छुट्टी के असल आनंद गामक आमक गाछी मे भेटैत छै

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लेख

प्रेषित: कीर्ति नारायण झा

गर्मी छुट्टी पहिले आ आब – अध्ययन काल में सभ सँ आनन्द छुट्टी के समय में होइत छैक। विद्यालय में जखन कहल जाइत छलैक जे गर्मी छुट्टी में विद्यालय एतेक दिन धरि बन्द रहत तऽ सभ सँ आनन्द हमरा सभ सन विद्यार्थी के होइत छलैक। बुझाइत छल जेना कोनो बड़का जेल सँ छुटि गेलहुँ अछि। पढाई लिखाइ, सबक याद केनाइ, शिक्षक के डर सँ सकदम्म भेल मोन एकाएक स्वतंत्र भऽ जाइत छल आ मोन पड़ैत छल अपन गामक मुसहरी गाछी। हमरा सभ सन धिया पूता के लेल पिकनिक स्पाट छियैइ अपन सभक सभ सँ सुंदर गाम। एहेन धिया पूता जिनका साधन नहिं छैन्ह जे शहर में घर में एयरकंडीशन रहतैन तें ओ शहरक गुमसुरायल गर्मी में अपन शरीर के गर्मी सँ संघर्ष करवाक योग्य बनाओने रहैत छैथि जिनका उपर गामक जेठ महीना के रोद कोनो प्रभाव नहि डालि सकैत अछि कारण शहर के गर्मी आ देहातक गर्मी में जमीन आसमान के फर्क होइत छैक। गाम में जगह अइल फैल रहवाक कारणे गर्मी ओतेक भयंकर नहिं लगैत छैक जतेक कम जगह बला शहर में लोक गर्मी सँ घुटि घुटि कऽ मरैत अछि। गाम पहुंचलाक उपरान्त धिया पूता के हठ्ठा के बरद जकाँ अनुभव होइत छैक जे खेत सँ सीधे गाम पर भागैत छैक अथवा स्कूलक घंटी बजबा सँ पहिले झोरा लऽ कऽ तैयार धिया पूता के गाम पर जेबाक लेल होइत छैक। ओ सभ बन्धन सँ मुक्त अपना के पबैत अछि। ओ गाम गेलाक उपरान्त बनगदहा जकाँ सौंसे गाम बारी झारी रेंगैत रहैत अछि। गाम में पहुंच धिया पूता आजाद भऽ जाइत अछि आ आमक गाछी, जामुनक गाछी, गामक पोखरि झाखरि, खेत खरिहान में ओ एहि तरह रमि जाइत अछि जे ऒकरा पते नहिं चलैत छैक जे गर्मी के छुट्टी कोना बीति गेलैक आ शहर वापस अयवाक काल मोने मोने खूब कनैत अछि। धिया पूता पढाई लिखाइ के झंझट सँ एक डेढ महीना निश्चिंत भऽ जाइत अछि। ओकर मोन फ्रेश भऽ जाइत छैक आ ओ पुनः छुट्टी के बाद पढाई लिखाई में लागि जाइत अछि। गामक परिवेश के धिया पूता शहरक धिया पूता सँ बेसी कुशाग्र बुद्धि के होइत अछि। ओकर शरीर सेहो शहरक परिवेश मे पालल धिया पूता सँ मजबूत होइत छैक कारण ओकरा में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहैत छैक।आइ काल्हि के धिया पूता के पहिले के धिया पूता के अपेक्षा प्रतियोगिता बढवाक कारणे पढाई पर बेसी ध्यान देवय पड़ैत छैक आ ओहि मस्तिष्क पर बेसी जोर देवय पड़ैत छैक तें ओकरा अवकाश के आवश्यकता बेसी पड़ैत छैक तें गर्मी के छुट्टी में ओकरा अवकाश के लेल एहेन स्थान चाही जाहिठाम एकरा बेसी टोकनिहार नहिं भेटैक जाहि सँ ओकर मस्तिष्क के पूर्णरूपेण आराम भेटैत छैक। गामक आमक गाछी ओकरा लेल सभ सँ नीक स्पाट मानल जाइत छैक जाहि ठाम ओ अपन दुनियादारी बिसरि कऽ आम तोड़वा में, बिछवा में अथवा गाछी मे विभिन्न प्रकारक खेल कूद में बीतबैत अछि। एहि प्रकारे ओकर छुट्टी के समुचित उपयोग होइत छैक आ फेर सँ फ्रेश भऽ कऽ अपन पढाई के लेल तैयार भऽ जाइत अछि। मुदा आब परिस्थिति बदलि गेलैक अछि ।लोक के बेसी पाई भऽ गेलैक अछि संगहि देखसी में लोक अपन गाम घर छोड़ि शिमला मनाली गोआ इत्यादि जगह पर घुमैत छैथि जाहि मे धिया पूता सफर करिते करिते थाकि जाइत अछि तखन ओकरा छुट्टी के छुट्टा बला आनन्द कतय सँ भेटतै। असली छुट्टी होइत छैक अपन माए बाप अभिभावक अथवा शिक्षक सभ सँ दूर गाछ बृक्ष आ चिरैई चुनमुन्नी संग स्वच्छंद रूप सँ छुट्टी मनेनाइ…… इ आनन्द मात्र आमक गाछी मे भेटि सकैत अछि.. कीर्ति नारायण झा