लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय:- दैनिक पूजा सँ वंचित कुल देवी/ देवता। एकर उपाय आ दुष्परिणाम।
सत्ते बड्ड सोचनीय विषय थीक ई।
पहिलुका समयमे नित्य नियम सँ शालिग्राम आ गोसाउनिक पूजा होइत छलैन मुदा आब गाम-गाम लोक जीविका उपार्जन हेतु शहर वा दोसर देश पलायन क’ गेल छथि, एहन स्थितिमे जिनका गाममे कियो रहैत छथिन त’ बड्ड बेस आ जौं नञि रहैत छथिन त’ आन घर समबेत गोसाउनिक घरमे सेहो ताला बन्न। मुदा ई अनुचित थीक। कि हम सभ देश- विदेश जाइत छी त’ हमर सभहक भोजन बन्न भए जाइत अछि। जौं नञि त’ गोसाउनिक भोजन छनि हुनक पूजा। ओहि सँ हुनक शक्ति बढ़ैत छनि त’ ई बात हम सभ कोना बिसरैत छी। पहिने हमरा सासुरमे जौं अशौच होइत छल त’ ओहि समयमे भगिमान आबि भगवतीक पूजा करैत छलखीन। ओहि काज लेल भगिमान बसाओल गेल छल। लेकिन गोसाउनि अपूज नञि रहैत छलखीन। मुदा आब त’ लोक दरो -दियादके पूजा करबालेल नञि दैत छथिन। आब कहाँ पसिन परैत छैन लोककें अपन अपना लोक सँ आपकत्ता। एहन स्थितिमे पूजाक फल फलितो तेहने होइत अछि।पहिने लोक नियम निष्ठा सँ जौं कोनहँ मंत्र साधैत छल त’ ओ मंच अचूक औषधि बनि जाइत छल मुदा आब “नञि ओ देवी नञि ओ कराह”। मुदा रक्ष रखने छथिन भगवतीके जे हमरा नैहर- सासुर दुनूठाम एखन धरि अप्पन पूजाक लेल पूजारी रखने छथिन। एकटा ने एकटा परिवारमे कियो गाममे रहितेटा अछि आ नित्य हुनक पूजा बारह बजेके भीतर होइतेटा अछि।
दुष्परिणाम
एकर दुष्परिणाम त’ ओहिना देखाइत अछि। सुखी आब सभ अछि मुदा खुशी कियो नञि। अर्थ सभकेँ छैन मुदा स्वास्थ्य सभहक खराबे। सभहक नेनासभ आब उच्चतम शिक्षा प्राप्त कएने मुदा संस्कार संस्कृति विलुप्त भेल जा रहल अछि।सभ अप्पन घरक पूजा- पाठ, विध-व्यवहार,कुलक विधान आ मर्यादा सभ बिसैर रहल अछि। एहनमे बड्ड मोसकिल भ’ रहल अछि ई सभ बचेनाइ।
उपाय:-
एहन स्थितिमे जिनका नञि संभव छनि गोसाउनि भगवानक सेवा से सभ गोसाउनिक पूजा लेल किनको नेहौरा कए कुंजी देथुन। जे गाम सँ बाहर रहैत छथि से गोसाउनि नञि गारैथ घरमे।देवी- देवता अदृश्य शक्ति छथिन से मोनमे हरदम राखैथ आ हुनकर महत्व कें बुझैत डरेबाक नहि आदर आ विश्वाश बनाक’ रखबाक सेहो आवश्यकता।
