
ओकर बाद केहेन ?
बाबा लोकनि पहाड़ मे रहथि
बाउ लोकनि बजार उतरलाह
हम धियापुता शहर दिश गेलहुँ
हमरा लोकनिक धियापुता सब दुबइ, कतार, मलेसिया गेल
नाति-पोता अमेरिका, अष्ट्रेलिया, जापान गेल
ओतय सँ फेर कतय जायत ?
बाबा सब मकइ-मड़ुए मे रहलाह
बाउ सब भात तकैत नीचाँदिश अयलाह
हम सब फ्राइड राइस दिश भगलहुँ
धियापुता सब चाउमिन आ मोमो मे अघायल
नाति-पोता पिजा बर्गर खाय लागल
बादक पीढ़ी कि सब खायत ?
बाबा सब सल्ला केर जारैन सँ पकौलनि
बाउ सब साल केर जारैन सँ पकौलनि
हमरा सब स्टोव चुल्हा जरा पकेलहुँ
धियापुता सब गैस चुल्हा जरा पकेलक
नाति-पोता सब बिजली चुल्हा पर पकेलक
बादमे कथी पर पकायत ?
बाबा सब पत्र पैदले डाक सँ पहुँचाबथि
बाउ सब पत्रालय सँ चिठ्ठी पठाबथि
हम सब टेलिफोन सँ खबर पहुँचाबी
धियापुता मोबाइल मे देखि-देखि बात करय
नाति-पोता सब आइफोन सँ भिडियो कौल करैछ
ओकर बादक लोक केना बात करत ?
बाबा सब एकपेरिया बाट पर चललाह
बाउ सब मालवाहक ट्रक सँ चललाह
हम सब साइकिल आ बस मे चललहुँ
धियापुता मोटरसाइकल आ एसी डिलक्स बस मे चलल
नाति-पोता कार आ हवाईजहाज मे चलय लागल
ओकर बादवला कथी मे चलत ?
बाबा सब वेद आ पुराण पढ़ैत रहथि
बाउ सब संस्कृत आ रामायणक श्लोक रटलनि
हम सब स्वस्थानी आ कविता पढ़ैत रही
धियापुता सब प्रेमकथा आ अंग्रेजी पढ़लक
नाति-पोता एसएमएस आ रोमन पढ़ैछ
ओकरा बादक कि पढ़त ?
बाबाक घर पाथरक छत सँ चिन्हाइत छल
बाउ लोकनिक घर खरक चार सँ चिन्हायल
हमर घर टीन आ सामान्य ढलाइ सँ चिन्हायल
धियापुताक घर तल्ला आ रंग सँ चिन्हायल
नाति-पोताक घर ट्रस मार्बल आ वालपेपर सँ चिन्हयवला भेल
ओकर बादक घर कथी सँ चिन्हायत ?
– कविता आ फोटो (सामाजिक संजाल सँ साभार)
मैथिली अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी
ई कविता नेपालक पहाड़ मे रमल-रचल जीवन आ परिजनक वर्तमान पर आधारित अछि । पीढ़ी-दर-पीढ़ी केना परिवर्तन देखल जा रहल अछि – जानि बाद मे आर कतेक परिवर्तन होयत । कविक कल्पना मे भविष्यक परिवर्तन प्रति चिन्तन अछि, जेकर ठोस आधार विगत केर परिवर्तन केँ देखाओल गेल अछि ।
हरिः हरः!!
एकर मूल रूप निम्न अछि –
