सद्य: विद्यमान सूर्य देवक उपासना सौ सुंदर काया के प्राप्ति होएत

1038

लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
लेखनी के धार, वृहस्पति वार साप्ताहिक गतिविधि
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
विषय: रवि शनि पावैन

सनातन धर्म में कहल जाइत छैक जे तैंतीस कोटि देवी देवता छैथि जाहि मे बेसी परोक्ष रूप सँ एहि संसार के कल्याण करैत छथिन्ह मुदा दिनकर दीनानाथ सूर्य भगवान हमरा सभक समक्ष नित्य दिन प्रत्यक्ष रूप सँ दर्शन दैत छैथि। मिथिला मे भगवान दिनकर दीनानाथ के पूजा अर्चना आन क्षेत्रसँ बेसी होइत अछि। रवि दिन भगवान भास्कर के समर्पित छैन्ह तेँ रवि दिन हिनक पूजा पाठ विशेष रूप सँ कयल जाइत छैन्ह। मिथिलाक विश्व प्रसिद्ध छैठि पावनि अस्ताचलगामी आ उदयाचलगामी सूर्य के के समर्पित होइत छैन्ह। मिथिलाक पवित्र शनि रवि पावनि सेहो मुख्य रूप सँ भगवान भास्कर के समर्पित छैन्ह। छौ मासक इ पवित्र पावनि अगहन मास सँ लऽ कऽ बैसाख मास धरि होइत अछि जे सूर्य भगवान के पवित्रतम पावनि में सँ एक मानल जाइत अछि। मिथिलानी अपन परिवार पति आ धिया पूता के निरोगी काया के लेल एहि पावनि के श्रद्धा पूर्वक करैत छैथि।पावनिक आरम्भ आ अंतिम दिन सूर्य भगवान के अर्घ्य आ पूजा छठि पावनि जकाँ होइत अछि। ठकुआ, पानक पात, गुड़ के खीर, तुलसी के पात, लाल रंग के बद्धी, गाय के दूध, सिंदूर आ पीठार के अरिपन कयल काठक पीढी, गाय के गोबर, दूभि आ फल फूल मुख्य रूप सँ एहि पाबनिमे काज पड़ैत छैक। सभ सामान के पवनैतिन आस पास के पोखरि अथवा नदी में जा कऽ सूर्य भगवान के अर्घ्य दैत छथिन्ह आ अपन घर आबि एक संझा करैत छैथि। जे महत्व छठि पावनि के अपना सभक ओहिठाम होइत छैक वेएह महत्व शनि रवि पावनि के सेहो होइत छैक। सूर्य भगवान के आराधना सँ निरोग काया प्राप्त होइत छैक, चर्म रोग अथवा अन्य कोनो प्रकारक वाहरी रोग सँ भक्त के मुक्ति भेटैत छैक आ भक्त के काया भगवान दिनकर दीनानाथ के काया जकाँ प्रकाशित होमय लगैत छैक। पवित्र मोन आ पवित्र आत्मा सँ कयल गेल इ पावनि सभ भक्त के मनोकामना पूर्ण करवा में सफलता भेटैत छैक