कविताक शक्ति, विनोदक ताजाताजी पाँच कविता आ ओकर प्रभावक गहिंराइ

मैथिली कविताक प्रभाव

वर्तमान युगक कतेको रास नामी-गिरामी कवि-कथाकार-उपन्यासकार व साहित्यकार लोकनि सामाजिक संजाल – फेसबुक मंच केर उपयोग करैत अभरैत रहैत छथि। एहि क्रम मे श्रेष्ठतर स्रष्टा – साहित्य अकादमी सँ पर्यन्त सम्मानित श्री उदय चन्द्र झा विनोद नित्य एक नव रचनारूपी गहनाक संग मैथिली भाषा-साहित्यक सुन्दर स्वरूपकेँ सजबैत भेटैत छथि। दिल्ली विश्व पुस्तक मेला मे मैथिली मचानक अनुभव शेयर करैत सह-संचालक अमित आनन्द कहि रहल छलाह जे मैथिली लेखक आ साहित्यकार सबकेँ पाठकक रुचि बुझय पड़तनि। पाठक आइयो हरिमोहन झा केर कथा तकैत छथि। पाठक केँ समेटिकय लेख-रचना कयनिहार सर्जक केर मांग बेसी अछि। मैथिली मे लोक कविता बेसी नहि पढय चाहैत अछि। फेसबुकिया कविता केँ पोथी मे अँटाकय प्रकाशन कयला सँ पाठकक मस्तिष्क मे लेखक स्थान नहि बना सकैत छथि। नामी-गिरामी गीतकारक कविता संग्रह केर कोनो पूछ नहि भेल, लेकिन उपन्यासकार आ गद्यकारक मांग बेसी देखल गेल। गोटेक नामक चर्चा करैत ओ कहलनि जे सजग पाठक एहेन लेखक आ प्रकाशक सभक सब पोथी कीनि लेलनि। हम त अपनो छगुनता मे छी जे मैथिलीक सजग पाठक के छथि, प्रकाशक के छथि, पोथी कोन-कोन अछि, केहेन-केहेन विषयपर रचना सब प्रकाशित कयल गेल अछि, मैथिली भाषा-साहित्यक पोथीक पाठक कोन-कोन जिला मे भेटैत छथि, कतय-कतय पोथी उपलब्ध होएत अछि, साहित्य अकादमी आ मैथिली अकादमीक अलावे आरो राज्य प्रायोजित संस्थागत प्रयास एहि दिशा मे कि सब आ कतेक भेल अछि। ई सब प्रश्नक जबाब कोनो स्रोत सँ हमरा पुख्ता भेटय त उत्साह बढय, विश्वास बढय आ मैथिलीक सामर्थ्यक यथार्थ परिचय लोक सब सँ करा सकबाक स्थिति बनत।

हम सब जे पढैत छी तेकर सन्देश ग्रहण करैत छी। आइ फेरो चर्चा श्री उदयचन्द्र झा विनोदक फेसबुकिया कविताक कय रहलहुँ अछि, विगत मे सेहो बेर-बेर करैत आबि रहल छी। श्री विनोदक कविता मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल आ ठाढी गाम मे दू-दू बेर प्रत्यक्ष सुनबाक अवसर भेटल छल। श्री विनोदक काव्य यात्रा पर विमर्शक सत्र सँ लैत एकल प्रस्तुतिक ओ अमिट छाप आइयो मन-मस्तिष्क मे पड़ल अछि। हम बड गंभीर पाठक छी – अलग-अलग रसक आनन्द लेब जनैत छी – ई सब कतहु सँ सच नहि। बस चलैत-फिरैत एक श्रेष्टतम् कवि सँ भेंट भेल, आइ किछुए वर्षक मैथिली सेवा यात्रा मे आरो कतेको रास कविवर सब सँ भेंट होयबाक सौभाग्य भेटल। कविता सुनिकय एना लगैत अछि जे एक लाइन मे एकटा सौंसे ग्रंथक ज्ञान समाहित रहैत अछि। मात्र किछु पाँति मे छंद समान वेदविद् ज्ञान समाहित भेटैत अछि। हमरा सन अनेकों पाठक कविताक अगाध सिनेही छथि सेहो कतेको सजल महफिल मे देखि चुकल छी। फेसबुकिया कवितापर सेहो प्रशंसक, दार्शनिक, लेखक लोकनिक प्रतिक्रिया सँ ई स्पष्ट होएत अछि जे कविताक पाठक कम नहि। तखन कविता संग्रह ओहि कविक जरूर बिकायत जे नीक शैली मे बढियां सन्देशमूलक रचना करैत ओकरा प्रकाशित कयलनि अछि। हम अपन अनुभव ‘प्राण हमर मिथिला’ सँ यैह कहय चाहब जे एक्के बेर कियो विनोद आ कि सरस आ कि जनक आ कि चन्द्रमणि या विभूति आनन्द, अशोक मेहता, हरिश्चन्द्र हरित, अद्भुतानन्द आ वंशीधर मिश्र आ कि अजित आजाद, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, रमेश रंजन, प्रेम विदेह, दिगंबर दिनमणि नहि बनि जेता। काव्य रचना करिते-करिते मजाएत छैक। बस सन्देश भरल काव्य रचना होएत रहबाक चाही। कविताक पाठक केर कतहु कमी नहि अछि। संचारकर्म सँ जानकारी पाठक धरि पहुँचैत रहत, मैथिली पोथी खूब बिकायत से गारन्टी मानिकय चलू।

आउ, आदरणीय उदय चन्द्र झा विनोदक ५ गोट कविता पढी, बुझी आ रमि जाय – रमलाक बाद अपन सही समझ आ बुझ प्रतिक्रिया मे जरूर लिखब, से अनुरोध।

१.

एखनो भोज करैए गाम
झगडा रोज करैए गाम
रजधानी के डेन पकडि क
तंगतरेज करैए गाम।

चटिया सभ औआ रहलैए
पढबा लै बौआ रहलैए
लाथ लगा क कोनो बेमारी
एखनो रोज मरैए गाम।

अधिक लोक भेलै परदेसिया
मुर्दा डाहब भेलै समस्या
वरियाती देखियौ ढंगरल छै
एखनो खूब जगैए गाम।

दशमी मे मेला लगबैए
रस्ते पर ठेला लगबैए
मटिया तेलक भेलै किल्लत
खूबे खोज करैए गाम।

राजनीति घर घर ढुकि गेलै
कय टा गुट गाँ मे बनि गेलै
सभ के अपना जोगर बुद्धि छै
बैसल ठाम गजैए गाम।

ढहल मकान अनेरो देखबै
बनल मकान घनेरो देखबै
सब इनार त भरा गेल छै
पोखरि आब भरैए गाम।

हवा शहर सँ आबि रहल छै
घर छोडि सभ भागि रहल छै
आय उपाय बचल छै जकरो
सेहो नहि अटकैए गाम।

सरकारी दवाइ नहि होइ छै
सरकारी पढाइ नहि होइ छै
बूढ बलाय बहुत घर भेलै
मिथिला मे कुहरैए गाम।

२.

पेट एक टा समस्या छै
मुदा पेटे टा समस्या नहि छै
पेट भरनहि सुखी भ जायब
से बात नहि छै
बेसी गलत काज भरलहे
पेट बला करै छै
करोडक करोड वैह संघरै छै।

धनिकहे मे होइ छै सर्वाधिक तलाक
वैह होइ छै बुर्राक
एक चोर दोसर चोर के पकडै छै
किछु ल छोडि दै छै
चोर पकडय पठबियौ
चोरि करय लगै छै
निस्तरर ई वर्ग ककरो सँ नहि डरै छै।

धनाग्रह सब सँ बडका रोग छै
एकर नहि छै कोनो अन्त
तृष्णा अनन्त
एक सँ एक्कैस करबा मे
लागल रहै छै भरलाहा पेट
वैह करै छै गरिबहाक आखेट।

गरिबहा के हथियार बना
बिगाडै छै तंत्र
भरलहे पेट बलाक कारणे
हकन्न कनै लोकतंत्र
मंत्र जाप पूजा भंडारा
ओकरे मन्दिर ओकरे गुरुद्वारा
ओकरे सभठाँ ऊचका आसन
ओकरे हाथ व्यवस्था
ओकरे राग तर शासन।

३.

देखल समाचार जे नारी लडती सीमा पर
गोली दुश्मन पर बरिसौती, मरती सीमा पर
सत्य पुछी त सुनि क हमरा, नहि लागल से नीक
कैंची सँ यदि लकडी काटब, कहू कहत के ठीक

नारी आदि शक्ति छथि तैयो हत्या हिनक न काज
हिनके अवदानक कारण स्थापित सकल समाज
माय बिना कल्पना शिशुक नहि संभव हो श्रीमान
भगवतीक पूजा भनसा घर, बाहर मे भगवान

काली माई लक्ष्मी बाई, देब अहाँ दृष्टान्त
किन्तु तकर मतलब नहि कथमपि, से बनबी सिद्धान्त
निर्विकल्प भेनहि नारी के कर शोभय तरुआरि
ओना रहरहाँ क्यो नहि पठबय, नारि करय लै मारि

राधा के बंशी पकडा क, कृष्ण चलाबथि चक्र
शस्त्र चलाबथि वनिता बूझू काल भेल अछि वक्र
घर थिक मन्दिर आंगन कंचन, नारी कारण मीत
सदाचार व्यवहार त्रिया छथि, लिखिया पढिया गीत

दश पुरुष मिलनहुँ नहि संभव होइछ एक परिवार
एक गोट नारी अयला सँ, सब वितान हो ठाढ
सीता शक्ति थिकी नहि संशय, युद्ध करै छथि राम
आपतकाले मे अबैत अछि, नारी हाथ कृपाण

गार्गी मैत्रेयी सावीत्री, नारी के प्रतिमान
तारा मन्दोदरि अनसूया, भरल घनेरो नाम
केहन भव्य माताक रुप अछि, भगिनी केहन उदात्त
सौन्दर्यक प्रतिमान सुन्दरी, क्षमा पकडने गात

४.

हम मैथिल अपना घर सकुचल बैसल छी
चालू राजनीति सँ हम सभ थकुचल छी
सब पूजी रहितो कमजोर कहाबी हम
दुश्मन के स्तवन लिखी आ गाबी हम

हमरा पूजी पर महान ई भारत अछि
जनक जानकी याग्यवल्क्य पुरखारत अछि
बाट देखा क अनका अपने ठाढे छी
आगुक जनमल बूझय हम गमारे छी

हम गमार नहि संस्कार सँ भारी छी
अपन दर्शनक परम्परा आभारी छी
शस्त्रक मोजर अधिक न कहियो हमरा ठाम
शास्त्र पढी पढबाबी हम्मर पातर कान

भेल सुगौली सन्धि काटि देलक हमरा
उभय राष्ट्र के बीच बाँटि देलक हमरा
क्षत विक्षत क हमरा मगध सिहाबैए
उनटा धार बहा हमरा पतराबैए

तुलसी सूर कवीर घोंटि लेलक हिन्दी
विद्यापति नहि पचलै भेलै हदमद्दी
आइयो पटना सँ फरमान पठाबैए
वीद्यालय मे भाषा नहि पढबाबैए

अपनो लोक बैसि गद्दी पर बदलि गेलै
पछिला कहलाहा सोचलाहा बिसरि गेलै
भाषा के अनिष्ट कयलक अछि अपनो लोक
एकरा धकियौलक मुकियौलक बेश निधोख

आइ पाग जकरा तकरा माथा देखी
कयलक किछु नहि आर बघारैए शेखी
के कहतै पागक मतलब इज्जति होइ छै
पाग खसयबा के मतलब बेइज्जति होइ छै

पाग पहिरबा .के सामर्थ्य न देखै छी
बैसल बैसल हम रहिका सँ जोखै छी
मिथिला के स्थान घुराबय से संतान
आशा कनिएँ देलक अछि मैथिली मचान

५.

बहुत विकास क लेलक अछि आजुक लोक
एटम बम उडा रहल अछि
सगर संसार उत्तर कोरिया सँ डेरा रहल अछि
आब ओकरा शुद्ध जलोक नहि रहलै दरकार
काज करतै सरकार
ओ ककरो कहल मे नहि अछि।

ग्रामीण समाज मे लेपटा क रहब
ओकरा नहि छै मंजूर
ओकरा नहि पसिन्न छै पुरनका दस्तूर
भगिनीक कन्यादान किंवा पिताक एकोदिष्ट सँँ
ओकरा नहि रहलै कोनो मतलब
ओ अपन मग मे रहैत अछि
घर बैसल अमेरिका सँँ ‘ गप करैत अछि।

आजुक मैथिलानी नहि गबैत छथि
सोहर समदाओन
आब कतय विरहा कतय धानक दाओन
बरुआर बाली वहुआसिन के नहि बूझल
छनि जे लगनी कोन अवसर पर
गाओल जाइत छै
ढेकी की होइ छै
से नहि बूझै छै आजुक छौंडी।

कूपमंडूक नहि अछि आजुक लोक
ओ वृहत्तर समाज सँ जुडि रहल अछि
ओकरा नानी गाम नहि
नैनीताल सोहाइत छै
शर्मा बेटाक वरियाती गोयल जाइत छै
अपन गैया अपन खुट्टा नहि बन्हाइत छै।

पुरान परिपाटी सँ आबक युवा
नहि करैछ विवाह
आब पहिने परिचय फेर डेटिंग
नीक जकाँ अजमा क एक दोसर के
फेर कोनो आलीशान होटल मे
लडका लडकीक बीच होइछ अनुबन्ध
आवश्यकता पडने अलग भ जयबाक
पहिले सँ रहैछ प्रबंध
जाधरि मोन करय संग रहू।

ठीके बहुत विकास क लेलक अछि लोक
गाम सँ बोमछि क घर छोडि पडाइत अछि
शहर मे घर लेल ढहनाइत अछि
गुड्डी जकाँ पताइत अछि।