लेख विचार
प्रेषित: मीना मिश्रा मुक्ता
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- राखी : रक्षा सूत्र केर बन्हन
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केर सबसँ पौराणिक कथा अछि जे भगबान कृष्ण युधिष्ठिर द्वारा पुछला पर सुनने छलथि।
एक बेर देव और दानव’क युद्ध कतेको बर्ष तक भेल । जाहि मे असुर देवता लोकनि के देवराज इंद्र संग पराजित क’देलक।ओकर पश्चात देवता लोकनि अमरावती पहाड़ पर चलि गेला।असुर सब देवता सब के यक्ष,हवन सँ वंचित क’देलक।जाहि सँ देवता लोकनिक शक्ति क्षीण होमए लागल। एहि सँ दुखी भ’ देवता लोकनि अपन गुरु ब्रहस्पति लग पहुंचला। ओतहि देवगुरु बृहस्पति मंत्रशिक्त कए रक्षा सूत देलखिन।
‘येन बद्धो बलिर्राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामभिवध्नामि रक्षे मा चल मा चल:’।
कहल जाईत अछि जे ई रक्षा सूत्र ईद्राणी श्रावणी पूर्णिमा क दिन ईंद्रक हाथ में बन्हलनि।जकरा बान्हि ईंद्र राक्षस के पराजित केला और पुन:स्वर्ग पर राज केलथि। तहिये सँ एहि रक्षा सूत्र’क महत्व चलैत आबि रहल अछि।
कथा ईहो अछि जे कृष्ण हाथ मे बहैत खून देखि एक बेर द्रौपदी अपन साड़ी’क आंचर फाड़ि कृष्ण हाथ पर बान्हि देने रहथिन। इतिहास जनैत अछि जे चीरहरण के समय कोना कृष्ण अपन बहिन के लाज’क रक्षा केने रहथिन।
कालक्रमे समय-समय पर एहन अनेको कथा भेटैत अछि जे राखी’क महत्व के सिद्ध करैत अछि।
पहिले गाम घर मे पंडित ‘क हाथे अथवा घरक श्रेष्ठ ‘क हाथे रक्षासूत्र बान्हल जाईत छल।ई एकटा आशीर्वाद होईत छल जे अहाँ सब तरहक बाधा सँ सुरक्षित छी।
और समय चाहे पुरान होई अथवा नव रक्षाबंधन अपन गौरव आ महत्व एखनो ओहिना बनौने अछि।
भाई बहिन’क ई पाबैन अनुपम और अनमोल अछि। एहि
मे जतय बहिन भाई’क गट्टा पर राखी बान्हि हुनका आबै बला सब अपशकुन सँ बचबै’त छथि ओतहि भाई केर द्वारा स्वयं के सुरक्षित और सौभाग्यशाली बुझैत छथि।
एहि दिन भाई कऽ द्वारा बहिन कें स्नेहरूपी उपहार देब सेहो आदि काल सँ चलि आबि रहल अछि।
साओन मास जतए लोक शिव’क भक्ति मे लीन रहैत अछि ओतहि बहिन’क लेल श्रावणी पूर्णिमा सेहो एकटा बिशेष स्थान रखैत अछि।
भाई चाहे बहिन लग जा राखी बन्हाबथि,अथवा डाक सँ पहुंचनि आ आजुक जुक मे नव-नव माध्यम सँ पहुंचनि। रक्षाबंधन अपन गरिमा,अपन महत्व अपन औचित्य ओहिना बरकरार रखने अछि।
सब बहिन के भाई पर ईश्वर केर आशीर्वाद रहनि।
