इ पूजा आश्विन मासक कृष्ण पक्ष अष्टमी के प्रदोष काल कैल जैत अछि

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**दहेज मुक्त मिथिलाक आभार**

लेखनीक_धार
(ज्ञानदा दी के संग)

शीर्षक:- “मिथिलामे जितिया पावैन आ व्रतक महत्व”

● मिथिलांचल में आसिन-कार्तिक मास व्रत-पावैनक सम्मेलन थिक। देवता-पितर सभक पूर्ण भक्तिभाव विधिविधान सँ अनवरत आराधना मे हम सभ लागल रहैत छी। एहि पर्वसबहि मे मिथिलांचल मे जितियाक पावैनक अपन महत्व छै। जेकरा बहुत महत्वपूर्ण मानल जाय छै।

आसिन-कार्तिक के पावन
मिथिलाक आँगन
बड़ सुहावन
पितरक याद
सन्तान के दीर्घायुक आशीर्वाद
मातृ नवमी
माता के साथ

●ई पूजा अश्विन मासक कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथि में प्रदोष काल मे कैल जाइत अछि। मिथिला मे एहि व्रतक बहुत महत्व रहय छै। कारण जे ई व्रत हर घरक माँ सभ अपन-अपन संतानक मंगलकामना आ दीर्घायु लेल करय छथिन। स्त्रीगण शलिवाहन राजक पुत्र भगवान जीमूतवाहनक विधिवत पूजा करय छथिन। वंशवृद्धि लेल एहि में बाँसक पात सँ पूजा आवश्यक अछि।

●एहि पूजा मे स्त्रीगनक श्रम, तपस्या, धैर्य के परीक्षा सेहो होई छैन। एहि मे व्रत रखनाय सेहो निर्जला बहुत कठिन रहय छै। तथापि स्त्रीगण एहि मे समर्पित रहैत छथिन। माँ कोनो भी रूप में अपन संतानक नाम पर कठिन सँ कठिन तपस्या कऽ सकैत छैथि।

● माँछ आरु मरुआ रोटी सँ शुरूवात कैल जाय छै । छोट बच्चा सभके ई पाबनक इंतजार बहुत रहय छयन। तेकर कारण जे भोर मे ओठगन सेहो होई छै। आ ओठगन में चुरा, दही, केला, मिठाई, मिथिलाक मिठाई अमोट संग जे देबाल धरि ऊँघैट कs पईन पियब तेकर तs अलगे आनन्द ।

●एकटा कथनानुसार जखैन युद्ध के समय अश्वत्थामा अभिमन्यु के पत्नी उत्तरा के गर्भ में उनकर संतानक हत्या क देलक तs भगवान श्रीकृष्ण अपन शक्ति सँ अभिमन्युक सन्तान के जीवित कयलथिन । जन्मक बाद उ बच्चा के नाम जीवित्पुत्रिका राखल गेल। मानल जाय छै कि एकर बाद सँ ही ई जितिया व्रत राखअ परंपराक शुरुआत भेल।

●कहल जाइत अछि जे भगवान जीमूतवाहन निश्चित रूप सँ हमर सबहक इच्छा पूरा करैत छथि। सन्तान सभक स्वास्थ आरू दीर्घायु मिलय छै। कहल जाइत अछि जे जेना भगवान श्रीकृष्ण उत्तरा के बच्चा के बचा लेलखिन तहिना भगवान श्रीकृष्ण व्रतधारी माता के संतान के सेहो रक्षा करैत छथि ।स्त्रीगण एहि व्रत केँ बहुत श्रद्धापूर्वक करैत छथि ।

●सभके अपन-अपन बच्चा के प्रति प्रेम आ स्नेह होइत छैक। माँ के दिल सबसँ पैघ होइत छैक आ ओ सदिखन अपन बच्चा के सुख के लेल प्रयासरत रहैत छथि । मिथिला मे जीवनपुत्रिकाक ई व्रत मनाओल जाइत अछि । स्त्रीगण समूह मे जमा भs अपन बच्चा के लेल पूजा करैत छथि जाहि सs समूह के महिला सब में एकता सेहो आबि जाइत अछि । एहि पूजाक फलस्वरूप भगवान जिमुतवाहन आ भगवान श्रीकृष्णक आशीर्वाद भेटैत अछि ।

●. व्रति दिनभर व्रत कs साँझखन यथाविथि
पंचोपचार पूजा करय छथि।प्रणाम कs कथा सुनय छथि। कथा सुनि कs अप्पन संतान के लेल मंगलकामना करैत वरदान मंगैत छथिन।

●. जे व्रति जीमूतवाहनक पूजा करय छथिन आ ब्राह्मण के दक्षिणा दs कथा सुनय छथि । से एहि पूजाक प्रभाव सँ सन्तान व पति सहित सब तरहक सुख भोगय छथिन।

सन्तानक जीवनक रक्षा के लेल।
करय छथिन मां जितियाव्रत आ पूजन।।

धरा पर अहाँ जेना किओ दोसर नै।
हरदम छलकय मां सँ स्नेह।।

  1. तपस्या क माँ सन्तान के हर सुख दै छथिन।खुद कष्ट मे रहि कs सन्तानक कष्ट हरय छथिन।।

।। जितिया पाबनक मिल के करू ओरीयान।।
।। अपन-अपन मां के हमेशा करू गुणगान।।

✍️ अमित जी —