मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय
मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय दोहा : कि भेल भेंट कि फिरि गेला श्रवण सुयश सुनि मोर। कहे न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर ॥५३॥ भावार्थ:- हुनका सँ तोहर भेंटो भेलौक या ओ सब हमर सुयश सुनिकय … मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय








