राम जन – जन के जीवनक आधार छथि

800

लेख

प्रेषित : आभा झा

लेखनीकेँ धार – राममय भारत ! सर्वत्र राम ही राम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामक जन्मस्थली पर ‘ रामलला ‘ के भव्य मंदिरक निर्माण कराओल जा रहल अछि। लगभग 500 वर्षक दीर्घ प्रतिक्षाक बाद 22 जनवरी, 2024 कऽ श्रीराम अपन जन्मस्थलीक गर्भगृहमे पुनः विराजमान हेता। भारतीय इतिहासक ई स्वर्णिम दिन अछि। जाहि क्षण रामलला गर्भगृहमे पुनः विराजमान हेता, ई क्षण भारत सहित विश्व भरिमे निवास कऽ रहल करोड़ों भारतवंशीक अत्यंत भावुक आ आनंदसँ विभोर करय वाला अछि। वर्तमान पीढ़ी बहुत भाग्यशाली अछि। अपन आँखिसँ एहि अयोध्यामे ‘ श्रीराम मंदिर ‘ भव्यताकेँ साकार होइत देखि रहल अछि। देशक हर गाम आ शहर श्रीरामक आगमनक लेल सजि रहल अछि। श्रीराम ध्वजा, श्रीरामक चित्र आ माला हर जगह रामक लहर देखा रहल अछि। हर घरमे प्रभु श्रीरामक अक्षत बांटल जा रहल अछि। प्राण प्रतिष्ठासँ पहिने भगवान रामक सासुरसँ खास उपहार अयोध्या आयल। ” भार यात्रा ” में जनकपुर धामसँ मिथिला संस्कृति आ परंपराक अनुसार 1100 भार अयोध्या पहुँचल। लोकमे उत्साह देखय जोगर अछि। जेकरा जे क्षमता छै ओहिसँ बेसी ओ अपन उद्गार देखा रहल अछि।
राम एक नाम नहिं, बल्कि ओ जन-जनकेँ कंठहार छथि, मन-प्राण छथि, जीवनाधार छथि। राम निर्विकल्प छथि, हुनक कोनो विकल्प नहिं। जाहि तरहें आत्माकेँ शरीरसँ आ शरीरकेँ आत्मासँ कियो विलग नहिं कऽ सकैछ ओहि तरहें रामकेँ लोकक हृदयसँ विलग नहिं कयल जा सकैछ। कहयकेँ अर्थ अछि कि राम अलग-अलग वर्गक लेल अलग-अलग रूपमे मान्य छथि। एक वर्गक लेल राम जतय आस्था आ आराधनाक मूरत छथि, ओतहि दोसर वर्गक लेल ओ मर्यादा पुरुषोत्तम व नीति विद पराक्रमक रूपमे मान्य छथि। राम हमर रक्षाकेँ प्रतीक छथि, बुराई पर अच्छाईकेँ जीतक प्रमाण छथि। एक उम्मीद छथि, कि असत्य पर सत्यक जीत निश्चित अछि। एहिसँ ई प्रमाणित होइत अछि कि राम ने सिर्फ हर दौरमे प्रासंगिक छथि बल्कि हर वर्गक लेल सेहो कोनो ने कोनो तरहें आदर्शक प्रतीक छथि। रामक चरित्रमे पग-पग पर मर्यादा अछि, त्याग अछि, प्रेम अछि आ लोक व्यवहारक साक्षात्कार अछि। राम भारतीय समाजक वैचारिक थाती छथि। राम भारतीय परंपराक अभिन्न हिस्सा छथि। राम एक पुत्र, एक भाई, एक पति एक मित्र आ एक राजा सभ रूपमे अनुकरणीय छथि। हर घरमे राम रमण करैत छथि, घट-घटमे बसैत छथि। आखिरकार राम सभक छथि, राम सबमे छथि।
रामक जीवन आम आदमीक जीवन अछि। आम आदमीक समस्या हुनकर समस्या अछि। ओ लंका विजयकेँ बादो ओतऽ के राज विभीषणकेँ सौंप दैत छथि। सीता हरणक प्रसंगमे सेहो उद्विग्न नहीं होइत छैथ। वनवास भेटला पर ओकरो सहजतासँ स्वीकार करैत छथि और पिताक आज्ञा मानि कऽ वनक लेल प्रस्थान करैत छथि। हुनक मोनमे विमाता कैकयी और भाई भरतक लेल स्नेह बनल रहैत अछि। हुनक हृदय करूणासँ ओत-प्रोत अछि। लौकिक जीवनक मर्यादा एवं राजधर्मक निर्वाहक लेल धोबीकेँ ताना सुनि कऽ सीताक परित्याग करि दैत छथि। हुनका अपन जीवनक खुशीसँ बढ़ि कऽ लोकक जीवनक चिंता छलनि।
आदिकवि हुनका संबंधमे लिखने छथि कि ओ गांभीर्यमे उदधि (सागर)के समान और धैर्यमे हिमालयक समान छथि। रामक चरित्र में पग-पग पर मर्यादा,त्याग,प्रेम और लोव्यवहारक दर्शन होइत अछि। हुनक पवित्र चरित्र लोकतंत्रक प्रहरी, उत्प्रेरक आ निर्माता सेहो अछि। ताहि दुवारे तऽ भगवान रामक आदर्शक जनमानस पर एतेक गहींर प्रभाव अछि और युग-युग तक रहत। अयोध्यामे बनय वाला भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृतिक समृद्ध विरासतक द्योतक होयत। एतय निर्मित होमय वाला राममंदिर अनंतकाल तक पूरा मानवताकेँ प्रेरणा दैत रहत। जय श्रीराम।
जय मिथिला, जय मैथिली।