यैह मासमे श्रीरामचन्द्र आ जानकीक विवाह भेल छलनि।

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#लेखनीक_धार_#
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आबि गेल अगहन मास!ई मास गृहस्थ लेल बहुत महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि।
ओना तँ सब मासक अपन -अपन महत्व छै।कहल जाइत छै श्रीकृष्ण अर्जुनकेँ गीताक ज्ञान यैह मासमे देने छलथिन।
किसान सब ई मासक बेसब्रीसँ प्रतीक्षा करैत छथि। हेमंतऋतुक चांदनी रातिमे धानमे मधुर दिव्य दूधक धार भरैत अछि! सुर्यक रौशनी सँ ओ परिपक्व होइत अछि।
जखन वसुंधरा धानसँ सजल रहैत अछि तँ देखतै बनैत। जखन जन सब धान कटैत छथि तँ ओकर आवाज झन-झन नव कनियाक पाजैब सँ लगैत अछि। बासमती, बिरनफूल ,कनकजीर,नहि जाइन कतैक तरहक धान होइत अछि।ई गमकौआ धान जखन वायुसंग अंगराइ लैत अछि तँ धरतीसँ आकाश तक एकर सुगंधसँ गमगमा उठैत अछि !आ देवो लोकनि अपन आशीर्वाद सँ सराबोर क’ दैत छथिन।सबहक घरमे कोठी,बखारी भरल रहैत छै।ई मासमे कियो गरीब नै रहैत अछि अन्न लेल नै तरसै छथि, सबहक बाल बच्चाक चेहरा खिलल रहैत छनि।
अगहन मासमे शुभ काज शुरू भ’ जाइत अछि विवाह, दुरागमन,मुरन, उपनयन, गृहप्रवेश आदि अनेकों काज लोक करैत अछि।शंखक पूजा सेहो यैह मासमे करवाक मान्यता छैक।ई मासमे लक्ष्मीक वास रहैत छैक। हिन्दू पंचांग के अनुसार ई नवम मास थीक ! मार्गशीर्ष नामसँ सेहो जानल जाइत अछि।ई मासमे यमुनामे स्नान कयलासँ लोक सिधे बैकुंठधाम पहुंच जाइत अछि।
नवान्नक धान कटेसँ पहिने दूधक धार द’ वसुंधरा क’ तृप्त करै छनि आ घरक लक्ष्मी ड्योढ़ी टाट लग जा पानि सँ परिछ क’ भगवती घरमे रखैत छथि।वैह धानसँ अग्नि देवके पूजा होइत छनि आ गोसाओनकेँ चढ़ैत छनि।तखन लोक नवान्न करैत अछि।रैवि सेहो यैह मासमे लोक टेकैत अछि।
कत्तो -कत्तो मान्यता छै अखनहुँ बखारीक धान श्रीपंचमीमे निकलैत छै,ओहीदिन कमार सब अपन भाथी चलबैत छथि “फार” केँ पिजेबाक लेल।बखारिएक धान सँ हरक पूजा होइत छैक आ हर जोति आंगनमे पहिने सँ देल अरिपन पर राखल जाइत छैक आ धानद’ पूरा हर वस्त्रसँ झांपल जाइत छैक।ई मासमे लोक बगिया, भक्का आ पूआ संग आलूक दम सेहो खाइत अछि।
अगहन मास अन्नपूर्णाक मास थीक।

अर्चना मिश्रा “अर्शी”
पूर्णिया बिहार
8.12.23