लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- राखी : रक्षा सूत्र केर बन्हन
रक्षाबंधन भाई बहिनक प्रेमक प्रतीक थीक। ई देखबैत राखी पावन पवित्र पावनि सेहो कहल जाइत अछि। ई पावनि साओनक पूर्णिमा क’ मनाओल जाइत अछि। एहि दिन सभ बहिन अपन भायक हाथमे रेशमक डोर बन्हैत छथि आ हुनकर दिर्घायु होएबाक कामना करैत छथि। ओ हुनका सँ अपन हर हाल मे रक्षा करबाक वचन सेहो लैत छथि। भाई बहिनकें मधुर संग किछु उपहार सेहो दैत छथिन। सभ लोक एहि दिन भगवान के सेहो राखी अर्पित कए रक्षा करबाक लेल प्रार्थना करैत छथिन।
मान्यता थीक जे ई राखी पावनिक शुरूआत लक्ष्मी माता जी (भगवती) वाली के राखी बान्हिकए कएने छथिन।
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एकटा राखी संबंधित कथा👇
साओनक महिनामे स्त्रीगन सभहक हर्षक ठेकान नञि रहैत छनि। रहबो कोना करितैक? एकतए ई शिवशंकर के पूजा के रिझेबाक सभसँ सोहावन मनभावन मास आ ताहिपर सँ स्त्रीगन भरि साओन हरियर-हरियर चूड़ी/ लहठी पहिरी, हरियरे टिकुली कपारमे साटि कए, नहो त’ हरियर नहरंगा सँ रंगने रहैत छल भरि साओन ! कतौ जेबाक बेर होइक कि अपन प्रियतमके रिझेबाक लेल पहिरी लैत छल सभ खूम हरियर कचोर नुवा । #लक्ष्मी (कथाक नायिका) सेहो अहिना करैत छलीह अपन बहिना सभहक संगे। ई सभ करैत आब आएल साओनक पूर्णिमा #रक्षाबंधन के दिन। सभ बहिन अपन भाय लंग गेलीह वा जे नहिं गेली ओ बाट जोहैत भोरे सँ बैसल रहैथ अप्पन भायक। #लक्ष्मी सेहो भोरे नहा-सुनाक सुन्नर सन नुवा, लहठी पहिरी, श्रृंगार पेटार कए, गहना गुड़िया सेहो पहिरीक एनामे अपन मुँहके निघारैत जे हमरा मुँह पर कोनहुँ कतौ आइ चिन्ताक रेघा त’ नञि! जौं होएत त’ अबिते भाय पूछत जे की भेल अहाँके? मुँह कियैक मलिन अछि?
राखीके थारीमे धए कए, मधुर,चानन – ठोप ,दीपमे टेमी तेल धए ,सभ गोसाउनि घरमे रखने आ टकटकी लगौने देहैर (दुआरी) दिश। कखनहुँ फटक (केबाड़) खोलबाके जौं अबाज सुनथि त’ दौड़ैथ बाहर दिश।हुनकर दूटा भाय कनेक लगीचेमे रहैत छथिन। हुनके सभहक बेसब्री सँ बाट जोहैत छलीह भोरे सँ लक्ष्मी। हुनकर पति कहलथिन- हे किछु खा लिय, नञि त’ अस्वस्थ भ’ जाएब। ओ सभ दूर सँ जौं एबो करताह त’ अबेर हेतैन। मुदा लक्ष्मी कहलनि- नञि हम सभबेर #राखी बान्हिकए खाइत छी, अहुबेर ओहिना करब। राखी एकटा रेशमक डोरी वा सजल -सजाएल पातर तागक डोरीटा नञि अछि, एहिमे लपेटल अछि बहिनक आशीष जे ओ अपन भैयाक लेल मँगैत अछि खास आजुक दिन। योगबैत रहैत अछि बहिन भायक लेल ई रक्षाके सूत्र।
बेरूपहर भगेलैक मुदा नञि एलखीन लक्ष्मीके भाय सभ। तखन ओ फोन लगेलैन। पुछलखीन एखन धरि नहि एलहुँ? कखन पहुँचब एतए?
भाय – की कहियौ, हमर गाड़ी खराब भगेल तैं हम नञि आबि सकैत छी आब।
लक्ष्मी – आ ओ छोटकू?
भाय कहलखीन – ओकरो अर्जेन्ट मिंटिंग भऽ गेलैक, ओहो अएबा सँ असमर्थ छैक । तु भोजन करए।
लक्ष्मी बड्ड दुखी भगेली, होइतैथ किएक नञि,आखिर बरख भरिमे एकहि दिन त’ अबैत छैक सिर्फ भाय -बहिनक नाम सँ। ओ राखीके थारी हाथमे लेलनि आ ओ अपना भाय लेल राखल राखी द्रोपदी जँका भगवान श्री कृष्णके बन्हलनि। मधुरक भोग लगेलनि,दीप लेसी आरती उतारलनि , आ भगवान सँ अपन भाय सभ लेल चिरंजीवी रहैथ से आशीष मंगलनि। अपन भाउजक अचल अहिवात आ नैहरक सुख समृद्धिक कामना करैत उठलैथ आ पुनः परूंका आएत रक्षाबंधनके आश लगौने अपन आजूक व्रत तोरलैन लक्ष्मी।
