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एकटा ताग जोड़ैत अछि बहिन के भाई के प्रति अभिलाषा आ भाई के बहिनक रक्षा करबाक प्रतिज्ञा के

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लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- राखी : रक्षा सूत्र केर बन्हन

रक्षाबंधन जकरा हमरा लोकनि राखी के नाम सँ जनैत छियैइ आ जे भारतीय संस्कृति के एकटा अत्यन्त पवित्र आ भावनात्मक पावैन मानल जाइत अछि जाहि मे भाई बहिनक पवित्र प्रेम विश्वास आ समर्पण के भाव स्पष्ट देखाइत अछि। रक्षाबंधन के अर्थ होइत छैक रक्षा करवाक बंधन आ यएह एहि पावनिक विशिष्टता अछि। पावनिक भाव के रूप में बहिन अपन भाई के कलाई पर राखी बान्हैत छैथि आ हुनकर दीर्घायु आ सुख समृद्धि केर कामना करैत छैथि आ एकरा बदला मे भाई हुनका जीवन भरि रक्षा करवाक लेल शपथ लैत छैथि। एहि प्रकार सँ राखी मात्र एक ताग नहिं अपितु सम्बन्ध के मजगूत करवाक लेल एकटा सशक्त डोरी के प्रतीक होइत अछि।
एकर पौराणिक कथा के रूप मे जखन भगवान श्रीकृष्ण के हाथ मे शिशुपाल के बध करवाक समय चोट लागल छलैन्ह तखन द्रोपदी अपन साड़ी के टुकड़ा फारि कऽ भगवान कृष्णक हाथ मे बान्हि देने छलखिन्ह आ ओहि समय भगवान कृष्ण द्रोपदी के बचन देने छलखिन्ह जे ओ जीवन भरि द्रोपदी के रक्षा करताह जकर सभ सँ पैघ उदाहरण चीरहरण के समय द्रोपदी के रक्षा करवाक घटना सर्वविदित अछि। आजुक परिवेश मे सेहो रक्षाबन्धन मात्र सहोदर धरि सीमित नहिं अछि अपितु इ पावनि ओहि आदमी के जोड़ैत अछि जे आत्मिक रूप सँ भाई बहिनक पवित्र सम्बन्ध के दूर बैसि कऽ निभावैत रहैत छैथि। बहिन दूर शहर मे रहि अपन भाई के लेल स्नेहक प्रतीक राखी भाई के पठबैत छैथि आ भाई सेहो ओकरा स्मरणीय बनेबाक यथासंभव प्रयास करैत रहैत छैथि।
एहि प्रकारे रक्षाबन्धन मात्र भाई बहिनक पावनि नहिं अपितु ई विश्वास आ निःस्वार्थ प्रेमक प्रतीक मानल जाइत अछि जे समाज के जोड़ैत अछि, सम्बन्ध के प्रगाढ करैत अछि। ई पावनि हमरा सभके सीखबैत अछि जे समय चाहे केहनो होअय स्नेह आ सहयोग के बन्धन सदैव मजगूत रहवाक चाही। “एकटा ताग जोड़ैत अछि बहिन के भाई के प्रति अभिलाषा आ भाई के बहिनक रक्षा करवाक प्रतिज्ञा के”
कीर्ति नारायण झा

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