रवि दिन अवश्य करू स्वास्थ्य लाभ लेल अति लाभकारी व्रत

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लेख विचार
प्रेषित: संजू शोभना
लेखनी-के-धार प्रतियोगिता वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
विषय :रवि शनि पावैन
अगहन मास रवि दिन स छ मासक रवि शनि पावनि आरंभ भ जायत अछि जे बैसाख मास 12 मई रवि दिन तक सौंपल जाएत अछि
उत्तर _ पहिल रवि दिन एकसंझा होइत छैक आ बेढ़ पड़ैत छैक,गुड़ के बनल टिकरी खजुरी पान अरतीक पात रक्षा सूत सुपारी आदि के पिठार स ढेउरल पीढ़ी पर पोखरि, नदी, इनार वा अपन आंगनक छत पर जल मे सूर्य भगवान के अर्घ्य पड़ैत छैन्हि
सब पबनैतिन पीढ़ी पकड़ि एक दोसर के पूछैत छथिन्ह कि _ आहाँ के छ मासक भार ऊठल ,त हँ हमर छ मासक भार ऊठल ।
एकरा बाद गायक दूधक अर्घ्य पड़ैत छैन्हि ।
हर रवि के अनूना किन्तु हर मासक इजोरिया पक्ष के बिना भदवा वाला एक रवि के एकसंझा
पुनः अन्तिम रविदिन पहिल रवि जकां अर्घ्य ।
किन्तु एहि बेर पूछल जाइत छैक कि _ आहाँ के छ मासक भार उतरल ? त हँ ,हमर छौ मासक भार उतरल
यदि असगर क रहल छी स्वयं के काल्हि पहिल दिन कहबै कि हमर छ मासक भार चढ़ल ,आ अन्तिम दिन उनतीस अप्रील के कहबै हमर छौ मासक भार उतरल ।
के करथि रवि व्रत ?
बाल बच्चा के सब प्रकारक मंगल हेतु आ सुखद दाम्पत्य जीवन हेतु स्त्री पुरुष दूनू ई व्रत क सकैत छथिन्ह ।
जिनका बीमारी लाख दवाइ कयलाक बादो ठीक नै भ रहल छैन्हि वा जिनका परिवार मे वंश नै बढ़ि रहल छैन्हि वा जिनका हर काज मे परेशानी होइत छैन्हि ।
से व्यक्ति विशेष क चर्मरोग आ सांसक रोगी ई व्रत अवश्य करथि
लाल गुलाबी पीयर वा आलक रंगक वस्त्र ही पहिरी हर रवि के ।
एकसंझा वाला रवि छोड़ि क बांकी रविदिन अनूना खाइथि आ जै बेर मोन होय खाउ ।
एकसंझा वाला रवि दिन ब्रह्मचर्य के पालन नितांत आवश्यक ।
नोट _ परिवार मे एकसंझा करयवाला सदस्य के सब गोटे प्रनाम करी आशीर्वाद ली ठीक छठि जकां नैवैद्य के प्रनाम क ग्रहण करी ।
रवि शनि करयवाला के मोन नै दुखाबी हुनका प्रसन्न राखू पूजा मे सहयोग करू,सरधा पुरबक करू।।