माघी सप्तमीके सूर्य जयंती कहल जैत अछि

170

 

लेख

प्रेषित : आभा झा

लेखनीकेँ धार – माघी सप्तमीकेँ महत्व

सृष्टिकेँ निर्माणक समय चारू दिशामे केवल अन्हार ही अन्हार छलैक, तखन नव ग्रहक राजा सूर्य अपन सात घोड़ा वाला रथ पर सवार भऽ प्रकट भेल छलथिन। सनातन शास्त्रमे निहित अछि कि माघ मासक शुक्ल पक्षक सप्तमी यानि कि रथ सप्तमीक दिनसँ ही सूर्यदेव समस्त जगतकेँ आलोकित केनाइ प्रारंभ कयने छलाह। अतः एहि तिथिकेँ सूर्य जयंती सेहो कहल जाइत छैक। सरल शब्दमे कही तऽ रथ सप्तमीक दिन सूर्यदेवक प्रादुर्भाव भेल छलनि। रथ सप्तमीकेँ अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी आदि नामसँ सेहो जानल जाइत अछि। माघी सप्तमी बसंत ॠतु आ कटाईकेँ मौसमकेँ शुरूआतक सेहो प्रतीक अछि।
माघी सप्तमीक दिन महिला सभ व्रत राखैत छथि आ सूर्यकेँ पूजन करैत छथि। अपन मिथिलामे एहि दिन भगवतीकेँ पातरि सेहो पड़ैत छैन्ह। धार्मिक मान्यता अछि कि सूर्यदेवक विधिवत पूजा कयलासँ व्यक्तिकेँ सुख-समृद्धि आ संतानक प्राप्ति होइत छैक। माघी सप्तमीक दिन दान-पुण्य सूर्य ग्रहणक समान अत्यधिक शुभ मानल जाइत अछि। सूर्योदयसँ पहिने स्नान केनाइ एक स्वस्थ परंपरा छैक आ ई सभ प्रकारक बीमारीसँ मुक्त रखैत छैक।
माघी सप्तमीक महत्व – माघी सप्तमीक दिन भगवान सूर्यकेँ जन्म उत्सवक रूपमे मनाओल जाइत छैक। माघी सप्तमीक दिन भगवान सूर्यकेँ नामसँ दान-पुण्यक लेल सभसँ उपयुक्त मानल जाइत छैक। मान्यता अछि कि एहि दिन सभ पाप आ दुःखसँ मुक्ति भेटैत छैक। कहल जाइत अछि कि मनुष्य अपन जीवनमे सात प्रकारक पाप करैत अछि। जे जानिबुझि कऽ, अनजानमे, मुँहक वचनसँ, शारीरिक क्रिया द्वारा, मनमे प्रचलित जन्म आ पिछला जन्ममे कयल गेल पाप अछि। माघी सप्तमीक दिन सूर्य भगवानक आराधना कयलासँ एहि सभ पापसँ मुक्ति भेटैत छैक।
माघी सप्तमीक दिन, सूर्योदयसँ पहिने भक्त पवित्र स्नान करयकेँ लेल जाइ छथि। मानल जाइत अछि कि एहि समयकेँ दौरान पवित्र स्नान कयलासँ व्यक्तिकेँ सभ बीमारीसँ मुक्ति भेटैत छैक आ ओकरा नीक स्वास्थ्य प्राप्त होइत छैक। एहि कारण माघी सप्तमीकेँ आरोग्य सप्तमीक नामसँ जानल जाइत अछि।
पौराणिक कथाक अनुसार, एक गणिका नामक महिला अपन पूरा जीवनमे कहियो कोनो दान-पुण्यक काज नहिं कयने छलीह। जखन ओहि महिलाक अंत काल आयल तखन ओ वशिष्ठ मुनि लऽग गेली। महिला मुनिसँ कहलथिन कि हम कहियो कोनो दान-पुण्य नै कयने छी तऽ हमरा मुक्ति कोना भेटत। मुनि कहलथिन कि माघ मासक शुक्ल पक्षक सप्तमी कऽ माघी सप्तमी छैक। एहि दिन कोनो अन्य दिनक अपेक्षा कयल गेल दान-पुण्यक हजार गुना प्राप्त होइत छैक। एहि दिन पवित्र नदीमे स्नान करू, भगवान सूर्यकेँ जल दियौन आ दीप दान करू तथा दिनमे बिना नूनक अनूना भोजन करू। ई कयलासँ महान पुण्यक प्राप्ति होयत। गणिका वशिष्ठ मुनि द्वारा बताओल गेल हर बातक सप्तमीक दिन व्रत आ विधिपूर्वक कार्य केलनि। किछु दिनक बाद गणिका शरीर त्यागि देलनि आ हुनका स्वर्गक राजा इंद्रकेँ अप्सराकेँ प्रधान बनयकेँ सौभाग्य प्राप्त भेलनि।
माघी सप्तमीसँ संबंधित एकटा आरो कथा प्रचलित अछि।एकर अनुसार भगवान श्रीकृष्णकेँ पुत्र शाम्बकेँ शारीरिक बल पर बहुत अभिमान छलनि। एक बेर दुर्वासा ॠषि भगवान श्रीकृष्णसँ भेंट करय लेल एलाह। ओ बहुत बेसी दिन तक तप कऽ आयल छलाह आ एहि कारण हुनक शरीर दुर्बल भऽ गेल छलनि। शाम्ब हुनक दुर्बलताक मजाक उड़बै लागल आ हुनक अपमान सेहो केलक। एहि बातसँ क्रोधित भऽ कऽ दुर्वसा ऋषि शाम्बकेँ कुष्ठ होइकेँ श्राप दऽ देलथिन। शाम्बक ई स्थिति देखि कऽ श्रीकृष्ण हुनका भगवान सूर्यक उपासना करय लेल कहलथिन। पिताक आज्ञा मानि कऽ शाम्ब भगवान सूर्यक आराधना प्रारंभ केलनि। सूर्यक आराधना शुरू करिते किछु समय बाद हुनक कुष्ठ रोग ठीक भऽ गेलनि।शास्त्रमे सूर्यकेँ आरोग्यदायक कहल गेल अछि तथा सूर्यक उपासनासँ रोग मुक्तिकेँ मार्ग सेहो बताओल गेल अछि। जय मिथिला, जय मैथिली।