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प्रवीण नारायण चौधरी

हरिमोहन झा लिखित अत्यन्त चर्चित आ लोकप्रिय लेख – “पाँच पत्र”

साहित्य – प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. हरिमोहन झा लिखित ‘पाँच पत्र’ एक दड़िभङ्गा १-१-१९ प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी! मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, हरिमोहन झा लिखित अत्यन्त चर्चित आ लोकप्रिय लेख – “पाँच पत्र”

मिथिलाक पिछड़ापनक मुख्य कारण अशिक्षा, आ अशिक्षाक मुख्य कारण की?

बहस मिथिलाक पिछड़ापनक मुख्य कारण अशिक्षा, आ अशिक्षाक मुख्य कारण की? एक सर्वेक्षण – सर्वेक्षक प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा फेसबुक पर विचार-विमर्श   सामाजिक संजाल केर बहुत पैघ उपयोग छैक आजुक समय मे। अहाँ कोनो गूढ सँ गूढतम् विषय पर विमर्श कय सकैत छी, कोनो गम्भीर जिज्ञासा पर विज्ञजनक राय लय सकैत छी, कोनो सन्दर्भ मिथिलाक पिछड़ापनक मुख्य कारण अशिक्षा, आ अशिक्षाक मुख्य कारण की?

हर सफल महिला के पाछाँ एक पुरुष के हाथ होइत अछि – प्रतिभा झाक लेख

लेख – प्रतिभा झा, विराटनगर (बीए, प्रथम वर्ष) ओहि पुरुषके हमरा तरफ सं कोटि-कोटि प्रणाम जे एहि कलयुग मे नारीक सम्मान के रक्षा हेतु अपन मस्तक के छिन क’ दैत छथि! “हर सफल महिला के पाछाँ एक पुरुष के हाथ होइत अछि” । हिंदू परम्परा के परिवार में सामान्यतः पितृसत्तात्मक समाज ही होइत अछि, मुदा एकर हर सफल महिला के पाछाँ एक पुरुष के हाथ होइत अछि – प्रतिभा झाक लेख

चर्चित विद्वान् पं. गोविन्द झाक चिट्ठी मिथिलाक मुखिया लोकनिक नाम – सन्दर्भ मैथिली पठन-पाठन

महत्वपूर्ण लेखः साभार डा. रमानन्द झा ‘रमण’ केर फेसबुक पोस्ट (ई आलेख पटना सँ प्रकाशित मैथिली मासिक पत्रिका ‘घर-बाहर’ मे सेहो प्रकाशित भऽ चुकल अछि। मिथिलाक मुखिया सभक नाम: पं श्री गोविन्द झाक पत्र: आदरणीय मुखिया जी, प्रसन्नताक बात जे अपन राज्य बिहारमे पंचायती राज चालू भेल आ जनता अपने केँ श्रद्धा-विश्वासपूर्वक मुखियाक उच्च आसनपर चर्चित विद्वान् पं. गोविन्द झाक चिट्ठी मिथिलाक मुखिया लोकनिक नाम – सन्दर्भ मैथिली पठन-पाठन

बसंत – दीपिका झा केर एक सुमधुर नव रचना

साहित्य – दीपिका झा “बसंत” बसल बसंत अहि नैन…….. मधुमासक मधु छलकल चंहुदिश, भीजल अछि दिन-रैन…….। बसल बसंत अहि नैन……..।।   वन-उपवन नवकल्प सं साजल, कोयली लय में कुहकय लागल, हलसल अछि दिन-रैन…….। बसल बसंत अहि नैन……..।।   आमक मज्जर सं तरु पाटल, मधुर बयार देखि पोह फाटल, शीतल भेल दिन-रैन………। बसल बसंत अहि नैन……..।। बसंत – दीपिका झा केर एक सुमधुर नव रचना

आउ बुझैत छीः सहरसा मे २ सँ ४ अप्रैल माल्फ आयोजन २०२१

मिथिला आर्ट, लिटरेचर एन्ड फिल्म फेस्टिवल – सहरसा   अप्रैल २ सँ ४, २०२१ ई.   प्रस्तावित स्थल – जिला प्रेक्षागृह, विकास भवन समीप सहरसा – जेकर उद्घाटन हालहि बिहार सरकार द्वारा सम्पन्न भेल अछि, जाहि ठाम सहरसाक सर्वथा नव आ आधुनिक सम्पूर्ण सुविधा जाहि मे ३६० गोटाक बैसबाक आ अपनहि स्थान सँ माइक्रोफोन मे आउ बुझैत छीः सहरसा मे २ सँ ४ अप्रैल माल्फ आयोजन २०२१

कहीं हमहुँ-अहाँ एहि रोग केर शिकार त नहि?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी #वाणीसूल_बीमारी काफी समय अध्ययन सँ एक विशेष तरहक रोग केर पता चलल, एहि रोग केर नाम छी ‘वाणीसूल’। जेना सूलवाइह (डिसेन्ट्री) पेट के रोग छी तहिना निज भाषा छोड़ि आन भाषा अपनेनिहार मे वाणी बदलबाक कारण वाणीसूल नामक रोग होइत छैक। एहि रोग मे अपनहि वाणी सँ आत्मीयता समाप्तिक दोष कहीं हमहुँ-अहाँ एहि रोग केर शिकार त नहि?

सोहन बाबूक दुइ पीढीक यथार्थ – तेसर पीढी मे कि होयत से कल्पनातीत अछि

दहेज प्रथा के साइड ईफेक्ट्स – प्रवीण नारायण चौधरी (ई एक काल्पनिक कथा थिक। प्रतिनिधित्व सच्चाई केर करैत अछि। यदि किनको सँ मेल खाय त केवल संयोग बुझब।) मोहन बाबू चारि भैयारी छलाह। चारू भाइ एक सँ बढिकय एक पढल लिखल। चारू गोटे नौकरी मे, चारूक धियापुता बहुत संस्कारी आ पढाई-लिखाई मे बढनमा। ई लोकनि सोहन बाबूक दुइ पीढीक यथार्थ – तेसर पीढी मे कि होयत से कल्पनातीत अछि

किछु महत्वपूर्ण मंत्र – जीवनोपयोगी साधना मंत्र जाप सँ सिद्धि लेल सर्वोपयोगी

विभिन्न शास्त्र आ धर्म (यथा हिन्दू, जैन, बौद्ध आदि) मे उपयोग मे रहल व्यवहारिक मंत्रक संकलन १. गणपति स्तुति सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम् । गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ॥ १॥ गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं करीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम् । सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥ २॥ शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं प्रकाममिष्टदायिनं सकामनम्रपङ्क्तये । चकासतं किछु महत्वपूर्ण मंत्र – जीवनोपयोगी साधना मंत्र जाप सँ सिद्धि लेल सर्वोपयोगी

मैथिलीभाषी जनमानस मे भाषिक जनजागरण अत्यावश्यक – समेकित अभियान शीघ्र संचालित होयत

विशेष सम्पादकीय सन्दर्भ नेपालक जनगणना २०७८ आ मैथिली भाषाक स्थिति पर सामाजिक चिन्तन विदिते अछि जे नेपालदेश मे एहि वर्ष २०२१ (विक्रम संवत साल २०७८) मे जनगणना होमय जा रहल अछि। भाषिक पहिचान केर आधार पर नेपालदेश मे नेपाली भाषाक बाद दोसर सर्वाधिक बाजल जायवला भाषा मैथिली केर छैक। पिछला जनगणनाक तथ्यांक सेहो एहि बातक मैथिलीभाषी जनमानस मे भाषिक जनजागरण अत्यावश्यक – समेकित अभियान शीघ्र संचालित होयत