईत छथि।भाई के फाफर भरैत छथि गुर चूरा मखान मधुर से आर भाई से सामा फोरबैत छथि ।बिंदावन मे आगि लागल कियो ने मिझाबय रे हमर भैया फल्ला भैया सतीरमन भैया सेहो मिझाबय रे।चूगला के मोछ मे आगि लगा के चूगला करय चूगला पन बिलारी करे म्यायू धय ले रे चूगला के फांसी दियू।

छौर छौर छौर चूगला कोठी छौर धान धान धान भैया कोठी धान।

फेर सब सामा खेला के चंगेरा मे माटिक पाच का के ढेला लय लैत छथि आर गीत गबैत आगन अबैत छथि ।

अरे भ्महरा अरे भ्महरा हमर भैया सबसे भैया सुतल कि जागल अरे भ्महरा।

काठ पसिजय भौजो नाहि पसिजै छै रे भ्महरा।

डाला गोसौन लग रखैत छथि। भगवती के गीत गाबि के सामा पावनि समाप्त करैत छथि।

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