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नव पीढ़ी के लेल विशेष संदेश जे स्वास्थ लेल अहि व्रत के अपनाबी

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लेख विचार
लेखनी के धार , वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
विषय -मिथिला के प्रसिद्ध पावैन रैब शैन के महत्व।
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सनातन धर्म के अनुसार समस्त भारत में खास कऽ मिथिला मे सालो भैर किछु न किछु पावैन -तिहार होइते रहय छै । हरेक पावैन में प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप स देवी-देवता के आराधना होईत अछि। अहि पावैन -तिहार में रैब, शैन पावैन सेहो एक टा प्रसिद्ध आर विशेष पावैन होइत अछि। जाहि मे प्रत्यक्ष रूप स सुर्य भगवान के पूजा होईत अछि। ओना तऽ समस्त मिथिला में दिनकर के आराधना किछु बेसीए होईत छऐन्ह,कारण मान्यता छै कि भगवान भास्कर प्रत्यक्ष दर्शन दै छथिन। स्वस्थ आर निरोगी काया के मालिक छथिन । छैठ सन महान पावैन मे सेहो दिनकरे के आराधना होईत अछि । रैब दिन के भगवान सूर्य के दिन मानल जाइत अछि। रैब, शैन पावैन अगहन मास के शुक्ल पक्षक रैब दिन स आरंभ भऽ बैशाख मास धैर चलैत अछि,अथार्त छः मास के ई पावैन होईत अछि। अहि छः मास में जतेक रैब परय छै ओहि मे स प्रत्येक मास के एक टा रैब एकसंझा के रुप मे मनाओल जाइत अछि। समस्त मिथिलानी स्त्रीगन सब अपन परीवार के सुख -समृद्धी आर निरोगी काया संग मनोवांछित फल के प्राप्ति लेल ई छः मास क रैब, शैन पावैन करय छैथ। किछु गोटे हरेक रैब क छः मास अनोना करय छैथ। किछु एकसंझा करय छैथ। जाहि मे पहिल आर अंतिम रैब क किछु विशेष रूप स छैठ जंका दिनकर के आराधना होईत छऐन्ह,बांकी के रैब में केवल एकसंझा होई छै।पावैन स एक दिन पहिले शैन कऽ व्रती सब नहाय खाय करय छथिन, जाहि मे अर्बा -अर्बाईन खाई छथिन। फेर रैब दिन भोरे नहा धोकऽ निपल,पोतल स्थान पर, पवित्र चुल्हा पर, पवित्र बाशन में ठेकुआ बनाबय छथिन,तखन बाँस क डाली में डंटी लागल पान, सुपारी,मखान, बताशा,फल,फूल आर मधुर संग आरतक पात सजाक, पवित्र कपड़ा स झाँपिकऽ धार ,पोखैर के घाट पर जाई छैथ।छैठ घाट जंका देखैत लागैत रहय छै डाली सजल घाट।तखन व्रती सब पोखैर में डुबकी लगा क ऽ भीजल देहे जल में ठार्ह रहय छैथ।नव वस्त्र धारण करय छैथ।डाली उठा क ऽ दिनानाथ के अर्घ्य दै छथिन।तखन घाटे पर पीढ़ी में सींदूर,पिठार लगाक कलश सजाक धुप, दीप देखा ,चानन ,अक्षत आर फूल स पूजा करैत छैथ,फेर छः मास के भार उठाबय छैथ ,तखन डाली के उसरैग क ऽ सूर्य भगवान के कथा सुनय छैथ।कऽल जोड़ी क प्रणाम करय छैथ।तखन आंगन आबि भगवती के गोर लाईगक प्रसाद ग्रहण कय एकसंझा आरंभ करय छैथ।आरतक पात के घरक मोख पर साईट देल जाईत अछि। अहि तरहे प्रथम आर अंतिम रैब दिन पूजा होईत अछि।बांकी के रैब क खाली एकसंझा होई छै, सूर्यास्त स पहिले तक पाईन पिबी सकय छी,ओकर बाद नै।अहि में छः मास में छः तरहक अन्न स एकसंझा होई छै जेना,चूड़ा,दूध,तिलवा,फल, मिठाई,खीर,पूरी, मालपुआ आदि स। अंतिम रैब में सप्ता -विप्ता के डोरा सेहो खोलल जाईत अछि। ओना आब धीरे-धीरे ई सब पावैन विलुप्त भ रहल अछी।शहर मे रहय के कारण लोक सब एतेक ताम -झाम पसंद नहि करय छैथ । आर शहर में धार -पोखैर कतय भेटतय।आब शरीरो नहीं संग दै छै लोक के सब बिमारे रहय छैथ सदिखन , अशुद्ध खान -पान के असर से पहिले जंका व्रत केलो नहीं होई छै लोक के। नवतुरिया सब बुझबो नहीं करय छथिन ई सब पाबैन करब। अपना धरोहर के बचाक राखब हमरा आंहा के कर्तव्य अछि,आगु बढु ।जय हो दिनानाथ

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