मानव छी त कष्ट उठबय पड़त, सुमिरन मात्र सँ सुख भेटत
सुमिरन मात्र सँ सुख भेटत – प्रवीण नारायण चौधरी मानव संसार मे अनेकों दुःख, पीड़ा, शोक, सन्ताप आदिक भरमार अछि । एहेन कियो नहि जेकरा ई सब किछु नहि भोगय पड़ैछ । भगवान् रामचन्द्र जी पर्यन्त पिताक शोक, मानव जीवनक दुरुह कष्ट वनवास, पत्नी-विरह, विमाताक कोप आदि झेललनि । सीताक चरित्र देखब त ओ सामान्य … मानव छी त कष्ट उठबय पड़त, सुमिरन मात्र सँ सुख भेटत









