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प्रवीण नारायण चौधरी

नेनपन के किछु झलफल स्मरण – अलकतरा सँ पाटल ओ बगीचा

लेख – वाणी भारद्वाज नेनपन के किछु झलफल स्मरण जहिया हमर पिताजी लौकही ब्लौक मे चिकित्सा पदाधिकारी छलाह. हम सब सरकारी आवास मे रहैत छलहुँ. घरक सीध मे चिकित्सालय छल. घरक बाम कात थाना छल. तहिया सेंध मारि क चोर चोरी करैत छल सेह बड पैघ बात होइत छल. आ चोर के पुलिस पकडैत छल. नेनपन के किछु झलफल स्मरण – अलकतरा सँ पाटल ओ बगीचा

मैथिल ब्राह्मण समुदाय मे बियाह स विध भारी

लेख – स्नेहा प्रकाश ठाकुर मैथिल ब्राह्मण समुदाय में बियाह बाकी सब प्रान्त केर विभिन्न समुदाय स अलग होइछ । बाकी सबके बियाह त एक दिन या दू दिन में निपटि जाइत अछि मुदा हमरा (मैथिल) सबमे त कम स कम 15 दिन लगैत अछि, तकर बादो भैर साल के पाबनि तिहार केर त अन्त मैथिल ब्राह्मण समुदाय मे बियाह स विध भारी

पुरूष शेर तँ नारी की – सवाल लेखिका रूबी झाक आ जबाब देथिन पाठक लोकनि

लघुकथा – रूबी झा नारी केँ अवला कहल जाइत छन्हि, तकर हम सख्त विरोधी छी। हम अवला नहि छी, हम सवला छी। हम काली, दुर्गा, जानकी छी। फेसबुक पर एक दिन एकटा व्यक्ति प्रश्न रखने रहैथि जे पुरुष केँ शेर कहल जाइत छन्हि तँ महिला केँ कि कहल जाइत छन्हि, ताहि पर हम हुनका जबाब पुरूष शेर तँ नारी की – सवाल लेखिका रूबी झाक आ जबाब देथिन पाठक लोकनि

कठोर निर्णय आ संकल्प मात्र लोक केँ महान बनबैत छैक (नैतिक कथा)

सफल आ महान व्यक्ति सोहनक कथा (नैतिक कथा – करियर निर्माण मे लागल छात्र-छात्रा लेल उपयोगी) धियापुताक हाथ पर माँ-बाबू अथवा जेठ-श्रेष्ठ चारि-आना, आठ-आना देल करैत छल जाहि सँ पाँच पैसाक एकटा बैलून, दोसर पँच-पैसाही सँ पाँच गो लाय (मुरहीक लाय), तहिना अन्य १५ पैसाक कतेको रास धियापुताक मनोरंजन लायक चीज-वस्तु कीनिकय मेला घुमनाय भऽ कठोर निर्णय आ संकल्प मात्र लोक केँ महान बनबैत छैक (नैतिक कथा)

सोनालीक आत्मनिर्णय तथा अन्तिम मंजिल

लघुकथा – रूबी झा सोनाली तेसर बेर माँ बनैय वाली छलैथ,और दुइ टा बेटी पैहने छलखिन्ह। एहि बेर सासूरक पूरा परिवार यानि कि सासु-ससुर, पति, दियादनी-भैंसुर, ननैद, दियर सब मिलिकय कहैय छलखिन्ह दिन-राति, अहाँ चलू अस्पताल अल्ट्रासाउंड कराबऽ लेल, अगर फेरो बेटिये हैत तँ ओकरा सफैया करबा लेब, माने जे कोखिये में कन्या-भ्रूण हत्या कय सोनालीक आत्मनिर्णय तथा अन्तिम मंजिल

जीवन एकटा कठही गाड़ी – हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी

गीत – प्रदीप पुष्प जीवन – गीत जिनगी एकटा कठही गाड़ी हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी कतबो थाकल होइ सवारी हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी १) कखनो सुख केर चिक्कन बाट होइ कहियो दुख केर खाधि अभरि जाय कहियो नौ – छह थार साजल होइ कहियो भुखले दिवस गुजरि जाय मूँह मलिन नै जीवन एकटा कठही गाड़ी – हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी

एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

गृहस्थ लेल साधारण नियम (स्रोत: कल्याण) १. प्रातकाल सूर्योदयसँ पहिले उठू। २. उठिते भगवान् केर स्मरण करू। ३. शौच-स्नान आदि सँ निवृत होइत भगवान् केर उपासना, सन्ध्या, तर्पण आदि करू। ४. बलिवैश्वदेव (नमकरहित पाकल भोजनसँ अग्निकेँ हवन) केलाके बाद समयपर भोजन करू। ५. रोज प्रातकाल माता, पिता आ गुरु आदि श्रेष्ठजनकेँ प्रणाम करू। ६. इन्द्रियकेर एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

“प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह” (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)

इतिहास – डा. उपेन्द्र ठाकुर “प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह”   (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)   विदेह नाम सम्बद्ध प्रदेश तथा एकर जनता एहि दुनूकेँ देल गेल छलैक। ब्राह्मण ग्रन्थ सभक सम्पादनक समय मध्यदेशक पूर्वमे कौशल विदेह नामक सजातीय जन सभक महासंघ छल, जकर महत्व पुरु-पंचाल जन सभसँ थोड़बो कम नहि छलैक।*१ प्राचीनकालमे विदेह देश “प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह” (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)

सेन्सरबोर्डक बापो फेल अछि एहि अराजक मनोरंजक गीत-संगीतक आगाँ

विशेष सम्पादकीय द नेपालटप आनलाइन पत्रिका मे श्री कमल मण्डल केर लेख ‘सेन्सरबोर्ड न हुंदा बिकृत बन्दै मैथिली गीत-संगीत’ शीर्षकक महत्वपूर्ण लेख पढलहुँ। काफी नीक ढंग सँ नेपालक मैथिली गीत-संगीत क्षेत्र मे आबि रहल क्रान्तिकारी परिवर्तनक समीक्षा कयलनि अछि। चूँकि कमलजी स्वयं सेहो एक फिल्मकर्मी आ कलाकार होयबाक संग खानदानी रंगकर्मी सेहो छथि, हुनका मे सेन्सरबोर्डक बापो फेल अछि एहि अराजक मनोरंजक गीत-संगीतक आगाँ

चनादाय केर सवाल पुरूष प्रधान समाज सँ छन्हि – वाणी भारद्वाजक टटका लघुकथा

लघुकथा – वाणी भारद्वाज एकपक्षीय निर्णय सं क्षुब्ध चनादाय चनादाय तीन साल पर अपन माँ लग जा रहल छलीह. गृहस्थी मे ओझरायल तइयो एहि बेर चारिये दिनक असगरे धिया-पुताक घरबला पर छोड़ि स्वयं नैहरा जाय लेल उत्साहित छलीह. माँ अपन छोट बालक आ हुनकर पत्नी तथा दुइ टा बच्चा संगे रहैत छलीह. जेना अपन खुट्टा चनादाय केर सवाल पुरूष प्रधान समाज सँ छन्हि – वाणी भारद्वाजक टटका लघुकथा