आउ सब मिली नवराति मे दर्शन करी , आरती पाठ पूजन आ नमन करी।

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12/10 / 2023
ज्ञानदा दी संग….
#लेखनिक_धार के अंतर्गत…

शीर्षक:-
“दुर्गा पूजा आब$ सॅ पहिने मूनक उत्साह आ पूजाक तैयारी ”

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

तैयार रहू…….
माँ अम्बे आबय वाली छथि,
अपन दरबार सजाउ,
माँ अम्बे आबय वाली छथि।
माँ के आगमन सँ….
तन, मन आ जीवन
आ सभक आँगन
शुद्ध भs जायत,
माँ के आगमन सँ….।

आसिन-कार्तिक पावनिक मास थिक। भक्तिभाव विधिविधान सँ आराधना मे लीन लोक रहैत अछि। एहि पर्वसभहि मे दुर्गा पूजा सब सँ पैघ आ उत्साह पूर्ण पर्व होइत अछि। आसिन मासक शुक्ल पक्ष में एहि पर्व मनाओल जाइत अछि। एहि पर्वक खुशबू तs जितिया पावैन खत्म भेला के बादे सँ आबय लागयत अछि।
★ लोक सभ सेहो एहि पर्वक तैयारी मे लाइग जाइ छैथ……..तेकर उत्साह अलगे। कियोक चन्दा काटs मे, कियोक मुर्ती बनबाबs में, कियोक मन्दिरक व पूजा स्थलक साफ़ -सफाई करs मे,कियोक पंडालक तैयारी मे, कियोक सब सँ कठिन काज पंडितक खोज आ बलि प्रदान लेल छागरक खोज में। कियो पातड़िक दूध-चीनी-लड्डू, कुमारिक वस्त्र आदिक संग्रह करैत छथि।

★ जेना-जेना सब चीजक ओरीयान भेल जाय छै तेना तेना मुनक उत्साह दुगना भेल जाय छै। जाहि दिन सँ बाँसक खुट्टा गाड़नाय चालू ताहि दिन सँ पूजा स्थलक आकर्षण देख मन प्रसन्न भs जेनाइ अपना आप मे एकटा आराधना पूरा भेनाई होइत अछि। हर दिन पूजा स्थलक तैयारी देखs के बहाने घण्टो-घण्टा माँ के आगमनक सुगंध प्राप्त केनाय मन पूर्णरूप सँ खिलखिला जाय। एखन लिखतों लिखतों मन खिलखिला रहल अछि।
★ माँ भगवती जगन्माता थीकिह। हिनके सँ संसार प्रादुर्भूत भेल अछि आ इयाह पालिनी शक्ति थीकिह। ई सभक शरीर मे चेतना रूप मे विधमान रहैत छथि-

“या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ एहि पूजाक विधि विधान मे लोक लागल रहैत अछि तैयो काज सम्हारब बड़ कठिन रहैत अछि। एहि पर्वक आयोजन बड़ पैघ होइत छै। तैयारी लेल श्रम , आस्था, तपस्या, व्यय आरु समयक साथ-साथ अधिक स अधिक लोको के आवश्कता पड़ैत छै। एहि पूजाक तैयारी सँ लs कs माँ भगवती के आगमन तक हर इंसान चाहे नर हो या नारी , बच्चा हो या श्रेष्टगण सभक अंदर उत्साह भैर पूजा बनल रहय छै।
★ विसर्जक पश्चात माँ दुर्गा प्रस्थान कs जाय छथिन। तेकर बाद हमरा सभक अंदर सँ उत्साह स्वतः खत्म भs जायत अछि।
सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन, भविष्यति न शंसयः॥

।। एहि नवरात्रा में दसो दिन देवी माँ के दर्शन करि ।।
।। एहि नवरात्रा मे अपन-अपन माँ के पूजन करि ।।

✍️ अमित जी