धनक उपयोग आडंबर पर नै सहायतार्थ खर्च करी

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लेख

प्रेषित : नीलम झा निवेधा

#लेखनीक_धार
सांई इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ ,साधु न भूखा जाय।।

अर्थात:- धनोपार्जन एतबा करबाक चाही जाही सँ अपन निर्वाह नीक सँ कए कनेक धर्म – नीक कर्म, तीर्थस्थान, दान पूण्य कए सकी।आधुनिक युगमे बाल बच्चाके नीक शिक्षामे सेहो बहुत खर्चा होइत छैक। एहि सँ बेसी धन मानवमे अहंकार, उदण्डता, बदतमीजी पैदा कए दैत छैक।
नीक सँ निर्वाह सेहो अनेको रूपक होइत अछि। मुदा एकटा होइत अछि आवश्यक -आवश्यकता आ एकटा होइत अछि आवश्यकता।आवश्यक- आवश्यकता भेल जे एहि चीज बिनु नञि बनत से। आ आवश्यकता त’ अनंत होइत अछि। ओकर कोनहुँ आदि अंत नञि थीक। पहिने लोक आवश्यकता बुझैत छलखीन :- अन्न, वस्त्र, आ आबास। मुदा एखन ई मात्र आवश्यकता नञि रहिगेल छैक। एखुनका आधुनिक युगमे सभसँ बेसी खर्च लोक शिक्षा पर करैत छथि। तैं धन संचय परम आवश्यक अछि।
धन संचय जरूरी परंच जतबा धन अर्जित करी ताहीमे ई कार्य परम आवश्यक अछि। जिनका जतेक आ जिनका जतबे ताहीमे दान,धर्म, तीर्थ, गंगा स्नान इत्यादि लेल सेहो खर्च करबाक चाही, तखने ओकर सही सदुपयोग मानल जाइत अछि।कतहु कोनहुँ पूजा होइत अछि आ चंदा मांगल जाइत अछि, ककरो गरीब नि:सहायके वियाहमे पैसाक जरूरत अछि, ककरो माय-बापक श्राद्ध करबाके छै मुदा धनक अभाव छैक त’ एहन स्थितिमे यथासंभव दिल खोइलकए दान देबाक चाही। कतौ मंदिर बनैत छैक, ककरो नेना (बच्चा) पढ़बालेल नाम त’ निकाइल लेलकै मुदा पढ़बालेल जेतै से आब पाई नञि छैक वा बच्चा पढ़बामे बहुत तेज छैक मुदा पैसाके अभावमे ओकर दाखिला नीक विद्यालयमे नञि भ’ रहल छैक त’ एहन समयमे जिनका लंग भगवती धन देने छैथ से धनक सही सदुपयोग करबाके चाही आ एहि सभ अभावीके यथासंभव मदती करबाके चाही।जाड़ महिनामे ओढ़ना ,तील ,गूड़क दानक बड्ड महत्व अछि से यथासंभव करी। होली दीवालीमे रंग अबीरमे आ पटाखा, झिलमिलियामे बेसी पैसा नञि खर्च कए गरीब घरक चूल्हा जराबी। आ ई होइत अछि धनक सही सदुपयोग।आडम्बरमे बेसी नञि जाक असहायके सहायता करी। बूढ़ पुरानक आवश्यकता पर सेहो धियान दी। हुनका अगर कोनहुँ वस्तुकें खगता-बेगर्ता छैन त’ ओहि वस्तुके लए हुनका आबेश करी जाहि सँ हुनक स्वाभिमानके ठेस नञि पहुँचैन।कखनो अगर द्वाइरपर याचक बनि कियो अबैथ त’ हुनकर उपहास वा हुनका खाली नञि घूमेबाक चाही।