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सोशल मीडियाक उपयोग संयमपूर्वक करी

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- – “सोशल मीडियाक कारण आपसी संबंध पर असर”

वर्तमान समय में सोशल मीडिया हमर सभक जीवनक अभिन्न अंग बनि गेल अछि। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, ट्विटर आदि प्लेटफॉर्म पर लोक अपन विचार, फोटो आ वीडियो साझा करैत अछि। यद्यपि एकर माध्यम सऽ हम दूर-दराज में रहि रहल लोक सऽ जुड़ल रहि सकैत छी, लेकिन एहि तकनीकी विकासक संग-संग आपसी संबंध पर गहिंर प्रभाव सेहो पड़ल अछि।

पहिनेकेँ समयमें लोक अपन परिवार आ मित्र संग समय बितबैत छल, व्यक्तिगत भेंट-वार्ता मुख्य माध्यम रहैत छल। घरमें एक संग बैसिकय भोजन करब, संग घूमब-फिरब, आपसी संवाद करब – एहेन परंपरा सभक बीच अपन-अपन संबंधकेँ मजबूत बनबैत छल। मुदा आब ई परंपरा धीरे-धीरे कम होइत जा रहल अछि।

सोशल मीडिया पर अत्यधिक निर्भरता लोकक मानसिकता बदलि देलक अछि। एक व्यक्ति दोसरक सामिप्य में होइतहुँ अपन मोबाइलमें व्यस्त रहैत अछि। एकर कारण बातचीत के समय घटि गेल अछि। संबंधमें अपनापन आ गहिरतामें कमी देखल जा रहल अछि। पति-पत्नी, माता-पिता और संतानक बीच संवादक अभाव अनेक पारिवारिक समस्याक जन्म देबै लागल अछि।

आर एकटा गंभीर असर ई होइत अछि जे सोशल मीडिया पर देखल गेल ‘परफेक्ट लाइफ’ केर चित्रण। लोक अपन जीवनक केवल सुखद पक्ष साझा करैत अछि, जे दोसर लोकमें ई भ्रम पैदा करैत अछि जे हुनक जीवन अधूरा अछि। ई तुलना आपसी जलन, असंतोष आ मनमुटाव के जन्म दैत अछि।

संगे सोशल मीडिया पर ‘टाइम पास’ के नाम पर अनजान लोक संग बेसी समय बितायब सेहो संबंध के खतरामें डालि दैत अछि। विवाहिता लोक एक-दोसर सऽ बातचीत करबाक बजाय अनावश्यक चैटिंग में समय बर्बाद करैत अछि। एकर कारण विश्वासमें कमी, गलतफहमी आ दूरी बनि जाइत अछि।

हालांकि, सोशल मीडियाक उपयोग सकारात्मक दिशामें कयल जाए तऽ एकर लाभ सेहो बहुत अछि। दूर रहैत प्रियजन संग जुड़ल रहब, पुरान मित्र के खोजब, सूचना आदान-प्रदान करब – ई सब बात एकर सकारात्मक पक्ष छी। मुदा, जखन ई प्लेटफॉर्म संबंध सऽ ऊपर स्थान ल’ लैत अछि तऽ एकर परिणाम नकारात्मक होइत अछि।

अतः आवश्यक अछि जे हम सोशल मीडियाक उपयोग संयमपूर्वक करी। समय नियत करी कि कतबा समय सोशल मीडिया पर देब आ कतबा समय अपन प्रियजन संग। परस्पर संवाद, प्रेम आ विश्वास के मजबूत बनाबय पर ध्यान देब आवश्यक अछि।

सोशल मीडिया अपन स्थान पर उपयोगी अछि, मुदा आपसी संबंध सऽ ऊपर कखनो नहि। संबंध के सजीव बनाबय लेल हमरा सबके चाही जे वास्तविक जीवनमें एक-दोसरके समय दियौ, ध्यान दियौ आ संवादकेँ सेतु मजबूत करु। एहि में सच्चा संबंध जीवित रहि सकैत अछि।

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