पंचतंत्र केर खिस्सा – मंदबुद्धि सँ विनाश
मंदबुद्धि सँ विनाश (पंचतंत्र केर कथा, अनुवादः प्रियशील नारायण चौधरी, कक्षा-८, बीकेवीएम, विराटनगर) एगो जुलाहा अपन करघा के बनबै के लेल लकड़ी लै ल’ जंगल गेल छेलै त ओकरा एगो मोटका गाछ देखेलै ओर अप्पन कुल्हाडी चलेनाइ सुरु कैर देलक। तेखने ओ वृछ पर सँ प्रेत के आवाज एलै – “ए मुर्ख, एकरा नै … पंचतंत्र केर खिस्सा – मंदबुद्धि सँ विनाश








