श्रेय केकराः कारखानाक नींव रखनिहारकेँ या संचालन मे आनि देशक अर्थतंत्र केँ पुष्ट कयनिहारकेँ

सर्वाधिक क्षमता आ गतिक लोकोमोटिव मधेपुरा रेल कारखाना मे तैयारः मोदीक मेक इन इंडिया केर लाभ मधेपुरा रेल इन्जिन कारखाना केँ
 
मधेपुरा मे अल्सटौम द्वारा भारतीय रेल संग संयुक्त लगानी मे नव इलेक्ट्रीक लोकोमोटिव (रेल इन्जिन) निर्माण समयसीमाक अन्दर पूरा कयल जेबाक समाचार समुचा मिथिलावासीक संग बिहार आ देशक आन-आन हिस्सा मे एकटा बहुत सार्थक सन्देश पहुँचेलक अछि। आब भारतीय रेल द्वारा देल गेल ८०० लोकोमोटिव केर आदेश जल्दिये पूरा होयबाक उम्मीद अछि। एहि संगे १००% विद्युतीकरण केर लक्ष्य सेहो पूरा होयत। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन मे कटौती होयत। भारी मालवाहक भाड़ावला रेलगाड़ी सेहो देशक एक कोण सँ दोसर कोण मे शीघ्रता सँ समान ओसार-पसार करतैक। सवारी सब लेल सेहो ६००० मेट्रीक टन वहन करबाक सामर्थ्य वला ई इन्जिन सँ समयक बचत करबाक संग-संग परिचालन खर्च कम हेतैक। रेलवे केँ होयवला फायदा निश्चिते भाड़ाक चाप सेहो कम करत ई संभाव्य कहि सकैत छी। ई परियोजना वर्तमान मोदी सरकारक एकटा महत्वपूर्ण उपलब्धि थिक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीक ‘मेक इन इंडिया’ तहत वैदेशिक लगानी मे अल्सटौम कंपनी जे आरो ६ गोट फ्रांसक कम्पनी संग अन्तर्क्रिया करैत ई चुनौतीपूर्ण कार्य केँ पूरा केलक अछि। एहि ‘मेक इन इंडिया’ मे वैदेशिक लगानी सँ भारतक लोक केँ कि लाभ भेटलैक से बुझब कठिन नहि अछि। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगारी भेटबाक संग-संग ९०% वस्तुगत आपूर्ति स्थानीय वेन्डर्स द्वारा भेलैक अछि। देश मे विदेशक विकसीत तकनीकी एला सँ आगाँ अर्थतंत्र पर एकर जे सार्थक असर पड़तैक तेकर दूरगामी लाभ अपना जगह पर छहिये।
 
ई खुशखबरी बाहर अबिते प्रधानमंत्री मोदी तथा वर्तमान एनडीए सरकारक सराहना होयब स्वाभाविके छैक। परञ्च राजनीतिक विचारधारा मे मोदीजी आ एनडीए सरकारक विरोधी अहु ठाम अपन घृणित राजनीति करय सँ नहि चूकल। काल्हि ई समाचार जखन मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशित केलाक बाद सोशल मीडिया सँ लिंक शेयर कयल त किछु लोक केँ मेरचाइ लागि गेलनि। ओ सब लालू प्रसाद यादव केँ सेहो श्रेय देबाक जिद्द पर उतरि गेलाह। यथार्थतः पैछला यूपीए सरकार मे रेल मंत्री रहल लालू प्रसाद यादव मधेपुरा संसदीय क्षेत्र सँ निर्वाचित सांसद होयबाक कारण अपन दूरगामी राजनीतिक सोच अनुरूप मधेपुरा मे रेल इन्जिन कारखाना स्थापित करबाक महत्वपूर्ण कार्य कागज पर आरम्भ कय देलाह। लेकिन तेकर बाद यूपीए सरकारक सम्पूर्ण कार्यकाल मे मंत्रालयक विभिन्न विभाग आ लाल-फीताशाहीक पाँज सँ ओ परियोजना जमीन पर नहि उतैर सकल। २०१४ मे एनडीए सरकार भारी बहुमत सँ सरकार गठन करैत रेल मंत्री सुरेश प्रभु केर नेतृत्व मे लालूजीक ओ दबल परियोजना केँ हथियाबैत ओहि कारखाना मे भारतीय रेलक २६% शेयर राखि विदेशक कंपनी सँ ७४% निवेश मे ‘मेक इन इंडिया’ तहत समझौता कय ई महत्वपूर्ण कार्य पूरा करौलक। निश्चित सपना लालूजी देखलनि परञ्च साकार मोदीजीक सरकार द्वारा भेल जाहि सँ हजारों लोक केँ रोजगार भेटबाक संग देशकेँ अर्थतंत्र पर्यन्त केँ प्रभावित करयवला परियोजना साकार भेल अछि। लालूजी ‘मेक इन इंडिया’ आ ‘वैदेशिक लगानी’ मे ‘डबल साइड १२ हजार हौर्सपावर केर इलेक्ट्रीक लोकोमोटिव’ निर्माण सँ देशक अर्थतंत्र मे उल्लेख्य सुधार केर सपना नहि देखने छलाह। तखनहुँ, लालूवादक समर्थक बिहारी जनमानस मे एकर श्रेय लालू यादव केँ भेटबाक बात एहने बुझायल जेना आइ धरि बिहार मे नेताक चुनाव करबाक समय जनताक भावना मे भेटैत आयल अछि… यानि जातिक आधार पर नेता चुनू, ओकरा मे भले विकास करबाक सोच हो या नहि हो… बस ओ अहाँक पसीनक जातिक नेता थिक, ओकरा वोट दय दियौक।
 
मधेपुरा या सम्पूर्ण पूर्वी मिथिला (कोसी) क्षेत्र मे एनडीए कय गोट सीट जीतल? मोदीक लहैर एतय कतेक काज केलक? बात विचारणीय अछि। आगुओ एहि क्षेत्रक जनता मोदी केँ वोट देत तेकर उम्मीद एखन बिहारी राजनीति मे करब पूर्वक अनुभव पर कहब मुश्किल बुझा रहल अछि। लेकिन देश केँ आगू बढेबाक आ बहुतो रास कठोर सुधारात्मक उपाय अपनबैत सिस्टम केँ एकटा नया रूप देबाक गंभीर आ महत्वपूर्ण कार्य कयनिहार मोदी सरकार पूरे देश मे आ विदेश मे भारत केँ नव दिशा मे आगू बढा चुकल अछि ताहि सँ सब सहमत अछि आ आरो बेसी सहमत आबयवला समय मे होयत। लालूजी केँ श्रेय देबाक लेल रेल मंत्रीक रूप मे बहुत किछु रहितो मिथिला लेल अटल बिहारी वाजपेयी सरकार तथा नीतीश कुमार पूर्व रेल मंत्रीक समय मे पास कयल गेल परियोजना सब केँ अधर मे लटकेबाक कूकार्य केँ नहि बिसरल जा सकैत अछि। आइ सँ लगभग १५ वर्ष पूर्व जखन सकरी सँ फारबिसगंज धरिक छोटी लाइन केँ बड़ी लाइन मे अमान परिवर्तन आदिक योजना केँ तत्कालीन राजग सरकार मंजूरी देने छल तहिया ओहिपर मात्र ३०० करोड़ टका खर्च सँ काज पूरा कयल जेबाक अनुमान रहय। २००४ केर आम निर्वाचन मे अटल बिहारी वाजपेयीक नेतृत्व मे राजग केर चुनाव हारिते यूपीए सरकार आ तेकर रेल मंत्री लालूजी सारा परियोजना केँ जस केँ तस राखि देलनि आ स्वीकृत परियोजना मे २०१५ धरिक कुल खर्च २८२ करोड़ कयल जेबाक तथ्यांक भेटैत अछि। पुनः जे तथ्यांक भेटैत अछि ताहू लेल मोदी सरकार केँ पूर्ण श्रेय जाएत अछि – ८३ वर्ष सँ बाधित दुनू कातक मिथिला केँ पुनः रेल द्वारा जोड़बाक लेल वर्तमान सरकार प्रयास तेज कय चुकल अछि।
 
सकरी-झंझारपुर-निर्मली-सरायगढ़-सहरसा-फारबिसगंज रेल खंड पर खर्च
 
– ३०१ करोड़ रुपया प्रारंभिक स्वीकृत लागत
 
– २८३.४४ करोड़ रुपया मार्च २०१५ तक खर्च
 
– ४२ करोड़ रुपया २०१५-२०१६ मे आवंटित
 
– १०० करोड़ रुपया २०१६-२०१७ मे आवंटित
 
– १२५ करोड़ रुपया चालू वित्तीय वर्ष मे खर्च करबाक लक्ष्य
 
चालू वित्तीय वर्ष मे एहि रेलखंड केर आमान परिवर्तन पर करीब १२५ करोड़ रुपया खर्च करबाक अनुमान अछि। दुइ साल केर अंदर एहि क्षेत्र मे सीधा रेल सेवा बहाल कयल जेबाक लक्ष्य लेल गेल अछि। एहि जनतबक स्रोत छथि जीतेंद्र नारायण लाल दास, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उत्तर निर्माण संगठन, पूर्व मध्य रेलवे। (सन्दर्भः मुजफ्फरपुर सँ दिग्विजय कुमार केर भास्कर मे प्रकाशित लेख – अक्टुबर २८, २०१७, लिंक – https://www.bhaskar.com/bihar/patna/news/BIH-PAT-HMU-rail-bridge-expense-on-kosi-river-5730948-NOR.html – आब अनुमानित ११७२ करोड़ केर खर्च होयवला अछि एहि परियोजना केँ पूरा करय मे) ।
 
आब अहाँ कहू जे श्रेय सिर्फ सपना देखनिहार केँ देबनि आ कि ओहि सपना केँ व्यवहार मे उतारबाक लेल तत्पर आ दृढ राजनीतिक विचारधारा आ समूह केँ? ई प्रश्न केँ अहाँ स्वयं अपन विवेक सँ उत्तर दी। अस्तु!
 
हरिः हरः!!