छुट्टी बिताब जाइ से पहीने बैंक के खाता देखए पड़ै छै

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लेख

प्रेषित: इला झा

लेखनीक धार “गर्मी के छुट्टी पहिने आ आब”

पुरान समयमे, गर्मीक छुट्टी सामाजिक आ पारिवारिक गतिविधि पर आधारित होइत छल। लोक अप्पन घर गाम जाइत छलथि, अप्पन परिवार आ मित्र संग सुखद समय बितबैत छलथि। स्कूल आ काॅलेजक छुट्टी तय होइत छल, जाहि सँ लोक के अधिक समय भेटैत छल अप्पन परंपरागत संस्कृति के अनुभव कर’के। यातायात के साधन सीमित छल। मोन पड़ैत अछि, गाम जाय लेल ट्रेन सँ कयेको दिनक यात्रा तय करैत रही। सहयात्री संग वार्तालाप आ हमर बच्चा सभक सहयात्री बच्चा संग खेलनाइ, गपसप, दू तीन दिनक यात्राक कष्ट एकदम नहि बुझाइत छल।रंग-बिरंगक छोट विक्रेता स’ स्वादिष्ट आ पौष्टिक खाद्यवस्तु
खरीद क’ खेनाइ, अद्भुत हस्तकला आ बेचबाक सुन्दर कौशल मोन के मोहि लैत छल आ खरीदिये लैत रही। बेसीतर छुट्टी सासुर आ किछु दिन नैहर मे बितबैत छलहुँ ।पहिले गाम मे गाड़ीक हाॅर्न सँ सभ चौकन्ना भ’ जाइत छल आ पता लागि जाइत छलैक जे फल्लाँक बेटा, बेटी सपरिवार आयल छन्हि ।पूरा गाम आनन्दित होइत छल आ भेंट – घाँट होइत छल।तखन सामाजिक प्रतिष्ठा केवल धन नहि छल। सौहार्दपूर्ण वातावरण छलैक।

आबक समय मे छुट्टी सामाजिक प्रतिष्ठा बनि गेल अछि। शैक्षणिक उपलब्धि , अत्यधिक धन, मँहगा गहना, देश-विदेशक यात्रा सर्वाधिक होइत अछि। छुट्टी मे मँहगा होटल, खान-पान आ घुमनाइ इत्यादिक बढ़िक’ – चढ़िक’ जानकारी छवि संग सोशल मिडिया पर दैत रहैत छथि।
आब बहुतो दादा-दादी वा नाना-नानी गाम छोड़ि शहर आबि बसल छथि। ओहो कारणे गाम घर छुटल जा रहल अछि। हम अप्पन सोसाइटीक बच्चा के कहैत सुनलहुँ ” की तूँ दादा संग रहैत छै? तोरा की सब कीमती उपहार दैत छथुन? ”
आब कीमती उपहार, बहुत खर्च – बर्च केनाइ जीवनक आधार बनल जा रहल छैक। पहिले अहि तरहक कोनो बाते नहि छल। आब विद्यार्थी सभक पेशेवर शिक्षण आ समर कैम्प मे छुट्टी बीतैत छन्हि ।
हवाई यात्रा सँ लोकक जिनगी आसान भ ‘ गेल छैक। दू घंटा मे लम्बा दूरीक यात्रा पूर्ण भ’ जाइत छैक।
पुरान दिन सहज, सुखद आ आनन्ददायक छल। आब बेर-बेर छुट्टी बिताब’ सँ पहिने अप्पन बैंक खाता के टटोल’ पड़ैत छैक, नीक होलीडे डेस्टिनेशन ताक’ पड़ैत छैक आ तैयौ सभक मुँह निहार’ पड़ैत छैक जे सभ खुश भेल की नहि!!

©इला झा
बेंगलूरु