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भविष्यक परिवर्तन पर कवि-कल्पनाक सुन्दर काव्य-चित्र

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ओकर बाद केहेन ?

बाबा लोकनि पहाड़ मे रहथि
बाउ लोकनि बजार उतरलाह
हम धियापुता शहर दिश गेलहुँ
हमरा लोकनिक धियापुता सब दुबइ, कतार, मलेसिया गेल
नाति-पोता अमेरिका, अष्ट्रेलिया, जापान गेल
ओतय सँ फेर कतय जायत ?

बाबा सब मकइ-मड़ुए मे रहलाह
बाउ सब भात तकैत नीचाँदिश अयलाह
हम सब फ्राइड राइस दिश भगलहुँ
धियापुता सब चाउमिन आ मोमो मे अघायल
नाति-पोता पिजा बर्गर खाय लागल
बादक पीढ़ी कि सब खायत ?

बाबा सब सल्ला केर जारैन सँ पकौलनि
बाउ सब साल केर जारैन सँ पकौलनि
हमरा सब स्टोव चुल्हा जरा पकेलहुँ
धियापुता सब गैस चुल्हा जरा पकेलक
नाति-पोता सब बिजली चुल्हा पर पकेलक
बादमे कथी पर पकायत ?

बाबा सब पत्र पैदले डाक सँ पहुँचाबथि
बाउ सब पत्रालय सँ चिठ्ठी पठाबथि
हम सब टेलिफोन सँ खबर पहुँचाबी
धियापुता मोबाइल मे देखि-देखि बात करय
नाति-पोता सब आइफोन सँ भिडियो कौल करैछ
ओकर बादक लोक केना बात करत ?

बाबा सब एकपेरिया बाट पर चललाह
बाउ सब मालवाहक ट्रक सँ चललाह
हम सब साइकिल आ बस मे चललहुँ
धियापुता मोटरसाइकल आ एसी डिलक्स बस मे चलल
नाति-पोता कार आ हवाईजहाज मे चलय लागल
ओकर बादवला कथी मे चलत ?

बाबा सब वेद आ पुराण पढ़ैत रहथि
बाउ सब संस्कृत आ रामायणक श्लोक रटलनि
हम सब स्वस्थानी आ कविता पढ़ैत रही
धियापुता सब प्रेमकथा आ अंग्रेजी पढ़लक
नाति-पोता एसएमएस आ रोमन पढ़ैछ
ओकरा बादक कि पढ़त ?

बाबाक घर पाथरक छत सँ चिन्हाइत छल
बाउ लोकनिक घर खरक चार सँ चिन्हायल
हमर घर टीन आ सामान्य ढलाइ सँ चिन्हायल
धियापुताक घर तल्ला आ रंग सँ चिन्हायल
नाति-पोताक घर ट्रस मार्बल आ वालपेपर सँ चिन्हयवला भेल
ओकर बादक घर कथी सँ चिन्हायत ?

– कविता आ फोटो (सामाजिक संजाल सँ साभार)

मैथिली अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी

ई कविता नेपालक पहाड़ मे रमल-रचल जीवन आ परिजनक वर्तमान पर आधारित अछि । पीढ़ी-दर-पीढ़ी केना परिवर्तन देखल जा रहल अछि – जानि बाद मे आर कतेक परिवर्तन होयत । कविक कल्पना मे भविष्यक परिवर्तन प्रति चिन्तन अछि, जेकर ठोस आधार विगत केर परिवर्तन केँ देखाओल गेल अछि ।

हरिः हरः!!

एकर मूल रूप निम्न अछि –

हजुरबुवा पहाड हुनुहुन्थ्यो
बुवा बजार मा झर्नुभयो
हामी छोराछोरी सहर पस्यौं
हाम्रा छोराछोरीहरू दुबई,कतार,मलेसिया हिँडे
नातिनातिना अमेरिका,अष्ट्रेलिया, जापान हिँडे
त्यसपछिका कहाँ जालान् ?
हजुरबुवा ढिँंडो र आटोमै बस्नुभो
बुवा भातको खोजीमा झर्नुभो
हामी फ्राइ राइसमा दौडियौं
हाम्रा छोराछोरी चाउमिन र मममै अघाए
नातिनातिना पिजा,बर्गर खान थाले
त्यसपछिकाले के खालान् ?
हजुरबुवाले सल्लाका दाउरामा पकाउनुभो
बुवाले सालका दाउरामा पकाउनुभो
हामीले स्टोभचुल्हो बालेर पकायौं
छोराछोरीले ग्यासचुल्हो बालेर पकाए
नातिनातिनाले बिजुलीचुल्होमै पकाए
त्यसपछिकाले केमा पकाउलान् ?
हजुरबुवा हिँडेरै खबर पुर्याउनुहुन्थ्यो
बुवाले हुलाकबाट चिठी पठाउनुहुन्थ्यो
हामीले टेलिफोनबाट खबर पुर्याउँथ्यौं
छोराछोरीले मोबाइलमा हेर्दै कुरा गर्थे
नातिनातिनाले आइफोनबाटै भिडियो कल गर्न थाले
त्यसपछिकाले के गर्लान् ?
हजुरबुवा गोरेटो र घोडेटोमा हिँड्नुभो
बुवा मालबाहक ट्रकमा हिँड्नुभो
हामी साइकल र बसमा हिँड्यौं
छोराछोरी मोटरसाइकल र एसी डिलक्स बसमा हिँडे
नातिनातिना कार र हवाईजहाजमा हिँड्न थाले
त्यसपछिका केमा हिँड्लान् ?
हजुरबुवा वेद र पुराण पढ्नुहुन्थ्यो
बुवा संस्कृत र रामायणका श्लोक घोक्नुहुन्थ्यो
हामी स्वस्थानी र कविता पढ्थ्यौं
छोराछोरी प्रेमकहानी र अङ्ग्रेजी पढ्थे
नातिनातिना एसएमएस र रोमन पढ्छन्
त्यसपछिकाले के पढ्लान् ?
हजुरबुवाको घर ढुङ्गाको छानाले चिनिन्थ्यो
बुवाको घर खर, झिँगटीले चिनिन्थ्यो
हाम्रो घर टिन र सामान्य ढलानले चिनिन्थ्यो
छोराछोरीको घर तले र रङले चिनिने भो
नातिनातिनाको घर ट्रस,मार्बल र वालपेपरले चिनिने भो
त्यसपछिकाको घर केले चिनिएला ?
– कविता र फोटो (सामाजिक संजाल बाट साभार)

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