“निजी जीवनपर सोशल मीडियाक बढ़ैत प्रभाव”

385

— आभा झा।   

 

मौजूदा जीवनमे सोशल मीडियाक बढ़ैत प्रभावसँ शायद ही कियो अनजान अछि। सोशल मीडिया इंसानकेँ निजी जीवनसँ लऽ कऽ सामाजिक आ आर्थिक जीवनमे अहम किरदार निभा रहल अछि। सोशल मीडिया इंसानक व्यवहारकेँ बदलै वाला प्लेटफॉर्मक तौर पर उभरि रहल अछि। सोशल मीडियाक प्रभाव सकारात्मक होइकेँ संग-संग नकारात्मक सेहो भऽ सकैत अछि। सोशल मीडिया हमर संस्कृति, हमर अर्थव्यवस्था आ दुनियाक बारेमे हमर समग्र दृष्टिकोणकेँ प्रभावित करयमे महत्वपूर्ण भूमिका निभबैत अछि। सोशल मीडिया एक नया मंच अछि जे लोकक विचारक आदान-प्रदान करय, जुड़य, संबंध बनाबै आ कोनो उद्देश्यक लेल संगठित होमय, सलाह लेबय आ मार्गदर्शन प्रदान करयमे हमर सहयोग करैत अछि।
आम आदमीकेँ सोशल मीडिया सोशलाइज जरूर कएने अछि। मुदा एकर चलते परिवारमे तनाव पैदा भऽ रहल अछि। साफ लहजामे कहि तऽ सोशल मीडिया परिवारकेँ तोड़ि रहल अछि। जतय हम फेसबुक आ व्हाट्सएपसँ नब-नब दोस्त ताकि रहल छी, ओतहि पैघ पैमाना पर ब्रेकअप सेहो भऽ रहल अछि। ई सोशल मीडिया ही अछि, जकर प्रभावमे लोक पैघ पैमाना पर मैरेजसँ सिंगल स्टेटस दिस बढ़ि रहल अछि। सोशल मीडियाक कारण पति-पत्नीक बीच शक काफी बढ़ि गेल अछि, खास कऽ ओहि पति-पत्नीक बीच, जे वर्किंग छथि।
मोबाइल चैटिंग जतय एक दिस हमरा बहुत तरहक सुविधा देने अछि, डेटिंगकेँ नब आ रोमांचक अहसास देने अछि, ओतहि एहि चैटिंगसँ संबंधमे दरार बढ़ि रहल अछि। यैह चैटिंग बनल-बनाओल संबंधकेँ तोड़ि रहल अछि। देशभरमे पिछला दू -तीन सालक भीतर जे पारिवारिक झगड़ा आ मारिपीटक वारदात दर्ज भेल अछि, ओहिमे 30 फीसदीसँ बेसीमे सोशल मीडिया एकर जड़ि रहल अछि। सोशल कारण हत्या जेहेन अपराध 20 फीसदी तक बढ़ल अछि।
आमतौर पर मजाकमे कहल जाइत अछि कि सोशल मीडियाक वर्चस्व लोककेँ सामाजिकताकेँ खत्म कऽ देने अछि। अगर पूरा परिवारकेँ एक संग कोनो बातक लेल इकट्ठा भेनाइ होइ तऽ आइ ई बहुत मुश्किल काज भऽ गेल अछि। कियैकि लोक पूरा दुनियासँ तऽ हर समय जुड़ल रहैत अछि, मुदा सोशल मीडियाक कारण लोकेँ एक संग आपसमे मिलि कऽ बैसइकेँ लेल समय नहिं अछि।
अगर 2018-19 के तलाक संबंधी आंकड़ाकेँ ध्यानसँ देखि आ ओकर कारण पढ़ि तखन हैरान करय वाला बात अछि कि करीब 40 प्रतिशत तक तलाकक मामलाकेँ कारण सोशल मीडिया अछि। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटरकेँ कारण तलाकक मामलामे 30 सँ 40 फीसदी तक बढ़ोत्तरी भेल अछि। प्रेम विवाह सेहो आब पहिनेकेँ अपेक्षा बहुत जल्दी असफल होमय लागल अछि, कियैकि सोशल मीडियाक कारण अविश्वासक स्थिति बहुत बेसी भऽ रहल अछि। आब एहेन खबर पढ़य लेल बेसी भेटैत अछै कि चैटिंगक कारण पति-पत्नीमे तलाक भऽ गेलनि।
जे सोशल मीडिया संबंधकेँ मजबूत बनाबैकेँ लेल जानल जाइत अछि, आखिरकार ओ पहिनेसँ मजबूत संबंधकेँ एहि तरहें कमजोर कियैक कऽ रहल अछि? एकर सबसँ पैघ कारण अछि सोशल मीडिया जे लोककेँ अपनामे एतेक बेसी उलझा कऽ राखैत अछि कि लोकक लऽग अपन प्रियजनक संग वक्त बिताबैकेँ समय नहिं अछि। जखन लोक एक-दोसरसँ दूर होमय लगैत अछि, तखन हुनका बीचकेँ संबंधक तमाम भावना सेहो कमजोर पड़य लगैत अछि। हम अपन काज आ सोशल मीडियामे एतेक बेसी सक्रिय रहैत छी कि वास्तविक जीवनक लेल हमरा लऽग समय नहिं बचैत अछि।
सोशल मीडियाक हमर आहार-विहार पर सेहो प्रभाव पड़ैत अछि। आइ काल्हि छोट-छोट बच्चाक हाथमे मोबाइल पकड़ा देल जाइत अछि। मोबाइल देखैत माय हुनका भोजन करबै छथिन। माय अपन सुविधा देखैत छथि। पहिने बच्चाकेँ इम्हर-उम्हर घूमि-घूमि कऽ माय खुआबै लेल परेशान रहैत छलीह। आब बच्चा तऽ छोड़ू पैघ सब सेहो मोबाइल देखैत भोजन करैत छथि। पहिने लोक पूरा परिवारक संग गप्प-सप्प करैत भोजन करैत छल। कतेक आनंद रहै ओहि संग बइस कऽ भोजन करयमे। सोशल मीडिया पर विज्ञापन व फोटो वीडियोक माध्यमसँ अनेक प्रकारक भोज्य पदार्थक जानकारी अबैत रहैत अछि। ई सब भोज्य पदार्थ हमर स्वास्थ्यक लेल सही अछि या नहिं, ई जानय बिना ओकरा ग्रहण करयकेँ मन बना लैत अछि।
मनुष्यकेँ प्रतिदिन खेल-व्यायाममे समय देबाक चाही ओ समय सोशल मीडियामे लगा दैत अछि। आइ काल्हि नींदकेँ समस्याक पाछू पैघ कारण सोशल मीडियाकेँ बेसी इस्तेमाल अछि।
एक बेर किछु मित्रगण भ्रमणक लेल समुद्रतट पर गेलाह। ओहिमेसँ एक व्यक्ति अपन मोबाइलकेँ होटलक कक्षमे छोड़ि देलथिन। सब जलपान करय लेल बइसला। जलपानक मेज पर सब अपन मोबाइल पर लागल छलाह। बिना मोबाइल वाला व्यक्ति दोसरसँ गप्प करयकेँ प्रयास कऽ रहल छलाह। मुदा बेर-बेर प्रयास कएला पर सफल नहिं भऽ रहल छलाह। सोशल मीडियाक युगमे संवाद कतौ हेरा गेल अछि।
कोनो चीजक अति खतरनाक होइत अछि: अति सर्वत्र वर्जयेत। निजी क्षमता, पारिवारिक जीवन आ सामाजिक सक्रियताकेँ ध्यानमे राखैत हमरा एकर उपयोगक सीमा पर गौर करबाक चाही। सोशल मीडियाक अनिवार्य भूमिकाकेँ देखैत ओकर सकारात्मक उपयोगक दशा आ दिशा पर सतर्कताक संग डेग उठेनाइ आवश्यक अछि।