सनातन धर्म मे आँवलाक पूजन कैल जैत अछि

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लेख
प्रेषित :कीर्ति नारायण झा

ॐ धातृयै नमः, सनातन धर्म मे धातृ वा आँवला  के बहुत पैघ स्थान भेटल छैक। कहल जाइत अछि जे एकर गाछ मे भगवान विष्णु केर वास होइत छैन्ह। ब्रम्हा जी जखन एहि श्रृष्टि केर रचना कऽ रहल छलाह तऽ ओ अपना के असहज आ असफल अनुभव करय लगलाह तऽ हुनक नेत्र सँ नोरक बुंद पृथ्वी पर खसल जाहि सँ धातृ गाछ केर जन्म भेल। मिथिला मे कार्तिक मास मे एहि गाछक तर भोजन करवाक प्रथा अछि। धातृ अर्थात आँवलाक वैज्ञानिक नाम फिलैन्थस एम्बलिका छियै आ इ एहेन फल अछि जे औषधिय आ स्वादिष्टक गुण सँ आदि कालहि सँ जानल जाइत अछि। इ फल आकार मे छोट अवश्य होइत अछि मुदा बहुत फायदेमंद। स्वास्थ के क्षेत्र मे इ फल संसार भरि मे मान्यता प्राप्त कयने अछि। इ फल विटामिन, खनिज वा एंटी आॅक्सीडेंटस सँ भरपूर होइत अछि। एहि मे विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम आ फाॅस्फोरस प्रचुर मात्रा मे पाओल जाइत अछि। एंटी आॅक्सीडेंटसक गुण होयवाक कारणे इ शरीर केर रक्षा करैत अछि। विटामिन होयबाक कारणे इ मनुखक स्वास्थक लाभ बहुत सहायता करैत अछि। पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आ आयरन अनेकानेक बीमारी के शरीर सँ दूर रखैत अछि संगहि हड्डी आ दांत के मजबूत करैत अछि। विटामिन सी शरीर के डिफेंस सिस्टम के मजबूत करैत अछि तऽ विटामिन ए आ विटामिन बी कॉम्प्लेक्स आँखिक तेज वा त्वचा संग हड्डी कें मजगुत करैत अछि। धातृकक उपयोग कयला सँ शरीरक त्वचा चमकय लगैत छैक संगहि माथ के केस मजगुत होइत छैक। यैह  कारण छैक जे सुन्दरता बढबय बला बेसी उत्पाद मे एकर उपयोग कयल जाइत छैक। केस मे रुस्सी, अथवा केस झड़नाइ के रोकबा मे इ बहुत सहायक होइत छैक संगहि घनगर आ मजबूत केस केर निर्माण करैत छैक। पेट के लेल तऽ इ रामवाण होइत अछि। ई पाचन क्रिया के मजगुत करैत छैक संगहि एसिडिटी आ कब्जक समस्या सँ निवारण करैत छैक। आयुर्वेद केर चिकित्सा मे एकर बहुत उपयोग कयल जाइत छैक। बात, पित्त आ कफ के इ संतुलित करैत छैक संगहि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करवा मे एकर अमूल्य योगदान होइत छैक। सभ प्रकारक च्यवनप्राश मे एकर उपयोग कयल जाइत छैक। इ फल आदि काल सँ आबि रहल अछि, च्यवन ऋषि सेहो एकर भरपूर उपयोग करैत छलाह। हमरा सभके एकर उपयोग हमेशा करवाक चाही चाहे चटनी रअथवा अचारक रूप मे ।जौं संभव हुए तऽ भूखल पेट मे एकरा प्रत्यक्ष रूप सँ खयबाक चाही। प्रकृति द्वारा प्रदत्त इ फल अनमोल अछि आ एकर उपयोग हमरा लोकनि के अवश्य करबाक चाही ।
औषधीय गुण सॅ भरपूर अछि आँवलाऔरा व धातृ । ऑवला आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक आ धार्मिक दृष्टिकोण सॅ सेहो अपन महत्वपूर्ण स्थान रखैत अछि।
एहन मान्यता अछि जे ऑवला के गाछ मे भगवान विष्णुक वास होइत अछि। कातिक शुक्ल पक्ष नौवी तिथि के लोक आँवला पूजन करैत अछि।गाछक जडि म अक्षत, रोली,फूल सॅ विष्णु भगवानक पूजा होइत अछि। एहि तिथि के अक्षय नौवी कहल जाइछ। ओइ दिन ऑवला गाछक नीचा लोक भानस बनाय परिवारक संग भोजन करैत अछि।ओतय ब्राह्मण भोजन करेबाक महत्व सेहो अछि।
ऑवला आयुर्वेद म सेहो अपन अग्रणी स्थान रखैत अछि। ऋषि चयवन एकर आयुर्वेदिक गुण के भरपूर फायदा उठबैत पहिल बेर च्यवनप्राश बनौने रहथि ।प्राश के मतलव होइत अछि चटनी।आइ च्यवनप्राश जाढ मास म सबहक घर म रहैत अछि ओकर सेबन बड्ड गुणकारी होइत अछि।शरीर मे अम्यूनीट पावर कए बढबैत अछि।पाचन तन्त्र सेहो मजबूत होइत छैक।एकर चटनी,मुरब्बा अचार बनैत अछि।ऑवला,हरे, बहेरा के कूटि कय त्रिफला चूर्ण बनैत अछि। ऑवला मे बिटामिन सी भरपूर मात्रा मे उपलब्ध अछि।
ओना त सब गाछ वृक्ष के मानव जीवन सौं संबंध जुड़ल  अछि मुदा ऑवला के स्थान सबसौं उपर अछि। एकर रक्षा हमरा सब के मिलि कय करबाक चाही।