दहेज मुक्त मिथिला के आवाज़ के बुलंद करैति ई रचना

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मंजूषा झा।                             
दहेज मुक्त ब्याह
दहेजमुक्त मिथिला स !!
गठबंधन क लाभ उठाबु यो ।
पलेटफ़ोरम ई निक बनाल अछी,
अवसर पर लाभ उठाबु यो ।
अपन सभक सपना हेत पूरा,
हमरो धर्मक भागी बनाबू यो ।
विधाता क लिखल जुड़िबंधन ,
हुनके निर्देश सँ सब चले छी ,
ईहो आहाँ बुझु यो ।
गठबंधन के खेल नै बुझु,
अछी जीवन भरिक सरोकार ।
क्षणभंगुर शरीरक सुंदरता पर ,
नीच ने बुझु ककरो यौ सरकार।
सब परिश्रम केने हेताह,
बहुत अपन -अपन संतान पर।
सभक संतान सुशीले होई छैन,
ई जुनि कियो बिसरु यौ सरकार ।
सिर्फ़ बायोडाटा से कोना क बुझब’?
के छथि बेसी बुधियार ?
किताबक जिल्द स कोना बुझलहूँ ?
पूरा कहानी यौ सरकार ।
पहिले मिलु, बातचीत करु!!!
समय ,दियो दस दवारि ।
तखनहि बुझै मे आओत,
सच मे के सुंदर ?आ के संस्कारी ।
सुंदर मोती ताके लेल ,
समुद्र क गहराई मे उतरु यौ भैयारि।
दहेजमुक्त मिथिला सँ ,
लाभ उठाबु यौ भैयारि।
कतबो कहबनि , कहिते रहबनि !
नै दई छथि तैयो ध्यान ।
मुँह बिचकौने ,गरदनि घूमौलनी ,
कतेक दिन अंठौने ,
रहबै यौ सरकार। ।
विवाह करब से ,
नहीं छनि कनियो चिंता!!
सत्ते कहे छी ,
पर कियो सुनता की नै सुनता ।
आब नै घिसाई छै जुता,
नहि चाहि रुपैया पैसा ,
नहि चाहि वर ताके ले छाता,
बस , फोने बड़ स्मार्ट भ गेले ,
बायोडाटा क छेई ताँता।
एक से एक देखे छी कथा,
बेटी हो या बेटा !!!
तखन किया करु हम चिंता?
मन देबै ते भये जेते ,
एक से एक बढिके रिस्ता।
कोना कि सुरुआत करु?
चैतक महीना छै सुरूँ !
घरे बैसल भेटतै दुलहा ,
वट्स ऐप पर सबटा फरिछेतै
तखन किया करु धरफ़री ???
सबटा ते की ओहे सब करतै??
दुलहा आ दुलहिन क जोड़ी!!!
कनी संग ‘समाजो’ दियौ ,
परिवारक संग ते छहिये ज़रूरी ।
पर जखन फ़ोन घूमेलनि,
बरागत व कन्यागत
बायोडाटा पर नज़रि गड़ाकय ,
जगह दु – चारि धड़फड़ा कय ।
तखने हाथ माथ ध बैसला,
काका मनहि मन झमारि कऽ !!
जखनहि मुहरा-मिलानक ,
आएल पहर शुभ घड़ी !!!!!
कोना दन’ किछू बाबजलखिन ,
किछूए सुनलौं , बुझिए नै पेलौं !
नहि जानि कोना आ कियै भेलै ?
एकदम सँ मुँहफ़ुल्ला – फ़ूल्ली।
ताकि रहल छी , अहर-पहर !!
दुनू तरफ़ मुँह ………
भेल अछी ज़हर !!!!!!!
कोना कटत ई ????
दहेजक “ क़हर”!!!!!
बाट कोनो ते देखाऊ !!!
सब मिलि दहेज दानव क भगाऊ!
अखंड मशाल जराऊ !!
सब मिलि सप्पत खाऊ !!
आदर्श मिथिला बनाबु यौ भैयारी ,
सब मिली करु ब्याहक तैयारी ।
“ठानि लेबै ते हेबे करतै – २”
‘दहेज मुक्त मिथिला ‘
यौ सुनु अपन सब मिथिलावासी।
🍁🍁सस्नेह अभिवादन सब कियो के । जय मिथिला , जय जानकी ।💐🙏
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