Search

साओनक मास सोहनगर होइत अछि

633 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: बबिया प्रकाश
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मिथिला मे साओन मास केर महत्व

अहा!…साओन मास कतेक सोहनगर अछि! देखिक’ हरियरी कचोर नयनाभिराम दृश्य मोन गदगद भ गेल।

कतौ पानि के बुन्न धीरे धीरे त कतौ झहरि झहरि खसैत। मुदा सबतैर प्रकृति नव कनिया जेहन सजल सँवरल रहैत अछि।जेठ-अषाढ़ के तपैत गर्मी पश्चात साओन’क बुन्न पड़ैत अछि त अमृतपान करय समान प्रतीत होइत अछि। धीपल धरती पर जलप्रपात सौं प्रकृति खिलखिला उठैत अछि आर चारूकात के वातावरण जीवंत लगैत अछि।
गाछ-विरिछ, फूल-फल सब किछु हलसल फुलसल रहैत अछि।

मानव की जीव जंतु सेहो आल्हादित रहैत अछि। गाम घर’क डीब-डाबर भरल आर जतय ततय माछ’क उझैया उठल। युगल जोड़ी मे सेहो अनुराग उमंग प्रवाहित होइत अछि।

🍃साओन आस्था केर मास अछि‌। विविध भांतिक पूजन व व्रत’क विशेष विधान अछि। जैमे भगवान शिव  पूजनक सबसौं विशेष महत्व अछि। कारण अहि मास मे मां पार्वती केँ तपस्या पूर्ण भेलनि आर ओ महादेव केँ वर के रूप मे प्राप्त कर’ के वरदान प्राप्त केने रहैथ ‌।

अहि महिना मे सृष्टि केँ कल्याण वास्ते समुद्र मंथन केँ आयोजन भेल छल। समुद्र मंथन के समय एवम् परकारक सामग्री समुद्र सौं प्राप्त भेल जेकरा देव-दानव आपस मे बाँटि लेलथि। तत्पश्चात हलाहल आयल आर पूरा सृष्टि विनाश के कगार पर छल, तखन शिव मां पार्वती केँ सहयोग सौं विष के कंठ में धारण कय सृष्टि के रक्षण कयलन्हि। जे कियो शिव पार्वती कें विधिवत पूजन करय छथि हुनक जीवन सुखमय, सुभगता सौं भरल रहैत छन्हि।

मिथिला मे मधुश्रावणी पाबनि केँ अधिक महत्व अछि। साओन केँ कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि सौं शुक्ल पक्ष केँ तृतीया तिथि तक विधिवत पूजा कयल जाइत अछि। अहि पूजा के अंतर्गत शिव पार्वती, नाग देवता, केँ विशेष रूप सौं पूजा कयल जाइत अछि। अंतिम दिन विवाहिता स्त्री मधुश्रवा तीज कय मधुश्रावनी के समापन करय छैथ। ऊँ नमः शिवाय कें गूंज सौं पूरा वातावरण गुंजायमान रहैत अछि। पूरा महिना उत्सव के माहौल बनल रहैत अछि।

श्रावण मे कांधा पर कामौर सजा क’ ल’ जाय के प्रथा अछि। कमरथुआ गंगाजल भरि कामौर मे बान्हि, कामौर केँ कंधा पर राखि नंगे पैर मंदिर जाइत छथि आर जलाभिषेक करय छैथ।

रक्षा बंधन भाई-बहिन कें भावना सौं जुड़ल पाबनि श्रावणी पूर्णिमा कें धूमधाम सौं मनाओल जाइत अछि‌।

सावन के महिना सांस्कृतिक दृष्टिकोण सौं सेहो महत्वपूर्ण अछि कियैकि अहि माह मे विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आर पर्व त्यौहार मनाओल जाइत अछि जाहि सौं समाज के एकजुट करय मे मदति भेटति अछि। लोक अपन परिवार आर मित्रगण संग मिलि जुलि क’ पूजा पाठ करय छथि जाहि सौं समाजिक समरसता बढैत अछि।

प्राकृतिक दृष्टिकोण सौं सेहो साओन के महत्व अछि। बरखा अत्यधिक भयला सौं जमीन हल्का आर उर्वर होइत अछि तत्पश्चात धान रोप’ मे सुविधा होइत अछि।
कजरी, नचारी, मल्हार आदि गान मगन भय गाबि महिला सभ धान रोपनी करय छथि।

निष्कर्षतः साओन पवित्र मास आर भगवान शिव केँ समर्पित मास अछि। सामाजिक , धार्मिक, प्राकृतिक रूप सौं अत्यधिक महत्वपूर्ण अछि। अहि महिना मे भगवान शिव-पार्वती केँ पूजा अर्चना कयला सौं मोन शांत होइत अछि आर अध्यात्मिक ज्ञान के प्राप्ति होइत अछि। सावन के महत्व समाज के एकजुट करय मे एवं एकता आर सौहार्द केँ बढ़ेबा मे सेहो अछि।

 

Related Articles