ज्योतिषाचार्य पं. सुधानन्द झा द्वारा मिथिलाक विशिष्ट परम्परा मे सूर्य स्तुति पर विशेष विचार

आध्यात्म आ मानव जीवन – मिथिलाक जीवन पद्धति विशेष

– ज्योतिषाचार्य पं. सुधानन्द झा

*श्री सूर्य भगवान के दिव्य स्तुति जाहि के नित्य पाठ स मनुष्य के जन्म जन्मांतर के रोग,आ कष्ट दूर भ जाइछ*
*(ई सूर्य स्तुति हम लगभग सभ मिथिला समूह में पोस्ट कयने छी”*)
*स्वयं सूर्य भगवान श्री कृष्ण भगवान के पुत्र श्री साम्ब के बतौने रहथिन्ह आ श्री कृष्ण भगवान के पुत्र साम्ब श्री सूर्य भगवान द्वारा बताओल एहि दिव्य सूर्य स्तुति के पाठ स ओ भयंकर रोग आ शाप स मुक्त भ गेलाह आ दिव्य काया एवं दिव्य जीवन प्राप्त कयलन्हि*
*अपना मिथिला मे माय बहिन जखन माघ स्नान, बैसाख स्नान आ कार्तिक स्नान करैत छलीह त गामक ज्यौतिषी वा पंडित जी के द्वारा भोरे भोर एहि दिव्य सूर्य स्तुति के श्रवण करैत छलीह आ अपन मनोवांछित फल प्राप्त करैत छलीह*
*मिथिलावासी! बहुत दुख जे आब ई परंपरा लुप्त भ रहल अछि अपना मिथिला स तैं निवेदन मिथिलावासी स जे अपन परिवार में एकरा पुनः सम्मिलित कयल जाय*
* ई सूर्य स्तुति ओना त सबहक लेल लाभदायक किन्तु जिनकर विवाह नै भ रहल अछि ओ लड़का वा कन्या के विशेष लाभदायक ,*
*जे असाध्य रोग वा अकाल घटना वा कोनो भी प्रकार के घोर संकट में छथि हुनका लेल ई दिव्य सूर्य स्तुति वरदान सिद्ध होयत*
*सबेरे स्नानादि स निवृत्त भ तांबा,फूल,वा पीतल के पात्र स श्री सूर्य भगवान के अर्घ्य एहि मंत्र स दीय*:-
*ऊं एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत् पते।
अनुकंपय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर*
*एकरा बाद श्री सूर्य भगवान के ध्यान प्रनाम करैत पूरब मुंहे ठाढ़ भ जाउ आ कल जोड़ि क पूर्ण श्रद्धा स श्री सूर्य भगवान के स्तुति के पाठ करू वा श्रवण करू*
(*डा सुधा नन्द झा ज्यौतिषी ग्राम राढ़ी 9430336503)*
*श्री सूर्य स्तुति आरंभ*:-
🕉**ऊं नमः श्री सूर्याय । वशिष्ठ उवाच*:—
स्तुवंस्तत्र ततः साम्बः कृशोधमनि संतत:!
राजन्नाम सहस्रेण,सहस्रांशुं दिवाकरम्।१।।*

*खिद्यमानन्तु तं दृष्ट्वा सूर्य: कृष्णात्मजं तदा ।
स्वप्नेन दर्शनं दत्वा पुनर्वचन मब्रवीत्।।२।*

**श्री सूर्य उवाच*:–
*साम्ब साम्ब महाबाहो श्रृणु जाम्बवती सुत।
अलन्नाम सहस्रेण पठस्वेवं स्तवं शुभम्।।३।।**

**यानि नामानि गुह्यानि,पवित्राणि शुभानि च।
तानि ते कीर्तयस्यामि,श्रुत्वा वत्सावधारय।।४।।
विकर्तनो विवस्वांश्च मार्त्तंडो भास्करो रवि:।।
लोक प्रकाशक: श्रीमान् लोक चक्षुर्ग्हेश्वर:।।५।।*

*लोक साक्षी त्रिलोकेश: कर्त्ता हर्त्ता तमिस्रहा।।
तपन: तापनश्चैव,शुचि: सप्ताश्व वाहन:।।६।।
गभस्ति हस्तो ब्रह्मा च,सर्व देव नमस्कृत:।
एक विंशति रित्येष स्तव इष्ट सदा मम।।७।।*

*शरीरारोग्यदश्चैव धनवृद्धि यशस्कर:।
स्तवराज इति ख्यात: त्रिषु लोकेषु विश्रुत:।।८।।
य एतेन महाबाहो,द्वे संध्ये स्तमनोदये।
स्तौति मां प्रणतो भूत्वा सर्व पापै: प्रमुच्यते।।९।।*

*कायिकं वाचिकं चैव मानसं यच्च दुष्कृतम्।
तत्सर्व मेक जप्येन प्रणश्यति ममाग्रत:।।१०।।*
*एष जप्यश्च होमश्च संध्योपासन मेव च।
बलि मंत्रोऽर्घ मन्त्रश्च धूप मंत्र: तथैव च।।११।।*

*अन्न दाने तथा स्नाने प्रणिपाते प्रदक्षिणे।
पूजितोऽयं महामंत्र: सर्व व्याधि हर: शुभ:।।१२।।
एवमुक्त्वा तु भगवान् भास्करो जगदीश्वर:।
आमंत्र्य कृष्ण तनयं तत्रैवान्तर धीयत।।१३।।*

*साम्बोऽपि स्तवराजेन स्तुत्वा सप्ताश्व वाहनम्।
पूतात्मा नीरुज:श्रीमान् तस्मात् रोगात् विमुक्तवान्।।१४।।*
*बोलिए श्री सूर्य भगवान की जय
ऊं आदित्याय नमो नमः
ऊं भास्कराय नमो नमः*

*संस्कृत श्लोक पढ़य मे आरंभ में बहुत अशुद्धि भ सकैये किन्तु धीरे धीरे ठीक भ जायत*

*डा सुधा नन्द झा ज्यौतिषी ग्राम राढ़ी भाया जाले दरभंगा वर्तमान में जमशेदपुर 9430336503*