मृत्युक बाद लोह आ पाथर छुबाक मानवीय मर्म पर वाणीक आवाज
विचार-विमर्श – वाणी भारद्वाज जेना कहल गेल छैक जे कोनो तरहक अनुभव अपना पर बीतत तखने होयत. पिताजीक अचानक मृत्यु हमरा सब केँ शून्य क देने छल. एकदम हस्तप्रत छलहुँ. ऐतेक जिन्दादिल इन्सान एना कोना जा सकैत छैथ? प्रकृति के नियम छैक. तथापि, संस्कार मे जाय सं पहिने गामक काका सब कहि गेलाह, जखन कर्त्ता … मृत्युक बाद लोह आ पाथर छुबाक मानवीय मर्म पर वाणीक आवाज









