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असगर नारी केर जीवन बडड असहज वा मुश्किल से भरल होईत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: प्रिया झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय-परिवार मे एसगर स्त्री कते सहज आ असहज

विधा-गध

हमर नजरि में बड़ मुश्किल अछि एकटा एसगर स्त्री के परिवारक पालन पोषण करब ।परिवार समाजक निर्माण करैत अछि । परिवार पुरूष आ स्त्रीके सहयोग सँ चलैय बला एकटा संगठन अछि ।दुनु एक-दूसराक पूरक छैक ।एक के बिना एकटा अधूरा छैक। गाड़ीक पहिया छैक। एक दूसराक बिना सहज नै अछि परिवारक लालन पालन आ एकटा स्त्रीक लेल तऽ बड़ पीड़ादायक अछि ।जीवनसंगिनी रहैय छैक जीवनक निर्वहनक लेल सहयोग जरूरी अछि एक दोसराके मुदा तयौ अगर एसगर जीवन जीबैय पड़ैय तऽ कष्टकर आ दुखदायी अछि एकटा स्त्रीक लेल ।समाजक लोक चाहे ओ विधवा होइत वा तलाकशुदा बड़ अबल रूप में देखैत छैक ।समाजक ताना बाना अलग आ आर्थिक समस्याक उलझन अलग रहैक अछि ।आई कालि तऽ अर्थक उपार्जन तऽ भऽ जाइत अछि सक्षम रहैत छैक स्त्री मुदा सभठाम पुरूष जकाँ जा नै सकैत छैक अहि लेल समस्या उत्पन्न होइत अछि । जत; पिताक जरूरी छैक ओतय अगर पिता नै होइत तकर सामना एकटा स्त्रीके करैय पड़ैत छैनि ।कुलमिलाके राखु जे असंभव अछि पुरूष बिना एकटा स्त्रीक जीवन असहज आ मुश्किल सऽ भरल रहैत अछि ।

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