“पाग : मैथिल के पहचान”

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आभा झा।                                 
मिथिला में पाग के महत्व
मिथिला के आन-बान आर शान अछि ‘पाग’।मिथिला में पाग सम्मान के प्रतीक अछि।’पाग’जेकरा पहिर क लोक स्वयं केर गौरवान्वित अनुभव करैत छथि।मिथिलांचल में अपन अतिथि के सम्मान देबाक लेल हुनका ‘पाग’पहिरायल जाइत अछि।कवि कोकिल श्री विद्यापति सँ ल कऽ आजुक महानुभाव के बीच सम्मानक रूप में प्रचलित ‘पाग’के अपन विशिष्ट महत्ता अछि।डिक्शनरी में सेहो पागक अलंकारिक अर्थ लिखल अछि–पाग के मतलब प्रतिष्ठा अछि।दिसंबर 2019 में ‘पाग’शब्द के लंदन सँ प्रकाशित मैकमिलन डिक्शनरी में सेहो अंगीकार भेल अछि।ऑक्सफोर्ड सेहो ‘पाग’ शब्द के स्वीकार करैत अगला संस्करण लेल विचाराधीन रखने अछि।
‘पाग’ के प्रतिष्ठा दियाब में पिछला कतेक वर्ष सँ जुड़ल मिथिला के लोक फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ बीरबल झा एहि उपलब्धि पर खुशी जतेने छैथ।बुझल जाय कि डाॅ झा 2016 में ‘पाग’बचाओ अभियान ‘दिल्ली सँ शुरू केने रहैथ।ऐकर बाद केंद्र सरकार सेहो 2017 में मिथिला के ‘पाग’ पर डाक टिकट जारी केलनि। एलबीएसएम काॅलेज के मैथिली विभागाध्यक्ष डाॅ रवींद्र कुमार चौधरी सेहो कहलखिन कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेहो पागक महत्व बुझलखिन।
मिथिला संस्कृति में गर्भाधान सँ ल कऽ श्राद्धकर्म धरि सोलह संस्कार के समायोजित कैल गेल अछि।एहि संस्कार में सर्वप्रथम उपनयन संस्कार आर ओकर बाद विवाह संस्कार में पाग केर प्रचलन अछि।पहिने साठा पागक चलन छल,जेकरा अमूमन साइठ हाथक कपड़ा सँ बनायल जाइत छल आर ऐकरा पहिरय वाला स्वयं ऐकरा अपन माथ पर बांधय छलाह।मुदा समय बदलल आर लोकक सोच सेहो,से पाग अपन प्रारंभिक अवस्था सँ आधुनिक अवस्था में पहुँच चुकल अछि।हमर विचार सँ त एहि में किछ आर परिवर्तन क आर नीक बनायल जा सकैत अछि जाहि सँ इ माथ सँ जल्दी खसत नहिं।
पहिने कोढ़िला सँ पाग बनय छल,मुदा आब ओ उपलब्ध नहिं रहबाक कारण बत्तीस औंसक कूट सँ पागक ढाँचा तैयार कैल जाइत अछि,फेर मलमल या सूती कपड़ा सँ ओकरा सजायल जाइत अछि।पाग के ऊपरी भाग के चनवा कहल जाइत अछि जाहि पर तिकोना कूट लागल रहैत अछि,जेकरा त्रिफला कहल जाइत अछि।पागक आगु भाग के आगुक चूनन ओकर नींचा मुड़ल भाग के पेशानी आ पाछु के हिस्सा के पिछुआ कहल जाइत अछि।
मिथिला में मांगलिक,संस्कृति आ धार्मिक परियोजनक अनुसार अलग-अलग रंगक पाग पहिरबाक परम्परा सेहो अछि,जेना उपनयन संस्कारक अवसर पर पियर पाग,विवाह
के अवसर पर ललका पाग,कोनो तरहक
धार्मिक परियोजनक अवसर पर उज्जर रंगक पाग पहिरल जाइत अछि।
दरअसल मिथिला में ‘पाग’ के विशिष्ट महत्व अछि।’पाग’ पूरा मिथिला के सांस्कृतिक प्रतीक अछि।परिवार या समाज के सम्मानित व्यक्ति ऐकरा अपन माथ पर धारण करैत छैथ।ई हुनकर ज्ञान आर सामाजिक सम्मान के सूचक अछि।संरचना के कारण ऐकरा धारण कनाइ बहुत कठिन अछि।विनीत भाव सँ ऐकर धारक कतौ कनिक झुकि जेता,त ई माथ सँ खसै लागैत अछि।मैथिली में पाग खसनाइ ‘एकटा मुहावरा अछि जेकर अर्थ अछि ‘इज्जत गंवेनाइ’।आब त एतेक सुंदर-सुंदर मिथिला पेंटिंग कैल ‘पाग’ भेटैत अछि।अपना सब अपन एहि संस्कृति के बनेने रहि। जय मिथिला जय जानकी।