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सैनिक केर बलिदान सँ राष्ट्र सुरक्षित अछि

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : – युद्ध काल मे सेना आ हुनकर परिवारक योगदान

जखन देश पर संकट अबैत अछि, तखन सेना ढाल बनिकय आगाँ आबि जाइत अछि। सैनिक अपन प्राण के बाजी लगा कऽ राष्ट्र के रक्षाक लेल तैयार रहैत छथि। मुदा ई केवल ओहि वर्दीधारी सैनिक तक सीमित नहि होइत अछि। हुनकर परिवार सेहो युद्धक अदृश्य नायक बनि जाइत अछि। एहेन समय मे जखन सैनिक सीमापर तैनात रहैत छथि, त’ हुनकर परिवार अपन समस्त भावना, भय आ उम्मीद के हृदय मे समेटि कऽ देशक सेवा मे सहभागी बनैत अछि।

सेनाक बलिदान – राष्ट्रक सुरक्षा के गारंटी

सेना राष्ट्रक आत्मा होइत अछि। युद्धक समय ओ लोकनि राति-दिन जागिकय सीमाक रक्षा करैत छथि। कतेको बेर सैनिक अपन प्राण गमबैत छथि, कतेको बेर शारीरिक रूप सँ घायल होइत छथि, मुदा ओ कोनो शिकायत नहि करैत छथि। हुनकर उद्देश्य केवल एक होइत अछि – “राष्ट्र सर्वोपरि”। ई बलिदान देशक स्वाधीनता आ सम्मान के बनाए रखैत अछि।

जखन भारत चीन, पाकिस्तान वा अन्य कोनो संकट सँ जूझलक, त सेना पहिल मोर्चापर डटि गेल। 1965, 1971, 1999 केर कारगिल युद्ध हो वा उग्रवादक विरुद्ध अभियान – सेना सदिखन अदम्य साहस देखेलक। लेकिन ई अद्भुत साहसक संग ओ अपन घर, बाल-बच्चा, माता-पिता आ पत्नी केँ छोड़िकय ड्यूटी पर जाय छथि।

सेनाक परिवारक मूक योगदान

एक सैनिकक पत्नी मात्र पत्नी नहि, बल्कि एक मजबूत स्तंभ होइत छथि। हुनकर आँखिक नोर अक्सर हुनकर मुस्कान में छुपल रहैत अछि। जखन हुनकर पति युद्धभूमि पर होइत छथि, त’ ओ हर पल चिंता आ आशंकाक बीच जीबैत छथि। मुदा ओ अपन घर, बच्चा आ वृद्ध सास-ससुरक देखभाल सेहो करैत छथि – बिनु कोनो शिकायत।

सैनिकक बच्चा अपन पिताक स्नेह सँ वंचित रहि जाइत अछि, मुदा हुनका गर्व होइत अछि जे हुनकर पिताक योगदान राष्ट्र निर्माण मे अछि। सैनिकक माता-पिता सेहो गर्व आ पीड़ा केर अद्भुत मिश्रण सँ गुजरैत छथि। ओ सब जखन अपन बेटा के युद्ध क्षेत्र मे देखैत छथि, त’ हृदय काँपि उठैत छैन्ह, मुदा देशक खातिर ई बलिदान हुनका गौंरवपूर्ण लगैत छैन्ह।

मानसिक दबाव आ सामाजिक भूमिका

युद्ध काल में सैनिक आ हुनकर परिवार पर मानसिक आ सामाजिक दबाव बहुत बढ़ि जाइत अछि। समाज मे कतेको बेर लोक सिर्फ सैनिक के नायक मानैत अछि, परिवारक संघर्ष पर ध्यान नहि दैत अछि। लेकिन जखन एक सैनिक युद्धभूमि पर जाय छथि, त’ हुनकर पीठ पाछू एक पूरा परिवार होइत अछि जिनकर अनुपस्थिति मे जीवन पहाड़ ढोइत अछि।

आर्थिक रूप सँ सेहो बहुत परिवार संघर्ष करैत अछि, विशेष कऽ जखन कोनो सैनिक शहीद भऽ जाइत छथि। सरकार आ समाज केँ चाही जे ओहन परिवारक सम्मान पूर्वक देखभाल करे, हुनकर बच्चाक शिक्षा, रहन-सहन आ मानसिक स्थिति पर ध्यान दैथ।

देशक कर्तव्य – सैनिक आ हुनकर परिवारक संग

ई आवश्यक अछि जे देशवासी सेना आ हुनकर परिवारक योगदान केँ केवल युद्धक समय नहि, बल्कि सामान्य समय मे सेहो सराहैथ। स्कूल, कॉलेज आ मीडिया मे ओहन परिवारक कथा कहबाक चाही जाहि सँ नव पीढ़ी प्रेरित होय। सरकार केँ चाही जे शहीद सैनिकक परिवार लेल विशेष सहायता योजना बनाबै, आ सक्रिय सैनिकक परिवारक मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा आ जीवन स्तर पर विशेष ध्यान दै।

सेना देशक रक्षक होइत अछि, आ हुनकर परिवार ओहि रक्षकक मजबूत आधार। युद्ध काल मे जतेक महत्व सैनिकक होइत अछि, ओतबे हि हुनकर परिवारक सेहो। ओ सब बिना बंदूक उठबैत, बिना मोर्चा पर गेने, एक सैनिक सन कर्तव्य निभबैत छथि। हमर सभक ई नैतिक जिम्मेदारी अछि जे ओहि परिवार केँ ससम्मान, सहयोग आ सदैव प्रशंसा करियै। राष्ट्र के मजबूती केवल सीमापर नहि, बल्किः घर-घर में ओहि बलिदानक सम्मान सँ होइत अछि।

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