योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार
दृष्टि-विचार – योग्यता आ शुचिता – प्रवीण नारायण चौधरी कर्मकांड मे कोनो निश्चित कर्म लेल के योग्य आ के अयोग्य होइछ तेकर कय तरहक सीमांकन-पृष्ठांकन आदिक बात जेठ-श्रेष्ठ-विद्वान् कर्मकांडी लोकनि केर मुंहे सुनैत छी। स्वयं सेहो कर्त्ता बनि पिताक मृत्योपरान्त श्राद्धकर्म सँ लैत एकोदिष्ट कर्म, पारवन कर्म, तर्पण, आदि करैत छी। दरभंगा उर्दू … योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार









