अतिथिक अपमान कथमपि नै हुए से विशेष ध्यान राखल जैत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: प्रिया झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय  : “मिथिलामे अतिथि सत्कारके महत्व आ विशेषता”

तिथी देवो भवः यानि अतिथी भगवानक रूप होइत छैत ।मिथिला में तऽ गाम घरक नियम रहैत छल ,जे पाहुन अबैत छलाह हुनका पैर धोअलय लेल पानि देल जाइत छल,फेर पैर छू कऽ प्रणाम कएल जाइत छल।

तखन चाय पानि देल जाइत छल ।शहर मे तऽ पैर धोअय लेल नै देल जाइत अछि मुदा प्रणाम कएला उपरांत चाय पानि देल जाइत अछि ।तखन नाश्ता आ खाना पीना होइत अछि ।स्वागत सत्कार अतिथी के कएला सँ अपन घरक सुख शांति बड़हैत अछि ।बड़ महत्व अछि, अतिथीक स्वागत सँ घरक मान प्रतिष्ठ सेहो बड़हैत अछि । अपन मिथिला मे तऽ पाहुन बनिऽक राम अएला। उगना बनि कऽ बाबा अएला । अपन मिथिला मे पाहुनस्वागतक परम्परा पौराणिक काल सँ आबि रहल अछि ।
सीता सेहो अतिथी रूप मे भेष धेने साधु यानि रावणक स्वागत लक्ष्मण रेखा पार कऽ गेली । अतिथीक स्वागत क परम्परा मिथिला मे कनि बेसीअछि ।
भोजनक व्यवस्था उतम कएल जाइत अछि ।
अतिथी के कोनो चीजक असुविधा नै होनि तकर ध्यान रखल जाइत अछि । विशेषता- अतिथीक स्वागत आ सत्कारक कएला सँ देवता पितर सभ खुश रहैय छतीन ।अतिथीक अपमान नै हुए अकर ध्यान राखल जाइत अछि कियाकी अतिथी तऽ चल जेता मुदा अहाँक व्यवहार हुनका प्रति केहन छले सदिखन याद रहतैन ।
हमर व्यवहार सँ घर आएल अतिथी के अपमान नै होइन तकर खास ध्यान राखल जेबाक चाही ।देवताक स्थान देल जाइत छैन अतिथि के तऽ मान सम्मान बेसी देबाक औचित्य अछि ।अखन एकटा गीत सुनैय मे नीक लगैत अछि जे पता नहीं किस रूप मे नारायण मिल जाएंगे तऽ अतिथीक स्वागत सत्कार मे व्यवहार के खास ध्यान रखबाक चाही जे लोक काज आ जिम्मेदारी मे बिसरी जाइत अछि ।’भगवान ‘कोन रूप मे भेटता कि पता लेकिन अपन व्यवहार सँ ककरो कष्ट नै होइ अकर ध्यान राखैय के कोशिश करी ।