महंगाई के कारण छुट्टी पर जैब कठिन

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लेख

प्रेषित: नीलम झा

#लेखनीक_धार
विषष :- “गर्मी छुट्टी पहिने आ आब”

सभसँ पहिने जे पहिने लोककेँ लोक सँ जे आपकता रहैत छल आब कहाँ। सभ आब जीवन-जापनक बेगर्ता लेल गाम सँ दुर रहैत अछि। धिया पुता दादी नानी लंग बहुत कम रहैत अछि तैं लगाबो कमे। पहिने सझिया परिवार बेर मुनासिब आएब जाएब लागल रहैत छल मुदा आब त’ ककरो ककरो लेल समय नञि।
पहिने गर्मी छुट्टी होमए बला रहैत छल त’ गाममे लोक लोक सँ पूछैत रहैत छलखीन जे फल्लां अबैत छथिन की नहि? सभ स्वागत भाव सँ ठार रहैत छलखीन मुदा आब ओ भाव नहि। गर्मी छुट्टीमे लोक प्राय: आम कटहर लताम सभ खेबाक लेल सेहो अबैत छलखीन। आमक गाछीमे बैसकए गप्प लरेनाइ आ आमक झक्खा बनाक खेनाइ एकटा अलगे खुशीक एहसास रहैत छल। लोक जाइत छल आ बरख भरिक अचार आ अमोट बनाकए रखैत छल। सभ परदेशी घर-घरमे आएल रहैत छलखीन सभसँ सभके भेंट होइत छल। माय -बाप एहि गर्मी छुट्टीक बाट साल भरि जोहैत रहैत छलखीन। लोक अपन संबंधित ममियौत, पिसियौत पिसियौत सभ सँ भेंट करैत छल मुदा आब समयाभाव ,प्रेमाभाव रहैत अछि।
मुदा आबक नेना सभकेँ एहि सभसँ मिसियो भरि स्नेह नञि छैक। ओ सभ पहिने सँ कोनहुँ ने कोनहुँ दार्शनिक स्थल पर जेबाक जिज्ञासा जगबैत अछि। कियैक त’ ओकर भरण पोषण ओहने माहौलमे भेल रहैत छैक। ओ नहि आनंद लेबा चाहैत छैक गाम स्वच्छ वातावरणके। ओ नहि स्वादैत छैक दाई नानीक हाथक स्वादिष्ट भोजनके। ओ नहि विचरैत अछि एहि स्वछंद आकाशक नीचा, कियैक त’ ओकरा आदति रहैत छैक शहरक चमक-धमककें।
गर्मी छुट्टी पहिने सँ आब खराब भ’ गेल अछि कारण आब ओ प्रेमे नहि। मंहगाई सेहो चरम सीमा पर। बूढ़ पुरान जे गाम पर रहैत छैथ ओ जोहैत रहैत छैथ अप्पन परदेशी संतानक बाट।